Nigri से सोजनी धाम तक जर्जर सड़क बनी लोगों की परेशानी का कारण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
सड़क की बदहाल स्थिति से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में बढ़ रही नाराजगी
संवादाता : वैभव जैन मस्ताना ,सिलवानी
सिलवानी तहसील के ग्राम Nigri से लेकर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री सोजनी धाम तक जाने वाली सड़क की हालत इन दिनों बेहद खराब हो चुकी है। वर्षों पहले बने इस डामरीकरण मार्ग की स्थिति इतनी जर्जर हो गई है कि अब यहां वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी लोगों के लिए चुनौती बन गया है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी हुई डामर की परत और बिखरी हुई गिट्टियां दुर्घटनाओं को लगातार आमंत्रित कर रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस मार्ग का महत्व केवल ग्रामीण आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्र श्री सोजनी धाम तक पहुंचने का मुख्य रास्ता भी है। हर मंगलवार और शनिवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
सैकड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है सोजनी धाम
श्री सोजनी धाम क्षेत्र का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी के दर्शन करने आते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। लोग निजी वाहनों, दोपहिया साधनों और पैदल यात्रा कर मंदिर तक पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस धाम में न केवल सिलवानी क्षेत्र बल्कि आसपास के कई गांवों और अन्य जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बन चुके इस मंदिर तक जाने वाला मुख्य मार्ग यदि सुरक्षित और सुगम न हो तो इससे श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस सड़क का उच्च गुणवत्ता के साथ पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए, ताकि आने वाले लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
सड़क पर बिखरी गिट्टियां बढ़ा रही हादसों का खतरा
निगरी से सोजनी धाम तक पहुंचने वाले मार्ग की सबसे बड़ी समस्या सड़क पर फैली गिट्टियां हैं। सड़क का डामर कई स्थानों से पूरी तरह उखड़ चुका है और केवल पत्थर एवं गिट्टी ही दिखाई देती है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों को संतुलन बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाता है।
क्षेत्रवासियों के अनुसार कई बार बाइक सवार फिसलकर गिर चुके हैं। बारिश के मौसम में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है क्योंकि गीली गिट्टी पर वाहन आसानी से फिसल जाते हैं। सड़क पर चलने वाले स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़े हादसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।

ग्रामीणों का आरोप – गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्यों का परिणाम है वर्तमान स्थिति
क्षेत्र के कई ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि जिन निजी कंपनियों और ठेकेदारों को निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी दी गई, उन्होंने मानकों के अनुरूप कार्य नहीं किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क बनने के कुछ ही समय बाद इसकी परतें उखड़ने लगी थीं। यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के अनुरूप किया गया होता तो सड़क इतनी जल्दी खराब नहीं होती। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण सरकारी धन का अपेक्षित लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों की जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बारिश में और बढ़ जाती हैं समस्याएं
बरसात के मौसम में इस मार्ग की स्थिति और भी अधिक खराब हो जाती है। सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को गड्ढों का अनुमान नहीं लग पाता। परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह टूट चुकी है, जिससे पानी का निकास भी प्रभावित होता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क की बची हुई परत भी तेजी से खराब हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में सड़क पूरी तरह उपयोगहीन हो सकती है।
नदी पर बना पुल और मार्ग बना चिंता का विषय
निगरी और सोजनी धाम के बीच एक नदी भी पड़ती है, जहां निर्मित पुल और संपर्क मार्ग को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के समय तकनीकी खामियों को नजरअंदाज किया गया, जिसके कारण बारिश के दौरान थोड़ी सी जलधारा बढ़ने पर ही मार्ग प्रभावित हो जाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बरसात के दिनों में कई बार पानी सड़क के ऊपर से बहने लगता है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। इससे न केवल ग्रामीणों को परेशानी होती है बल्कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भी वापस लौटना पड़ता है।
लोगों का मानना है कि यदि पुल और सड़क का निर्माण बेहतर इंजीनियरिंग मानकों के आधार पर किया गया होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
किसानों और ग्रामीणों को हो रही आर्थिक क्षति
यह सड़क क्षेत्र के किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने के लिए किसान इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। सड़क खराब होने के कारण ट्रैक्टर, मालवाहक वाहन और अन्य परिवहन साधनों की गति धीमी हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क के कारण वाहनों की मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। वहीं समय की बर्बादी भी होती है। कई बार खराब मार्ग के कारण कृषि उत्पाद समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाते, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
स्थानीय व्यापारियों का भी कहना है कि सड़क की खराब स्थिति का सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। बेहतर सड़क व्यवस्था से क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग की है कि निगरी से सोजनी धाम तक की सड़क का सर्वे कराकर जल्द से जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत केवल औपचारिकता न होकर स्थायी समाधान के रूप में की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही भविष्य में होने वाले विकास कार्यों की नियमित निगरानी भी की जाए ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण है यह मार्ग
सोजनी धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय धार्मिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण स्थल है। यदि सड़क की स्थिति बेहतर हो तो यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।
बेहतर सड़क, सुरक्षित पुल और सुगम आवागमन की व्यवस्था से स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी लाभ मिलेगा। ग्रामीणों का मानना है कि सरकार को इस मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करना चाहिए ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
जनता को इंतजार स्थायी समाधान का
निगरी से सोजनी धाम तक की सड़क की बदहाल स्थिति लंबे समय से लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई है। लगातार बढ़ती शिकायतों और दुर्घटनाओं की आशंका के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। क्षेत्रवासी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग जल्द ही इस समस्या का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
लोगों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि विकास की आधारशिला होती है। यदि सड़कें सुरक्षित और बेहतर होंगी तो शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, कृषि और धार्मिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। अब क्षेत्र की जनता को इंतजार है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग कब पूरी होगी और निगरी से सोजनी धाम तक का यह महत्वपूर्ण मार्ग फिर से सुरक्षित एवं सुगम बन सकेगा।
