MP सीहोर और भोपाल में फैक्टर VIII इंजेक्शन की किल्लत, दो मासूम बच्चों की जान पर बनी, पिता ने सड़क पर लगाया जाम
MP के सीहोर जिले से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां दो मासूम बच्चे जीवन रक्षक दवा “फैक्टर VIII” की कमी के कारण मुश्किल स्थिति का सामना कर रहे हैं। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दोनों बच्चे हर्ष और केशव पिछले 21 दिनों से आवश्यक इंजेक्शन से वंचित हैं। यह दवा हीमोफीलिया जैसे गंभीर रक्त विकार के इलाज में अनिवार्य मानी जाती है।
परिवार का कहना है कि लगातार प्रयासों के बावजूद न तो सीहोर और न ही भोपाल के सरकारी अस्पतालों में यह इंजेक्शन उपलब्ध हो पाया है, जिससे बच्चों की जान को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
दवा की कमी से परेशान होकर सड़क पर बैठा परिवार
लगातार 21 दिनों से दवा न मिलने और किसी भी स्तर पर सुनवाई न होने से परेशान होकर बच्चे के पिता श्रवण कुमार मेवाड़ा ने सोमवार को जिला अस्पताल के सामने अपने पूरे परिवार के साथ विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब उन्होंने मुख्य सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया।
प्रदर्शन के कारण इंदौर-भोपाल मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला अस्पताल से लेकर बढ़ियाखेड़ी माता मंदिर और कलेक्टर बंगले तक यातायात ठप हो गया। गंगा आश्रम के पास भी जाम की स्थिति बनी रही, जिससे कई घंटे तक आवागमन बाधित रहा।
आर्थिक तंगी और बेरोजगारी बनी सबसे बड़ी परेशानी
पीड़ित पिता श्रवण कुमार ने बताया कि उनके दोनों बच्चे हर्ष और केशव हीमोफीलिया नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में शरीर में चोट लगने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने बच्चों के लिए नियमित रूप से “फैक्टर VIII” इंजेक्शन लगाना अनिवार्य बताया है।
उन्होंने बताया कि वे बेरोजगार हैं और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। निजी मेडिकल स्टोर्स पर यह इंजेक्शन काफी महंगा मिलता है, जिसे खरीदना उनके लिए संभव नहीं है। ऐसे में सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा हैं, लेकिन वहां भी पिछले तीन सप्ताह से दवा उपलब्ध नहीं है।
परिवार का कहना है कि दवा के अभाव में बच्चों की हालत किसी भी समय बिगड़ सकती है और यह स्थिति उनके लिए अत्यंत भयावह है।
प्रशासन से कई बार लगाई गुहार
श्रवण कुमार मेवाड़ा ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से संपर्क किया। 19 जून को उन्होंने कलेक्टर को आवेदन देकर यह मांग की थी कि यदि प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है, तो बच्चों के बेहतर इलाज के लिए उन्हें मुंबई भेजने हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
लेकिन कोई ठोस समाधान न मिलने के कारण परिवार लगातार परेशान होता रहा। आखिरकार मजबूरी में उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा।
सड़क जाम से बिगड़ी यातायात व्यवस्था
जैसे ही परिवार ने मुख्य सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू किया, इंदौर-भोपाल व्यस्त मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जिला अस्पताल क्षेत्र से लेकर प्रमुख चौराहों तक जाम की स्थिति बनी रही।
कई एंबुलेंस, मरीजों की गाड़ियां और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन भी इस जाम में फंस गए, जिससे आम लोगों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस और प्रशासन को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रशासन मौके पर पहुंचा, दिया आश्वासन
घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन उमेश श्रीवास्तव प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या को गंभीरता से सुना।
सिविल सर्जन ने परिवार को आश्वासन दिया कि अस्पताल स्तर पर जल्द से जल्द “फैक्टर VIII” इंजेक्शन की व्यवस्था कराई जाएगी और बच्चों के इलाज में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद पीड़ित परिवार ने अपना विरोध समाप्त किया और सड़क से हट गए, जिसके बाद यातायात व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य हो सकी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जीवन रक्षक दवा की अनुपलब्धता और समय पर इलाज न मिलना गंभीर चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि हीमोफीलिया जैसे रोगों में नियमित दवा न मिलने पर मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
निष्कर्ष
MP सीहोर का यह मामला न केवल एक परिवार की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रशासन के आश्वासन के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रित हो गई है, लेकिन यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता की ओर स्पष्ट संकेत करती है।
