श्री Dilip Kanthed चातुर्मास 2026 हेतु अध्यक्ष मनोनीत: Nagda में श्री वर्द्धमान स्थानकवासी श्रीसंघ की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न
नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट
नागदा जंक्शन में सम्पन्न हुई समाज की अहम बैठक
Nagda जंक्शन में श्री वर्द्धमान स्थानकवासी श्रीसंघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी चातुर्मास 2026 की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक समाज के धार्मिक, सामाजिक और संगठनात्मक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें आने वाले वर्ष के प्रमुख धार्मिक आयोजन की रूपरेखा और नेतृत्व चयन से जुड़े निर्णय लिए गए।
बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों की सहमति और सर्वसम्मति के आधार पर श्री Dilip Kanthed को चातुर्मास 2026 हेतु अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया। इस निर्णय के साथ ही समाज में उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण देखा गया।
बैठक की अध्यक्षता और संचालन
इस बैठक की अध्यक्षता श्रीसंघ अध्यक्ष श्री प्रकाशचंद सांवेरवाला द्वारा की गई। उन्होंने बैठक की शुरुआत में समाज की एकता, धार्मिक अनुशासन और चातुर्मास जैसे पवित्र आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम और सामाजिक समरसता का भी काल होता है।
बैठक का संचालन श्री अरविंद नाहर द्वारा किया गया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाते हुए विभिन्न प्रस्तावों और सुझावों को बैठक में प्रस्तुत किया। संचालन के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिले और निर्णय पूरी पारदर्शिता के साथ लिए जाएं।
अंत में आभार प्रदर्शन श्री सतीश जैन सांवेरवाला द्वारा किया गया। उन्होंने सभी उपस्थित सदस्यों का धन्यवाद करते हुए कहा कि समाज की एकजुटता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
अध्यक्ष पद के लिए नाम का प्रस्ताव और सर्वसम्मति
बैठक के दौरान चातुर्मास 2026 के अध्यक्ष पद के लिए श्री दिलीप कांठेड़ का नाम प्रस्तावित किया गया। यह प्रस्ताव चंद्रशेखर खिंदावत द्वारा रखा गया। प्रस्ताव प्रस्तुत होने के बाद उपस्थित सभी समाजजनों ने इस पर सहमति जताई और सर्वसम्मति से श्री कांठेड़ के नाम का अनुमोदन किया।
इस निर्णय के समय बैठक स्थल पर सकारात्मक माहौल देखा गया। समाजजनों ने इसे एक योग्य और अनुभवी निर्णय बताते हुए स्वागत किया। सर्वसम्मति से लिया गया यह निर्णय समाज में एकता और सहयोग की भावना को दर्शाता है।
श्री Dilip Kanthed का सामाजिक परिचय
श्री दिलीप कांठेड़ समाज में एक सक्रिय, समर्पित और संगठनात्मक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। वे लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं और विभिन्न आयोजनों में उनकी सहभागिता रही है।
समाज में उनकी छवि एक शांत, व्यवहारिक और समर्पित कार्यकर्ता की रही है। इसी कारण चातुर्मास जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के लिए उनके नाम पर सहमति बनना समाज की अपेक्षाओं और विश्वास को दर्शाता है।
चातुर्मास जैसे आयोजन में अध्यक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसमें न केवल धार्मिक कार्यक्रमों का संचालन होता है, बल्कि पूरे चार महीनों तक चलने वाले अनुशासनात्मक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की योजना भी इसी नेतृत्व में तैयार की जाती है।
चातुर्मास 2026 का महत्व
चातुर्मास जैन समाज का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण काल माना जाता है। यह चार महीनों की अवधि होती है, जिसमें साधु-संत एक स्थान पर रहकर धर्म, तप, ध्यान और प्रवचन के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इस अवधि में अनेक धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन, तपस्या, स्वाध्याय और सामाजिक सुधार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। चातुर्मास का उद्देश्य केवल धार्मिक क्रियाकलाप नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और जीवन में संयम स्थापित करना भी होता है।
इस दृष्टि से चातुर्मास 2026 की तैयारी और उसका नेतृत्व चयन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में उपस्थित समाजजन
इस महत्वपूर्ण बैठक में समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से—
चन्दनमल संघवी, दिलीप ओरा, सतीश जैन सांवेरवाला, निर्मल चपलोद, श्रेणिक बम, रमेश तांतेड़, पारस पोखरना, संदीप चपलोद, रवि संघवी, विनोद राठौर, विजय संघवी, किशोर राठौर सहित अनेक समाजजन शामिल रहे।
इन सभी सदस्यों ने बैठक में सक्रिय भागीदारी निभाई और समाजहित में अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी ने एक स्वर में यह माना कि चातुर्मास जैसे आयोजन में एक अनुभवी और समर्पित नेतृत्व की आवश्यकता होती है।
समाज में निर्णय का स्वागत
श्री दिलीप कांठेड़ के अध्यक्ष मनोनीत होने के बाद समाज के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं ईष्टमित्रों द्वारा उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की गईं। समाज में इस निर्णय को सकारात्मक रूप से देखा गया और इसे एक सर्वसम्मत, संतुलित और दूरदर्शी निर्णय माना गया।
समाज के कई सदस्यों ने यह भी कहा कि उनके नेतृत्व में आगामी चातुर्मास का आयोजन और अधिक संगठित, सुव्यवस्थित और प्रभावी तरीके से सम्पन्न होगा।
संगठनात्मक दृष्टि से निर्णय का महत्व
चातुर्मास जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में नेतृत्व की भूमिका केवल औपचारिक नहीं होती, बल्कि यह पूरे आयोजन की दिशा और गुणवत्ता को निर्धारित करती है। अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी होती है कि सभी धार्मिक कार्यक्रम समय पर, अनुशासन के साथ और समाज की भावनाओं के अनुरूप सम्पन्न हों।
इसके अलावा व्यवस्थापन, अनुशासन, अतिथि सत्कार, प्रवचन कार्यक्रमों की रूपरेखा और अन्य सामाजिक गतिविधियों का समन्वय भी इसी पद के अंतर्गत आता है।
इस दृष्टि से श्री दिलीप कांठेड़ का चयन समाज के संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समाज की एकता और भविष्य की दिशा
इस बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि नागदा क्षेत्र का जैन समाज एकजुट, संगठित और धार्मिक मूल्यों के प्रति समर्पित है। सर्वसम्मति से लिया गया यह निर्णय समाज की लोकतांत्रिक और सहयोगात्मक परंपरा को दर्शाता है।
समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने यह विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में चातुर्मास 2026 का आयोजन धार्मिक आस्था, अनुशासन और भव्यता के साथ सम्पन्न होगा।
निष्कर्ष
श्री वर्द्धमान स्थानकवासी श्रीसंघ की यह बैठक केवल एक औपचारिक निर्णय प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह समाज की एकता, विश्वास और संगठनात्मक शक्ति का प्रतीक भी रही। श्री दिलीप कांठेड़ का अध्यक्ष पद पर मनोनयन इस बात का संकेत है कि समाज अनुभवी और समर्पित नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है।
आगामी चातुर्मास 2026 के सफल आयोजन की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी, और समाज को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। बैठक का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ, जिसमें सभी सदस्यों ने भविष्य के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
