MP सिवनी में रिश्वत कांड: अपर कलेक्टर कार्यालय के रीडर माधव प्रसाद तिवारी निलंबित, लोकायुक्त ने 20 हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा
MP के सिवनी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। अपर कलेक्टर कार्यालय, लखनादौन में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 एवं रीडर माधव प्रसाद तिवारी को लोकायुक्त जबलपुर की टीम द्वारा 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया है। जिला कलेक्टर नेहा मीना ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी किए। निलंबन अवधि के दौरान आरोपी कर्मचारी का मुख्यालय कुरई निर्धारित किया गया है।
यह पूरा मामला राजस्व से जुड़े एक विवादित प्रकरण से संबंधित बताया जा रहा है, जिसमें एक पक्ष से अपील पर अनुकूल निर्णय दिलाने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच और ट्रैप कार्रवाई के बाद यह पूरा भ्रष्टाचार उजागर हुआ।
राजस्व प्रकरण से जुड़ा विवाद
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजुतला पटले के अनुसार यह मामला छपारा तहसील के गंगाढाना गांव निवासी संतोष सिंह सिसोदिया की पैतृक भूमि से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार उनकी जमीन के खसरा रिकॉर्ड में जामुन सहित कुछ पेड़ों का उल्लेख दर्ज था। आरोप है कि कुछ अज्ञात लोगों द्वारा उन पेड़ों को काट दिया गया था, जिसके बाद इस मामले को लेकर शिकायत संबंधित थाने में दर्ज कराई गई थी।
बाद में इस विवाद में विरोधी पक्ष द्वारा भी आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके चलते मामला लखनादौन एसडीएम कार्यालय में पहुंचा। यहां सुनवाई के बाद प्रारंभिक रूप से निर्णय आवेदक के खिलाफ दिया गया था। इस फैसले से असंतुष्ट होकर संतोष सिंह सिसोदिया ने अपर कलेक्टर कार्यालय, लखनादौन में अपील दायर की थी।
रिश्वत की मांग का आरोप
आरोप है कि अपील प्रकरण में आवेदक के पक्ष में निर्णय दिलाने के लिए रीडर माधव प्रसाद तिवारी द्वारा पहले 30 हजार रुपये की मांग की गई थी। बाद में बातचीत के दौरान यह रकम घटाकर 20 हजार रुपये तय कर दी गई। इस दौरान पीड़ित पक्ष पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि वह तय की गई राशि का भुगतान करे, ताकि उसके पक्ष में आदेश पारित कराया जा सके।
रिश्वत की इस मांग से परेशान होकर आवेदक ने इस पूरे मामले की शिकायत जबलपुर स्थित लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले की सत्यापन प्रक्रिया शुरू की और आरोपों को सही पाया।
लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई
शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त ने आरोपी को पकड़ने के लिए एक योजनाबद्ध ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया। इसके तहत लोकायुक्त टीम ने सिवनी जिले के अपर कलेक्टर कार्यालय में जाल बिछाया। जैसे ही तय योजना के अनुसार आवेदक ने रीडर माधव प्रसाद तिवारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत सौंपी, उसी समय पहले से तैनात लोकायुक्त दल ने मौके पर कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
इस कार्रवाई से कार्यालय में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक स्तर पर तुरंत सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत की रकम भी जब्त कर ली और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और निलंबन
MP लोकायुक्त द्वारा गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन ने भी तेजी से कार्रवाई की। कलेक्टर नेहा मीना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कुरई रहेगा और वे संबंधित नियमों के तहत निलंबित कर्मचारी की तरह कार्य करेंगे।
प्रशासन का यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या रिश्वतखोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
लोकायुक्त पुलिस ने इस पूरे मामले में आरोपी रीडर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत रिश्वत लेना और पद का दुरुपयोग करना गंभीर अपराध माना जाता है, जिसमें कठोर दंड का प्रावधान है।
फिलहाल मामले की आगे की वैधानिक जांच जारी है और लोकायुक्त टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस प्रकरण में अन्य कोई अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल थे या नहीं।
लोकायुक्त टीम की भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में लोकायुक्त जबलपुर की विशेष टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम में निरीक्षक उमा कुशवाह, निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई कर भ्रष्टाचार के इस मामले का पर्दाफाश किया।
निष्कर्ष
MP सिवनी जिले में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करती है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की आगे जांच जारी है और आने वाले दिनों में इसमें और भी तथ्य सामने आने की संभावना है।
