Petrol Diesel Price को लेकर बड़ा अपडेट। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं हुआ, इस पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जवाब दिया। जानिए कब मिल सकती है राहत और क्या है तेल कंपनियों की स्थिति।
Petrol Diesel Price: कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं हुआ सस्ता? पेट्रोलियम मंत्री ने बताई बड़ी वजह
नई दिल्ली। Petrol Diesel Price को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। आम जनता लगातार यह सवाल पूछ रही है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो गया है तो पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे हैं।
इस सवाल का जवाब केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अभी भी पहले ऊंची कीमत पर खरीदे गए कच्चे तेल का इस्तेमाल कर रही हैं। जब कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल रिफाइनरियों तक पहुंचेगा, तब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
Petrol Diesel Price पर मंत्री का बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हालिया गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लगेगा।उनके अनुसार, तेल कंपनियों के पास अभी भी पुराने स्टॉक मौजूद हैं, जिन्हें ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था। जब नया और सस्ता कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचेगा, तब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत संभव होगी।
कच्चे तेल की कीमतों में कितना बदलाव आया?
हाल के महीनों में वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
युद्ध से पहले कीमत
- कच्चा तेल लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल था।
तनाव के दौरान कीमत
- मध्य पूर्व में तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी।
वर्तमान स्थिति
- हालिया शांति समझौते के बाद कीमत लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है।
यानी कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 30 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई है, लेकिन इसका असर अभी खुदरा ईंधन कीमतों पर नहीं दिखा है।
Petrol Diesel Price तुरंत कम क्यों नहीं होती?
बहुत से लोगों को लगता है कि कच्चा तेल सस्ता होते ही पेट्रोल और डीजल भी तुरंत सस्ते हो जाने चाहिए, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।
पुराना स्टॉक
तेल कंपनियां पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल का उपयोग करती हैं।
रिफाइनिंग प्रक्रिया
कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल और डीजल बनाने में समय लगता है।
परिवहन लागत
रिफाइनरी से विभिन्न राज्यों तक ईंधन पहुंचाने में अतिरिक्त लागत आती है।
टैक्स का प्रभाव
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केंद्र और राज्य सरकारों के करों का बड़ा हिस्सा शामिल होता है।इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत घटने के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत मिलने में समय लगता है।
भारत में ईंधन की कीमतें कितनी स्थिर हैं?
हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया कि मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रही हैं।उन्होंने कहा कि सरकार ने कई बार केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती की है।
सरकार द्वारा की गई कटौतियां
- नवंबर 2021 में कटौती
- मई 2022 में कटौती
- हालिया एक्साइज ड्यूटी में कमी
इन फैसलों के कारण उपभोक्ताओं पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ कम हुआ।
केवल जापान में कम हुई कीमतें?
मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में भारत उन देशों में शामिल है जहां पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में अपेक्षाकृत कम वृद्धि हुई है।उन्होंने दावा किया कि भारत की तुलना में केवल जापान में पेट्रोलियम कीमतों में कम बढ़ोतरी दर्ज की गई।सरकार के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल वृद्धि लगभग 7.60 रुपये प्रति लीटर तक सीमित रही है।
तेल कंपनियों को हो रहा है भारी नुकसान
हरदीप सिंह पुरी ने यह भी बताया कि तेल विपणन कंपनियां वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं।
नुकसान के प्रमुख कारण
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता
- पुराने महंगे स्टॉक का उपयोग
- कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रयास
- उपभोक्ताओं को राहत देने की सरकारी नीति
सरकार का कहना है कि उसने वैश्विक कीमतों का पूरा बोझ आम जनता पर नहीं डाला है।
क्या जल्द सस्ता होगा Petrol Diesel Price?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं और आगे कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट नहीं आता है, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।हालांकि अंतिम फैसला तेल विपणन कंपनियों की लागत, स्टॉक स्थिति और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।
आम जनता को क्या उम्मीद रखनी चाहिए?
फिलहाल उपभोक्ताओं को तुरंत बड़ी राहत मिलने की संभावना कम दिखाई देती है। लेकिन यदि कम कीमत वाला कच्चा तेल लगातार भारतीय बाजार में पहुंचता है तो पेट्रोल और डीजल के दामों में धीरे-धीरे कमी संभव है।ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ सप्ताह ईंधन बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
