MP Sarkari Schools Teacher Shortage: मध्य प्रदेश में नई भर्ती पर रोक,
MP Sarkari Schools Teacher Shortage: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए शिक्षा विभाग का नया रुख बड़ा झटका माना जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल प्रदेश में नई शिक्षक भर्ती की कोई योजना नहीं है। इसके बजाय विभाग मौजूदा शिक्षकों के समायोजन और तबादलों के जरिए स्कूलों में स्टाफ की कमी को पूरा करने की तैयारी कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 1895 शिक्षक विहीन सरकारी स्कूलों में जल्द ही सरप्लस (अतिरिक्त) शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इसके लिए विभाग राज्य के भीतर तबादला नीति और पदस्थापना व्यवस्था का उपयोग करेगा। यानी जिन स्कूलों में शिक्षक अधिक हैं, वहां से शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेजा जाएगा।
भर्ती की उम्मीदों पर फिलहाल विराम
इस फैसले के बाद शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में निराशा देखी जा रही है। लंबे समय से उम्मीदवार नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और खाली पदों को भरने की मांग कर रहे थे, लेकिन विभागीय स्तर पर फिलहाल किसी नई भर्ती का प्रस्ताव नहीं है।
शिक्षा विभाग का कहना है कि मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग और संतुलित वितरण के जरिए स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सकता है। इसी कारण प्राथमिकता फिलहाल ट्रांसफर और रि-डिप्लॉयमेंट (पुनः पदस्थापना) को दी जा रही है।
सरप्लस टीचर्स से होगी कमी पूरी
विभागीय योजना के अनुसार, जिन स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक तैनात हैं, वहां से अतिरिक्त शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहां शिक्षकों की भारी कमी है। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि इससे बिना नई भर्ती के भी शिक्षा व्यवस्था को संतुलित किया जा सकता है। हालांकि, इस कदम को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
1895 शिक्षक विहीन स्कूलों की स्थिति
राज्य में ऐसे करीब 1895 सरकारी स्कूल चिन्हित किए गए हैं जहां या तो शिक्षक बिल्कुल नहीं हैं या फिर बेहद कम संख्या में उपलब्ध हैं। इन स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है, खासकर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर।
विभाग का दावा है कि इन स्कूलों में जल्द ही सरप्लस शिक्षकों की तैनाती की जाएगी ताकि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो। इसके लिए जिला स्तर पर समीक्षा और सूची तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है।
कैंडिडेट्स की 28 हजार पदों की मांग
दूसरी ओर, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास वर्ग-2 और वर्ग-3 के हजारों अभ्यर्थी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कम से कम 28 हजार नए पदों का सृजन किया जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि लगातार खाली पदों के बावजूद नई भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है, जिससे उनकी उम्र और अवसर दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदर्शनकारी कैंडिडेट्स का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में शिक्षा व्यवस्था सुधारना चाहती है, तो केवल सरप्लस व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि नई भर्ती अनिवार्य है।
सरकार का रुख: संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर
शिक्षा विभाग का मानना है कि मौजूदा स्टाफ के पुनर्वितरण से भी कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कई स्कूलों में शिक्षक अपेक्षाकृत अधिक संख्या में हैं, जबकि कुछ स्कूल पूरी तरह खाली हैं।
ऐसे में ट्रांसफर और पदस्थापना नीति के जरिए संतुलन बनाया जा सकता है। सरकार का फोकस फिलहाल इसी मॉडल पर है।
विशेषज्ञों की राय और चुनौतियां
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरप्लस शिक्षकों के आधार पर पूरी व्यवस्था को संतुलित करना लंबे समय तक प्रभावी समाधान नहीं हो सकता। उनका कहना है कि यदि नियमित भर्ती नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में स्कूलों में शिक्षक संकट और गहरा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण है, जहां कई स्कूल एकल शिक्षक या बिना शिक्षक के ही संचालित हो रहे हैं।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर सरकार ने फिलहाल नई भर्ती से दूरी बनाते हुए सरप्लस शिक्षकों के पुनः समायोजन का रास्ता चुना है। 1895 शिक्षक विहीन स्कूलों में स्टाफ भेजने की योजना से तात्कालिक राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन अभ्यर्थियों की 28 हजार पदों की मांग अभी भी अधर में बनी हुई है।
इस फैसले ने जहां एक ओर मौजूदा व्यवस्था को सुधारने की कोशिश दिखाई है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे हजारों युवाओं के लिए असंतोष भी बढ़ा दिया है। आने वाले समय में सरकार का अगला कदम इस मुद्दे की दिशा तय करेगा।
