Iran मुद्दे पर ट्रंप का NATO और इटली पर हमला, मेलोनी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद; नेतन्याहू बोले– ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे
Iran के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इस मुद्दे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। ट्रंप ने जहां NATO सहयोगियों पर सवाल उठाए हैं, वहीं मेलोनी ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया है। दूसरी ओर, नेतन्याहू ने साफ कहा है कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।
ट्रंप का NATO सहयोगियों पर बड़ा हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और NATO सहयोगियों की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका दशकों से NATO और यूरोपीय देशों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता रहा है, लेकिन जब ईरान जैसे गंभीर खतरे का सामना करने की बात आती है, तो कई सहयोगी देश अपेक्षित समर्थन नहीं देते।
ट्रंप ने विशेष रूप से इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का नाम लेते हुए कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा साझेदारी में भारी निवेश करता है, लेकिन कुछ देश ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने से बचते हैं। उन्होंने इसे “निराशाजनक स्थिति” बताया।
मेलोनी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
ट्रंप के बयान के बाद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह “बेबुनियाद” बताया और कहा कि इटली की विदेश नीति किसी व्यक्तिगत संबंध पर आधारित नहीं है।
मेलोनी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का रुख हमेशा राष्ट्रीय हितों और वैश्विक स्थिरता को ध्यान में रखकर तय होता है। उन्होंने कहा कि इटली की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन है, न कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक दबाव में आकर निर्णय लेना।
अमेरिका-ईरान वार्ता और बढ़ता तनाव
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ है। इस वार्ता में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें लेबनान में संघर्षविराम बनाए रखना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना और संभावित परमाणु समझौते की रूपरेखा शामिल है।
हालांकि बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस वार्ता पर नजर बनाए हुए है।
नेतन्याहू का सख्त रुख: ईरान को परमाणु हथियार नहीं
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। यरुशलम में आयोजित जेएनएस इंटरनेशनल पॉलिसी समिट 2026 में उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के परमाणु ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगी। उन्होंने इसे इजरायल की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया और कहा कि इस दिशा में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
लेबनान और हिजबुल्लाह पर भी बयान
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में दक्षिणी लेबनान की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इजरायली सेना की मौजूदगी तब तक जारी रहेगी जब तक इजरायली नागरिकों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाती।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल का संघर्ष लेबनान के साथ नहीं, बल्कि ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन रहा है।
ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों पर टिप्पणी
कार्यक्रम के दौरान नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेता स्वतंत्र रूप से अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं।
उन्होंने कहा, “लोग अक्सर कहते हैं कि मैं ट्रंप की बात मानता हूं या ट्रंप मेरी बात मानते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। हम दोनों अपने-अपने देशों के हितों के अनुसार निर्णय लेते हैं।”
नेतन्याहू ने यह भी स्वीकार किया कि कई मुद्दों पर दोनों देशों की राय समान होती है, लेकिन कुछ मामलों में मतभेद भी होते हैं, जिन्हें आपसी सम्मान के साथ संभाला जाता है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता तनाव
Iran के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। एक ओर अमेरिका और इजरायल सख्त रुख अपना रहे हैं, वहीं यूरोपीय देशों में रणनीतिक असहमति देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
निष्कर्ष
ट्रंप, मेलोनी और नेतन्याहू के बयानों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान का परमाणु मुद्दा केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का केंद्र बन चुका है। जहां अमेरिका और इजरायल सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं, वहीं यूरोपीय देशों में इसे लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
