बोरदिया डेम पूर्ण हुआ। नागदा क्षेत्र की कुडेल नदी पर बने इस डेम से 50 से अधिक गांवों के किसानों को लाभ मिलेगा। 300 हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता विकसित होगी और भूजल स्तर में सुधार होगा। दिलीपसिंह शेखावत ने इसे क्षेत्र के विकास की बड़ी उपलब्धि बताया।
बोरदिया डेम पूर्ण हुआ: 50 गांवों के किसानों के लिए ऐतिहासिक सौगात, बढ़ेगी सिंचाई और भूजल स्तर
नागदा | जीवनलाल जैन
बोरदिया डेम पूर्ण हुआ: किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी
बोरदिया डेम पूर्ण हुआ और इसके साथ ही नागदा क्षेत्र के किसानों का वर्षों पुराना सपना साकार हो गया है। वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी दिलीपसिंह शेखावत ने जानकारी देते हुए बताया कि मलेनी-कुडेल नदी पर श्रृंखलाबद्ध डेम निर्माण की जो परिकल्पना उन्होंने वर्ष 2004 में की थी, वह अब धरातल पर उतर चुकी है।
कुडेल नदी पर निर्मित बोरदिया डेम का निर्माण कार्य पूरी तरह से पूर्ण हो चुका है। यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई, जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
4.25 करोड़ रुपये की लागत से बना डेम
शेखावत ने बताया कि कुडेल नदी पर बने इस डेम की लंबाई लगभग 80 मीटर तथा ऊंचाई 5.3 मीटर है। इस परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति 4 करोड़ 25 लाख रुपये की थी।
डेम में लगभग 1 एमसीएफटी पानी का संग्रहण किया जा सकेगा। इसके माध्यम से लगभग 300 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित होगी। साथ ही 4 से 5 किलोमीटर तक नदी में जलभराव बना रहेगा जिससे आसपास के क्षेत्रों के भूजल स्तर में सुधार होगा।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
बोरदिया डेम पूर्ण हुआ तो इसके लाभ भी सीधे किसानों तक पहुंचेंगे।इस परियोजना से निम्न गांवों के किसानों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है—
- रूनखेड़ा
- बोरदिया
- थडोदा
- दीपाखेड़ी
- खंडवा
- बटलावदी
- नरेडीपाता
- नरेडी हनुमान
- पानवासा
- भांडला
- बेहलोला
- घुडावन
इन गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और खेती की उत्पादकता बढ़ेगी।
20 वर्षों का सपना हुआ साकार
दिलीपसिंह शेखावत ने बताया कि 28 सितंबर 2004 को उन्होंने मलेनी-कुडेल नदी पर श्रृंखलाबद्ध डेम निर्माण का सपना देखा था।उन्होंने कहा कि आज बोरदिया डेम का पूर्ण होना केवल एक निर्माण कार्य की समाप्ति नहीं बल्कि क्षेत्रीय विकास की नई शुरुआत है।उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में लगातार शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष इस मांग को उठाया गया।
कुडेल नदी पर बने 7 डेमों की श्रृंखला
मलेनी-कुडेल नदी पर अब कुल 7 डेमों की श्रृंखला विकसित हो चुकी है।इनमें प्रमुख रूप से—
ऊंचाहेड़ा डेम
रेलवे विभाग द्वारा निर्मित।
लोहचितारा डेम
पूर्व सांसद सत्यनारायण जटिया की सांसद निधि से निर्मित।
नाथूखेड़ी डेम
आलोट विधानसभा क्षेत्र में निर्मित।
गोठड़ा माताजी (नीचे) डेम
361.30 लाख रुपये लागत से निर्मित।
गोठड़ा माताजी (ऊपर) डेम
507.50 लाख रुपये लागत से निर्मित।
ब्राह्मणखेड़ी डेम
168.78 लाख रुपये लागत से निर्मित।
बोरदिया डेम
4.25 करोड़ रुपये लागत से निर्मित नवीन परियोजना।
2017 से 2025 तक चला लंबा संघर्ष
शेखावत ने बताया कि 25 नवंबर 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यालय से इस परियोजना को लेकर नोटशीट जारी की गई थी।इसके बाद 16 मई 2018 को डेम की साध्यता स्वीकृत हुई और डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए।वर्ष 2019 में सरकार बदलने के बाद परियोजना की गति धीमी पड़ गई। हालांकि वर्ष 2020 में पुनः भाजपा सरकार बनने के बाद लगातार प्रयासों से परियोजना को आगे बढ़ाया गया।मार्च 2025 में डेम निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और अब इसका निर्माण पूर्ण हो चुका है।
1500 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़ी
शेखावत ने बताया कि मलेनी-कुडेल नदी पर बने सभी डेमों के संयुक्त प्रभाव से क्षेत्र में लगभग 1500 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़ी है।इससे किसानों को वर्षभर खेती करने की सुविधा मिली है और कई क्षेत्रों में अब तीन फसलें ली जा रही हैं।
50 से अधिक गांवों में सुधरा भूजल स्तर
लगातार जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का प्रभाव अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है।जहां पहले कई गांवों में जलस्तर 1000 फीट से भी नीचे पहुंच गया था, वहीं अब जलस्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि नदी आधारित जल संरक्षण संरचनाएं भूजल पुनर्भरण का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव, तुलसी सिलावट और अनिल फिरोजिया का जताया आभार
शेखावत ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जल संसाधन विभाग और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के सहयोग के बिना यह परियोजना संभव नहीं थी।
क्षेत्रीय विकास का नया अध्याय
बोरदिया डेम पूर्ण हुआ और इसके साथ ही नागदा क्षेत्र में कृषि विकास, जल संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय शुरू हो गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में किसानों की आय बढ़ाने, भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


