America –इज़रायल में लेबनान मुद्दे पर बढ़ा तनाव, ट्रंप प्रशासन ने दी चेतावनी
मध्य पूर्व में हाल ही में हुए ईरान–America शांति समझौते के बाद भी क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब नया विवाद लेबनान को लेकर सामने आया है, जहां इज़रायल की सैन्य कार्रवाई ने अमेरिका और इज़रायल के बीच मतभेद बढ़ा दिए हैं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।
ईरान और अमेरिका के बीच महीनों तक चले तनाव के बाद हाल ही में एक शांति समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता लाना और सैन्य टकराव को कम करना था। हालांकि, लेबनान में इज़रायल की ओर से जारी सैन्य गतिविधियों को लेकर अब ईरान ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। ईरान का कहना है कि इज़रायल की ये कार्रवाई शांति समझौते की भावना के खिलाफ है और इससे पूरे क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ सकता है।
America ने इज़रायल को दी सख्त चेतावनी
इस पूरे मामले में अमेरिका ने भी अब इज़रायल के रुख पर नाराजगी जताई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से जुड़े बयान के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि इज़रायल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई ईरान के साथ हुए शांति समझौते को कमजोर कर सकती है।
ट्रंप का कहना है कि इज़रायल को अपनी सुरक्षा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में किसी भी तरह की ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जिसमें निर्दोष नागरिक प्रभावित हों या आवासीय क्षेत्रों को नुकसान पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि लेबनान में इज़रायल की कुछ कार्रवाइयां चिंता का विषय हैं और इन्हें नियंत्रित किया जाना चाहिए।
America ने इज़रायल को यह भी चेतावनी दी है कि शांति समझौते की शर्तों का सम्मान किया जाए और लेबनान में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई से बचा जाए।
शांति समझौते की शर्तों पर जोर
ईरान–अमेरिका शांति समझौते के तहत यह माना गया था कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए सभी पक्ष संयम बरतेंगे। इस समझौते में लेबनान को लेकर भी कुछ अप्रत्यक्ष शर्तें शामिल बताई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य हिज़बुल्लाह और इज़रायल के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकना है।
America का कहना है कि यदि इस समझौते का पालन नहीं किया गया, तो क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं। इसी कारण अमेरिका ने इज़रायल से अपेक्षा की है कि वह अपने सैन्य अभियानों को सीमित रखे और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।
हिज़बुल्लाह और इज़रायल के बीच तनाव
लेबनान में इज़रायल और हिज़बुल्लाह के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। हाल के दिनों में ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। इज़रायल का दावा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इन हमलों में नागरिकों को भी नुकसान हो रहा है।
अमेरिका का रुख इस मामले में संतुलित बताया जा रहा है, जहां वह एक तरफ इज़रायल के सुरक्षा अधिकार को स्वीकार करता है, वहीं दूसरी ओर नागरिक हानि और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर चिंता भी व्यक्त कर रहा है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति का बयान
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लेबनान का मुद्दा ईरान–अमेरिका शांति समझौते का अहम हिस्सा है और सभी पक्षों को इसका सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने इज़रायल के भीतर मौजूद उन आलोचकों पर भी निशाना साधा, जो इस समझौते से असंतुष्ट हैं। वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इज़रायल का सबसे मजबूत सहयोगी बना रहेगा, लेकिन समझौते की शर्तों का पालन सभी को करना होगा।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इज़रायल के कुछ राजनीतिक नेताओं और उनके सहयोगियों को अमेरिका की नीति के खिलाफ बयानबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे कूटनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है।
ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों में तनाव
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों के बाद दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़रायल की लेबनान में लगातार सैन्य कार्रवाई से ट्रंप प्रशासन असंतुष्ट है। इस मुद्दे को लेकर ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर बातचीत में नाराजगी भी जताई है।
अमेरिका का मानना है कि यदि इस तरह की कार्रवाई जारी रही, तो मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।
आगे की स्थिति
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। एक तरफ ईरान–अमेरिका शांति समझौते को स्थिर रखने की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर लेबनान में इज़रायल की सैन्य कार्रवाई ने नए तनाव को जन्म दे दिया है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी पक्षों ने संयम नहीं बरता, तो यह विवाद बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है। अमेरिका की भूमिका अब मध्यस्थ के रूप में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है, जो दोनों पक्षों को संतुलन में रखने की कोशिश कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
