Sagar BMC Patient Death: बायोप्सी से पहले इंजेक्शन के बाद मरीज की मौत, परिजनों ने लगाए गंभीर लापरवाही के आरोप
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत से उठे सवाल
मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में एक मरीज की मौत के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि बायोप्सी प्रक्रिया की तैयारी के दौरान मरीज को ऐसा इंजेक्शन दिया गया, जिसे एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की निगरानी में दिया जाना चाहिए था। इंजेक्शन लगने के कुछ ही समय बाद मरीज की हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
गले में गांठ की शिकायत पर हुआ था भर्ती
जानकारी के अनुसार, मृतक देवेंद्र पाठक को गले में गांठ की समस्या थी। उन्हें 10 जून को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग के वार्ड नंबर 26 में भर्ती कराया गया था। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने बायोप्सी कराने का निर्णय लिया और 13 जून को इसकी तैयारी की जा रही थी।
परिजनों के मुताबिक, 12 जून को मरीज की ब्लड रिपोर्ट और अन्य जरूरी जांचें पूरी कर ली गई थीं। इसी दौरान अस्पताल स्टाफ ने परिजनों से एट्राक्यूरियम बेसिलेट (Atracurium Besylate) इंजेक्शन की तीन वायल मंगवाई थीं।
इंजेक्शन लगने के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों का आरोप है कि दवा लाने के बाद ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने इंजेक्शन की एक वायल मरीज की आईवी लाइन के माध्यम से लगा दी। इसके कुछ ही मिनटों बाद मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगी।
परिवार का कहना है कि देखते ही देखते मरीज की पल्स और हार्टबीट तेजी से गिरने लगी और कुछ ही समय में दिल की धड़कन रुक गई। स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टरों की टीम तुरंत सक्रिय हुई और इमरजेंसी प्रक्रिया शुरू की गई।
45 मिनट तक चला CPR, फिर वेंटिलेटर पर शिफ्ट
मरीज की हालत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक लगातार CPR दिया। लंबे प्रयासों के बाद मरीज की हार्टबीट वापस आई, जिसके बाद उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
इसके बाद मरीज को ICU में भर्ती किया गया और कई दिनों तक इलाज जारी रहा। परिजनों के अनुसार, 17 जून को मरीज की हालत में कुछ सुधार के संकेत मिलने लगे थे, लेकिन 18 जून को उसकी स्थिति फिर बिगड़ गई और ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिर गया। इसके बाद दोबारा वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया।
23 जून की सुबह हुई मौत
परिजनों के मुताबिक, 22 जून की रात मरीज की हालत फिर गंभीर हो गई थी। डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। अंततः 23 जून की सुबह लगभग 6:30 बजे देवेंद्र पाठक ने दम तोड़ दिया।
मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है।
मोबाइल इस्तेमाल और लापरवाही के आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इंजेक्शन लगाते समय संबंधित नर्स मोबाइल फोन और ब्लूटूथ डिवाइस का उपयोग कर रही थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसके अलावा परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि उसी समय एक अन्य मरीज को भी इंजेक्शन दिया गया था, जिसके बाद उसकी हालत भी बिगड़ गई थी और उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था, हालांकि बाद में वह ठीक हो गया।

अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया नहीं
इस मामले पर अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, मामला मेडिकल कॉलेज प्रशासन के संज्ञान में है और आंतरिक स्तर पर जांच की चर्चा चल रही है।
डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं मीडिया प्रभारी डॉ. विशाल भदकारिया ने कहा है कि पूरी जानकारी मिलने के बाद ही कोई आधिकारिक टिप्पणी की जाएगी।
एट्राक्यूरियम बेसिलेट क्या है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एट्राक्यूरियम बेसिलेट एक शक्तिशाली मसल रिलैक्सेंट दवा है, जिसका उपयोग आमतौर पर ऑपरेशन थिएटर और एनेस्थीसिया प्रक्रिया के दौरान किया जाता है।
यह दवा शरीर की मांसपेशियों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर देती है। यदि इसे बिना उचित निगरानी और श्वसन सहायता के दिया जाए, तो मरीज को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो सकती है।
इसी कारण इसे केवल प्रशिक्षित एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की निगरानी में ही दिया जाना चाहिए।
एनेस्थीसिया देने के नियम क्या हैं?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हाई-रिस्क दवाओं और एनेस्थीसिया प्रक्रिया के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होता है:
- मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री और जांच जरूरी होती है
- ब्लड प्रेशर, पल्स और ऑक्सीजन लेवल की निगरानी की जाती है
- दवा केवल प्रशिक्षित एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की देखरेख में दी जाती है
- प्रक्रिया के दौरान लगातार मॉनिटरिंग अनिवार्य होती है
- आपात स्थिति के लिए ICU, वेंटिलेटर और CPR व्यवस्था तैयार रहती है
- ऐसी दवाएं केवल नियंत्रित मेडिकल वातावरण में ही दी जाती हैं
मामले में उठ रहे बड़े सवाल
इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
- क्या हाई-रिस्क दवा परिजनों से मंगवाई गई थी?
- क्या दवा सही मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत दी गई थी?
- क्या एनेस्थीसिया विशेषज्ञ मौके पर मौजूद थे?
- मरीज की हालत बिगड़ने के बाद क्या तत्काल जांच शुरू हुई?
- यदि लापरवाही हुई तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
निष्कर्ष
सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में मरीज की मौत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और मेडिकल प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के आरोपों और अस्पताल प्रशासन की चुप्पी के बीच मामला अब जांच के दायरे में माना जा रहा है।
फिलहाल, सच्चाई आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी, लेकिन यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में मरीज सुरक्षा और हाई-रिस्क दवाओं के उपयोग को लेकर गंभीर बहस छेड़ चुकी है।
