—Advertisement—

MP Weather Update: मानसून की सुस्त चाल से बढ़ी चिंता, 45 जिले सामान्य बारिश से पीछे, 38 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

Author Picture
Published On: 20 June 2026
MP
— मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्त चाल से बढ़ी चिंता, 45 जिले सामान्य बारिश से पीछे, 38 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी

—Advertisement—

MP Weather Update: मानसून की सुस्त चाल से बढ़ी चिंता, 45 जिले सामान्य बारिश से पीछे, 38 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

MP में मानसून का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। आमतौर पर जून के मध्य तक प्रदेश में दस्तक देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार अब तक राज्य की सीमा में प्रवेश नहीं कर पाया है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल तेलंगाना के आसपास सक्रिय है और यदि इसकी रफ्तार में तेजी आती है तो यह 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। मानसून की देरी का असर अब प्रदेश की बारिश और खेती दोनों पर साफ दिखाई देने लगा है।

मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के 38 जिलों में आंधी, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। वहीं सीहोर और आगर-मालवा जिलों के लिए तेज हवाओं को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। दूसरी ओर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है।

8 से 10 दिन की देरी से पहुंच सकता है मानसून

MP मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य एंट्री 15 जून तक हो जाती है। इस बार मानसूनी हवाओं की गति धीमी होने और अनुकूल परिस्थितियां विकसित नहीं होने के कारण मानसून आगे नहीं बढ़ पा रहा है। यही वजह है कि इसके आगमन में लगभग 8 से 10 दिन की देरी हो रही है।

हालांकि प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार जारी हैं। कई क्षेत्रों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश देखने को मिल रही है, लेकिन यह बारिश खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही।

38 जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी

मौसम विभाग ने शनिवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, बुरहानपुर, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई है।

इन जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है।

कई जिलों में उमस और गर्मी का असर बरकरार

जहां प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है, वहीं कई जिलों में गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है। रीवा, सतना, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार और खरगोन जिलों में तेज धूप और उमस बनी रहने की संभावना जताई गई है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के प्रवेश से पहले इस तरह की उमस सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है, लेकिन लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर इसका असर जनजीवन और कृषि दोनों पर पड़ सकता है।

जून में अब तक 44 प्रतिशत कम बारिश

मानसून की देरी का सबसे बड़ा असर बारिश के आंकड़ों पर दिखाई दे रहा है। जून माह में अब तक प्रदेश में सामान्य से 44 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। 55 जिलों वाले मध्य प्रदेश में 45 जिले सामान्य वर्षा से पीछे चल रहे हैं।

विशेष रूप से पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है। जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में औसतन 65 प्रतिशत तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में भी सामान्य से लगभग 27 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई है।

किसानों की बढ़ी चिंता, बुवाई पर संकट

बारिश की कमी का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन की अधिकांश फसलें मानसून आधारित हैं। सोयाबीन, मूंग, उड़द, तुअर और अन्य फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त नमी जरूरी होती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सुरक्षित बुवाई के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक है, ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहे। लेकिन प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब तक इतनी बारिश नहीं हुई है।

कई किसानों ने मानसून के समय पर आने की उम्मीद में पहले ही खेतों में बुवाई कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से बीज खराब होने और फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अच्छी बारिश की कामना को लेकर पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी कर रहे हैं।

बारिश से कुछ क्षेत्रों में मिली राहत

शुक्रवार को राजगढ़, रीवा, सतना, दमोह और मैहर सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इससे तापमान में कुछ कमी आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली।

हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में अब भी गर्मी का असर बना हुआ है। खजुराहो और दतिया में अधिकतम तापमान 41 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। वहीं भोपाल में 37.3 डिग्री, इंदौर में 35.1 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री, जबलपुर में 38.8 डिग्री और ग्वालियर में 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

पिछले वर्षों में कब पहुंचा था मानसून?

MP मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य एंट्री 15 जून के आसपास मानी जाती है। वर्ष 2021 में मानसून 9 जून को ही प्रदेश में पहुंच गया था, जबकि 2018 में सबसे अधिक देरी हुई और मानसून 25 जून को प्रवेश कर पाया था।

वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था और पूरे सीजन में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। इस बार भी किसानों और आम लोगों को उम्मीद है कि मानसून जल्द सक्रिय होगा और प्रदेश में अच्छी बारिश का दौर शुरू होगा।

फिलहाल मौसम विभाग की नजर मानसूनी गतिविधियों पर बनी हुई है और अगले कुछ दिनों में परिस्थितियों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp