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खुद की कोई औलाद नहीं, फिर भी 310 बच्चों के ‘पापा’ हैं Bhopal के सरदार खान, 39 साल से लिख रहे इंसानियत की मिसाल

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Published On: 21 June 2026
Bhopal
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Fathers Day Special पर जानिए Bhopal के सरदार खान की प्रेरणादायक कहानी। खुद की कोई संतान नहीं, फिर भी 39 वर्षों में 310 बेसहारा बच्चों को पिता का प्यार, शिक्षा और बेहतर भविष्य दिया।

Fathers Day Special: खुद की कोई औलाद नहीं, फिर भी Bhopal के सरदार खान को 310 बच्चे मानते हैं पिता

भोपाल। Fathers Day Special के अवसर पर हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने बिना पिता बने ही सैकड़ों बच्चों की जिंदगी संवार दी। आज के समय में जहां अधिकांश लोग अपने परिवार तक सीमित रह जाते हैं, वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सरदार खान ने मानवता और सेवा की ऐसी मिसाल कायम की है, जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो जाता है।

सरदार खान की अपनी कोई संतान नहीं है, लेकिन इसके बावजूद 310 से अधिक बच्चे उन्हें अपने पिता के रूप में मानते हैं। बीते 39 वर्षों से वे बेसहारा, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। उन्होंने न केवल इन बच्चों को शिक्षा दिलाई, बल्कि उन्हें हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर जीवन जीने योग्य भी बनाया।

कौन हैं सरदार खान?

Fathers Day Special में चर्चा के केंद्र बने सरदार खान Bhopal के कोहेफिजा क्षेत्र में रहते हैं। वे पिछले चार दशकों से उन बच्चों के लिए काम कर रहे हैं, जिनके सिर पर माता-पिता का साया नहीं है या जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं।उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य ही ऐसे बच्चों को बेहतर भविष्य देना बना लिया। आज सैकड़ों बच्चे उन्हें ‘पापा’ कहकर पुकारते हैं और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं।

39 साल पहले शुरू हुई सेवा यात्रा

सरदार खान ने करीब 39 वर्ष पहले बच्चों की मदद करने की शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्होंने कुछ जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई में सहायता दी, लेकिन धीरे-धीरे यह प्रयास एक मिशन में बदल गया।उन्होंने महसूस किया कि बच्चों को केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और जीवन कौशल की भी जरूरत है। इसी सोच के साथ उन्होंने बच्चों की संपूर्ण परवरिश का जिम्मा उठाना शुरू किया।

अब तक 310 बच्चों को दिया पिता का साया

Fathers Day Special पर सरदार खान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वे अब तक 310 बच्चों को शिक्षा और जीवन की नई दिशा दे चुके हैं।इन बच्चों में कई ऐसे थे जिनके पास रहने का ठिकाना तक नहीं था। सरदार खान ने उन्हें भोजन, शिक्षा, मार्गदर्शन और परिवार जैसा वातावरण दिया।आज इनमें से कई बच्चे अपने पैरों पर खड़े हैं और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

कई बच्चे बने डॉक्टर और इंजीनियर

सरदार खान का सपना केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं था, बल्कि उन्हें समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाना था।उनके मार्गदर्शन में पढ़े कई बच्चे आज डॉक्टर, इंजीनियर और विभिन्न क्षेत्रों में सफल पेशेवर बन चुके हैं।ये बच्चे आज भी सरदार खान को अपने पिता समान सम्मान देते हैं और समय-समय पर उनसे मिलने आते हैं।

आज भी 30 बच्चों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं

उम्र बढ़ने के बावजूद सरदार खान का सेवा कार्य नहीं रुका है।वर्तमान में वे करीब 30 बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। उन्हें शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे रोजगार प्राप्त कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।

कोहेफिजा ट्रेनिंग सेंटर बना उम्मीद की किरण

Bhopal के कोहेफिजा क्षेत्र में संचालित प्रशिक्षण केंद्र में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न व्यावसायिक कौशल भी सिखाए जाते हैं।यहां बच्चों को कंप्यूटर, तकनीकी प्रशिक्षण और अन्य रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ा जाता है।इसी कारण यह केंद्र अनेक बच्चों के लिए नई जिंदगी की शुरुआत साबित हुआ है।

सेवा के लिए मकान तक रखना पड़ा गिरवी

Fathers Day Special में सरदार खान की संघर्ष गाथा भी उतनी ही प्रेरणादायक है।उन्होंने बताया कि बच्चों की शिक्षा और परवरिश के लिए एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें अपना मकान तक गिरवी रखना पड़ा।लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और बच्चों की पढ़ाई को बीच में नहीं रुकने दिया।

बच्चों की जुबानी ‘पापा’ की कहानी

सरदार खान के साथ रहने वाले बच्चों का कहना है कि उन्होंने उन्हें कभी अनाथ महसूस नहीं होने दिया।बच्चों के अनुसार,

“हमारे अपने भले ही हमसे दूर हो गए हों, लेकिन पापा ने हमें हमेशा परिवार का प्यार दिया। उन्होंने हमें पढ़ाया, हुनर सिखाया और आत्मनिर्भर बनाया।”बच्चों के लिए सरदार खान किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।

पिता से मिली सीख ने बदल दी जिंदगी

सरदार खान बताते हैं कि समाजसेवा की प्रेरणा उन्हें उनके पिता जिया हुसैन खान से मिली।उनके पिता हवलदार थे और हमेशा आत्मनिर्भरता पर जोर देते थे।एक घटना का जिक्र करते हुए सरदार खान बताते हैं कि एक बार उन्होंने एक भिखारी को पांच रुपये दे दिए थे। तब उनके पिता ने समझाया कि किसी जरूरतमंद की असली मदद उसे काम और हुनर सिखाकर की जाती है।यही सीख उनके जीवन का मूल मंत्र बन गई।

‘मदद करनी है तो हुनर सिखाइए’

सरदार खान का मानना है कि किसी को आर्थिक सहायता देने से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसे आत्मनिर्भर बनाना।वे कहते हैं,“अगर किसी जरूरतमंद की मदद करनी है तो उसे कोई हुनर सिखा दीजिए। इसके बाद वह खुद अपनी मदद करने योग्य बन जाएगा।”यही सोच उनके पूरे सेवा कार्य की आधारशिला है।

समाज के लिए प्रेरणा बने सरदार खान

आज जब परिवार और सामाजिक रिश्तों में बदलाव देखने को मिल रहा है, ऐसे समय में सरदार खान जैसे लोग समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं।

Fathers Day Special पर उनकी कहानी हमें यह संदेश देती है कि पिता होना केवल जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी का भविष्य संवारना भी पिता होने का सबसे बड़ा स्वरूप है।

Bhopal के सरदार खान ने यह साबित कर दिया है कि इंसानियत, प्रेम और सेवा से भी परिवार बनाए जा सकते हैं। शायद यही कारण है कि आज 310 बच्चे उन्हें गर्व से अपना पिता कहते हैं।

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