अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: CCTV फुटेज की सीमा बनी SIT जांच की सबसे बड़ी चुनौती
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को डिजिटल साक्ष्य जुटाने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जांच में सामने आया है कि मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों का बैकअप केवल 45 दिनों तक ही उपलब्ध रहता है, जिसके कारण पुरानी फुटेज हासिल करना संभव नहीं हो पा रहा है।
इस तकनीकी सीमा ने जांच को और जटिल बना दिया है, क्योंकि कथित चोरी की शुरुआत और उसकी अवधि को सटीक रूप से निर्धारित करना अब मुश्किल हो गया है।
45 दिन का CCTV बैकअप बना बड़ी बाधा
जांच अधिकारियों के अनुसार, मंदिर के सीसीटीवी सिस्टम में केवल 45 दिनों तक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है। इसके बाद पुराना डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। इस वजह से कई महीनों या वर्षों पुरानी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त नहीं की जा सकती।
SIT का मानना है कि इस तकनीकी सीमा के कारण मामले की पूरी टाइमलाइन तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
CCTV फुटेज में छेड़छाड़ के संकेत
जांच के दौरान सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में संभावित छेड़छाड़ के संकेत भी सामने आए हैं। इन संकेतों के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब SIT इस पहलू की गहन जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ले रही है।
फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हाल के दिनों में किसी तरह की वीडियो रिकॉर्डिंग में बदलाव या छेड़छाड़ की गई है।
डिजिटल सबूतों की कमी से जांच प्रभावित
डिजिटल साक्ष्यों की कमी के चलते जांच अब काफी हद तक गवाहों के बयान, संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों पर निर्भर हो गई है। इससे जांच की गति धीमी होने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों पर पहले से संदेह है, उनके बयान और पहले दी गई जानकारी का मिलान किया जा रहा है। कई मामलों में बयान विरोधाभासी पाए गए हैं, जिन्हें जांच का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा रहा है।
फॉरेंसिक जांच पर टिकी उम्मीदें
SIT अब तकनीकी विशेषज्ञों और फॉरेंसिक टीम की मदद से अधिक से अधिक डिजिटल साक्ष्य जुटाने का प्रयास कर रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि यदि हालिया फुटेज में किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई है, तो उसके तकनीकी निशान जरूर मिल सकते हैं।
विशेषज्ञ यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या सिस्टम में जानबूझकर डेटा डिलीट या एडिट किया गया था।
जांच गवाहों और बयानों पर अधिक निर्भर
सीमित डिजिटल साक्ष्यों के कारण जांच अब मुख्य रूप से गवाहों और संबंधित लोगों के बयानों पर आधारित होती जा रही है। इससे जांच की जटिलता बढ़ गई है, क्योंकि अलग-अलग बयानों में कई तरह के विरोधाभास सामने आ रहे हैं।
SIT इन सभी बिंदुओं को जोड़कर एक स्पष्ट तस्वीर बनाने की कोशिश कर रही है।
जांच के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक बयानबाजी
इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि SIT को अपना काम स्वतंत्र रूप से करने दिया जाए और बिना ठोस सबूत के किसी भी तरह की बयानबाजी से बचा जाए।
आने वाले दिनों में अहम मोड़
जांच एजेंसियों के अनुसार आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के विस्तृत बयान इस केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि डिजिटल साक्ष्य में कोई ठोस लिंक मिलता है, तो यह मामला निर्णायक मोड़ ले सकता है।
फिलहाल SIT के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित CCTV डेटा और संभावित छेड़छाड़ की पुष्टि करना है।
