Zero Shadow Day 2026 के अवसर पर उज्जैन में 21 जून को दोपहर 12:58 बजे कुछ क्षणों के लिए परछाई गायब हो जाएगी। जानिए इस दुर्लभ खगोलीय घटना का वैज्ञानिक कारण, कर्क रेखा और दक्षिणायन से इसका संबंध।
Zero Shadow Day 2026: उज्जैन में आज 12:58 बजे गायब होगी परछाई, दिखेगा दुर्लभ खगोलीय नजारा
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में रविवार 21 जून को एक बेहद दुर्लभ और रोमांचक खगोलीय घटना Zero Shadow Day 2026 देखने को मिलेगी। दोपहर लगभग 12 बजकर 58 मिनट पर कुछ क्षणों के लिए व्यक्ति और वस्तुओं की परछाई लगभग गायब हो जाएगी। यह घटना हर साल ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) के दौरान कर्क रेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों में देखी जाती है।
Zero Shadow Day 2026 क्या है?
Zero Shadow Day 2026 एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसमें सूर्य दोपहर के समय पृथ्वी पर किसी स्थान के ठीक ऊपर पहुंच जाता है। इस दौरान वस्तुओं की छाया अत्यंत छोटी हो जाती है या कुछ क्षणों के लिए दिखाई नहीं देती।
जब सूर्य की किरणें लगभग 90 डिग्री के कोण पर सीधे धरती पर पड़ती हैं, तब छाया वस्तु के ठीक नीचे सिमट जाती है और सामान्य रूप से दिखाई नहीं देती।
उज्जैन में क्यों खास है यह घटना?
उज्जैन भारत के उन चुनिंदा शहरों में शामिल है जहां से कर्क रेखा (Tropic of Cancer) गुजरती है। इसी कारण यहां Zero Shadow Day 2026 का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
शहर स्थित जीवाजी वेधशाला में इस अवसर पर विशेष अवलोकन कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जहां शंकु यंत्र की सहायता से लोगों को यह दुर्लभ दृश्य दिखाया जाएगा।
12:58 बजे क्या होगा?
खगोलविदों के अनुसार रविवार दोपहर 12:58 बजे सूर्य की स्थिति ऐसी होगी कि उसकी किरणें लगभग सीधी धरती पर पड़ेंगी। उस समय:
- व्यक्ति की परछाई बहुत छोटी हो जाएगी।
- खंभों और इमारतों की छाया लगभग समाप्त दिखाई देगी।
- कुछ क्षणों के लिए छाया गायब होने जैसी स्थिति बनेगी।
- वैज्ञानिक उपकरणों से इस घटना का स्पष्ट अध्ययन किया जा सकेगा।
परछाई क्यों गायब हो जाती है?
पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ सूर्य की परिक्रमा भी करती है। इसी कारण वर्षभर सूर्य की स्थिति बदलती रहती है।
21 जून को सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे अधिक उत्तर दिशा की ओर पहुंचता है। इस दिन सूर्य कर्क रेखा के लगभग ऊपर होता है।
जब सूर्य किसी स्थान के ठीक ऊपर आ जाता है, तब उसकी किरणें लंबवत पड़ती हैं और छाया वस्तु के नीचे सिमट जाती है। यही स्थिति Zero Shadow Day 2026 कहलाती है।
कर्क रेखा का महत्व
कर्क रेखा पृथ्वी पर 23.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर स्थित एक महत्वपूर्ण काल्पनिक रेखा है।भारत के कई राज्यों से यह रेखा गुजरती है, जिनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है। उज्जैन की भौगोलिक स्थिति इस घटना को देखने के लिए विशेष बनाती है।
कर्क रेखा से जुड़े तथ्य
- यह उत्तरी गोलार्द्ध की प्रमुख अक्षांश रेखा है।
- 21 जून को सूर्य इसके सबसे निकट पहुंचता है।
- इसी कारण वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है।
- Zero Shadow Day जैसी घटनाएं इसी क्षेत्र में दिखाई देती हैं।
दक्षिणायन की शुरुआत
21 जून के बाद सूर्य की आभासी गति दक्षिण दिशा की ओर दिखाई देने लगती है, जिसे दक्षिणायन कहा जाता है।हिंदू धर्म में दक्षिणायन का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय योग, साधना, तप और आत्मचिंतन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
वैज्ञानिक महत्व
खगोल वैज्ञानिकों के लिए Zero Shadow Day 2026 बेहद महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि इससे:
- सूर्य की वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया जाता है।
- पृथ्वी की धुरी के झुकाव को समझने में मदद मिलती है।
- छात्रों और शोधकर्ताओं को खगोल विज्ञान का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है।
- प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान की परंपराओं को समझा जा सकता है।
धार्मिक महत्व
उज्जैन को प्राचीन काल से खगोल विज्ञान और ज्योतिष का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है।महाकाल की नगरी में होने वाली यह घटना धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से समान रूप से महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में लोग इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए वेधशाला पहुंचते हैं।
अब दिन होने लगेंगे छोटे
21 जून को वर्ष का सबसे लंबा दिन माना जाता है। इसके बाद उत्तरी गोलार्द्ध में दिन धीरे-धीरे छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं।23 सितंबर को दिन और रात लगभग बराबर हो जाएंगे, जिसे विषुव (Equinox) कहा जाता है।
निष्कर्ष
Zero Shadow Day 2026 उज्जैन के लिए एक विशेष खगोलीय अवसर है। कर्क रेखा के निकट स्थित होने के कारण यहां दोपहर 12:58 बजे कुछ क्षणों के लिए परछाई लगभग गायब हो जाएगी। विज्ञान और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है, जबकि धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व माना जाता है।
