युवा कांग्रेस की ‘Run for OTF’ मैराथन में बड़ा हंगामा, पुरस्कार वितरण पर विवाद से बिगड़ा माहौल,
ग्वालियर में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी के साथ हुआ आयोजन
ग्वालियर में बुधवार को युवा कांग्रेस द्वारा ‘Run for OTF (वन टाइम फीस)’ मैराथन का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, वहीं कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी मैराथन में शामिल होकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
यह मैराथन मेला ग्राउंड से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई हजीरा, किला गेट और सेवानगर होते हुए फूलबाग मैदान पर समाप्त हुई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में वन टाइम फीस व्यवस्था लागू करने की मांग को मजबूत करना और युवाओं की समस्याओं को सार्वजनिक मंच पर उठाना था।
सुबह से ही बड़ी संख्या में युवा विभिन्न क्षेत्रों से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे। पूरे मार्ग पर युवाओं में उत्साह और जोश का माहौल देखने को मिला। कई स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने भी प्रतिभागियों का स्वागत किया।
समापन स्थल पर पुरस्कार वितरण को लेकर शुरू हुआ विवाद
फूलबाग मैदान पर जब मैराथन का समापन समारोह और पुरस्कार वितरण शुरू हुआ, तभी अचानक माहौल बदल गया। कुछ प्रतिभागियों ने मंच के पास आकर पुरस्कार वितरण प्रक्रिया पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उनका आरोप था कि प्रतियोगिता के परिणाम पहले से तय किए गए थे और वास्तविक प्रदर्शन करने वाले कई प्रतिभागियों को नजरअंदाज कर दिया गया।
कई युवाओं ने यह भी आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई और कुछ लोगों को अनुचित तरीके से विजेता घोषित किया गया। इस बात को लेकर वहां मौजूद प्रतिभागियों में नाराजगी बढ़ती चली गई।
कुछ ही देर में असंतोष इतना बढ़ गया कि युवाओं ने मंच के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और “कांग्रेस मुर्दाबाद” के नारे लगाने लगे। नारेबाजी के कारण कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आयोजकों को स्थिति संभालने में मुश्किलें आने लगीं।
नेताओं की मौजूदगी में हुआ अचानक तनाव
जिस समय यह पूरा घटनाक्रम हुआ, उस समय मंच पर यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भान चिब, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, पीसी शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। साथ ही आयोजन समिति के राष्ट्रीय महासचिव मितेंद्र दर्शन सिंह भी मंच पर उपस्थित थे।
अचानक हुई नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन से मंच पर मौजूद नेता कुछ समय के लिए असहज हो गए। कार्यक्रम की गंभीरता को देखते हुए नेताओं और आयोजकों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और युवाओं को शांत करने का प्रयास शुरू किया।
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आयोजकों ने प्रतिभागियों से संवाद किया और उन्हें समझाने का प्रयास किया कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाएगा। कुछ समय की बातचीत के बाद धीरे-धीरे माहौल शांत हुआ, लेकिन कार्यक्रम का उत्साह प्रभावित हो चुका था।
जीतू पटवारी का सरकार पर तीखा हमला
कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से देश और राज्य में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में लगभग 90 बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं और करीब 50 बार परीक्षाएं निरस्त की गई हैं। उनके अनुसार यह स्थिति युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
पटवारी ने आरोप लगाया कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में एक संगठित “सिंडिकेट” काम कर रहा है, जो युवाओं के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं के कारण मेहनती छात्रों का भरोसा व्यवस्था से उठता जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि युवा वर्ग लगातार आर्थिक और मानसिक दबाव में जी रहा है और उन्हें न्यायपूर्ण अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
युवाओं पर बढ़ते आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाया गया
यूथ कांग्रेस नेताओं ने अपने संबोधन में यह भी मुद्दा उठाया कि वर्तमान समय में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग-अलग आवेदन शुल्क देना पड़ता है, जो 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक होता है।
नेताओं ने कहा कि यह व्यवस्था गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है। कई बार एक ही उम्मीदवार को अलग-अलग परीक्षाओं के लिए बार-बार फीस भरनी पड़ती है, जिससे आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भान चिब ने कहा कि “रन फॉर ओटीएफ” मैराथन का उद्देश्य इसी व्यवस्था के खिलाफ जनजागरण करना था, ताकि एक समान और एकमुश्त शुल्क प्रणाली लागू की जा सके।
कार्यक्रम में नारेबाजी से बिगड़ा माहौल
हालांकि आयोजन का उद्देश्य युवाओं के मुद्दों को सामने लाना था, लेकिन समापन के समय हुआ विवाद पूरे कार्यक्रम पर भारी पड़ गया। पुरस्कार वितरण को लेकर उठे सवालों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
कुछ प्रतिभागियों द्वारा लगाए गए “कांग्रेस मुर्दाबाद” के नारों ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया। इसके बाद आयोजकों और नेताओं को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी।
आयोजकों ने किया स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास
हंगामे के दौरान आयोजकों और मंच पर मौजूद नेताओं ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने नाराज युवाओं से बातचीत कर उन्हें शांत करने की कोशिश की और समझाया कि उनकी सभी शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। नेताओं ने आश्वासन दिया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आयोजकों की लगातार समझाइश और संवाद के बाद धीरे-धीरे माहौल शांत होने लगा। कुछ समय बाद स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो गई और कार्यक्रम को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों और संगठनात्मक स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विभिन्न पक्षों द्वारा इस मामले को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी जा रही है, जिससे यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बन गया है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी घटना
इस घटना के बाद ग्वालियर के राजनीतिक गलियारों में इस मैराथन और हुए हंगामे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर आयोजन को युवाओं के मुद्दों को उठाने का प्रयास बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुरस्कार वितरण में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता कितनी आवश्यक है, ताकि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य प्रभावित न हो और उनका संदेश सही रूप में समाज तक पहुंच सके।
