MP News: अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री पर कलेक्टर के अधिकार को लेकर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण,
अवैध कॉलोनी मामलों में रजिस्ट्री रोकने पर स्पष्ट निर्देश
MP सरकार ने अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में जमीन की रजिस्ट्री को रोकने के अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार के अनुसार, जिला कलेक्टरों को अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार तो है, लेकिन वे अकेले अपने स्तर पर किसी भी जमीन की रजिस्ट्री पर रोक या प्रतिबंध लगाने का निर्णय नहीं ले सकते।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध केवल तभी वैध माना जाएगा जब उसके लिए सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक अथवा अर्द्ध-न्यायिक आदेश मौजूद हो।
बिना न्यायिक आदेश के रोक अवैध मानी जाएगी
वित्त विभाग ने अपने विस्तृत स्पष्टीकरण में कहा है कि किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री पर बिना उचित कानूनी आधार, सक्षम अधिकारी की अनुमति या न्यायिक आदेश के रोक लगाना वैध नहीं है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी स्थिति में लगाए गए प्रतिबंध को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह पंजीयन कानूनों के दायरे से बाहर होगा।
इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर लिए जा रहे मनमाने निर्णयों को रोकना और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
कलेक्टरों की भूमिका सीमित
वाणिज्यिक कर विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि रजिस्ट्री दस्तावेज केवल पक्षकारों के बीच हुए लेन-देन का प्रमाण होते हैं, न कि किसी संपत्ति के स्वामित्व का अंतिम प्रमाण।
सरकार के अनुसार, रजिस्ट्री केवल एक सार्वजनिक रिकॉर्ड होती है, जो यह दर्शाती है कि किसी संपत्ति के संबंध में किन पक्षों के बीच समझौता हुआ है। इससे स्वामित्व का अधिकार स्वतः सिद्ध नहीं होता।
इसी आधार पर कलेक्टरों को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में केवल अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध कार्रवाई करें, न कि सीधे रजिस्ट्री प्रक्रिया को बाधित करें।
संभागायुक्तों और कलेक्टरों को भेजा गया पत्र
राज्य के वित्त विभाग ने सभी संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर अवैध कॉलोनाइजेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। इस जानकारी के आधार पर राज्य स्तर पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने या दस्तावेजों की रजिस्ट्री के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की आवश्यकता जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी सभी प्रक्रियाएं केवल कानूनी प्रावधानों के भीतर ही लागू की जा सकती हैं और किसी भी स्तर पर मनमानी रोक स्वीकार्य नहीं होगी।
पंजीयन प्रक्रिया में पहचान और सहमति अनिवार्य
प्रमुख सचिव ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन से संबंधित प्रक्रिया पर भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पंजीकरण अधिनियम, 1908 के तहत पंजीयन अधिकारी का दायित्व है कि वह दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति की पहचान और उसकी सहमति की पूरी तरह पुष्टि करे।
इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि दस्तावेज स्वेच्छा से पंजीकृत कराया जा रहा है और किसी भी प्रकार का दबाव या भ्रम इसमें शामिल नहीं है।
MP पंजीयन नियम 1939 के तहत स्पष्ट व्यवस्था
मध्यप्रदेश पंजीयन नियम, 1939 में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों और शर्तों की एक निर्धारित सूची होती है। केवल उन्हीं परिस्थितियों में रजिस्ट्री से इनकार किया जा सकता है, जो नियमों में स्पष्ट रूप से वर्णित हैं।
प्रमुख सचिव ने कहा कि इन नियमों के बाहर किसी अन्य आधार पर दस्तावेजों का पंजीयन रोकना कानूनी रूप से सही नहीं होगा। सभी अधिकारियों को केवल निर्धारित कानून और प्रक्रिया के अनुसार ही निर्णय लेने होंगे।
अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई जारी रहेगी
हालांकि रजिस्ट्री रोकने के अधिकार को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है, लेकिन सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मामलों की पहचान कर आवश्यक कानूनी कदम उठाएं।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित और अवैध कॉलोनाइजेशन पर रोक लगाई जा सके, लेकिन यह कार्य पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा।
निष्कर्ष
राज्य सरकार के इस नए स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि जिला कलेक्टरों की भूमिका अवैध कॉलोनियों के मामलों में सीमित है और वे सीधे तौर पर रजिस्ट्री प्रक्रिया को रोक नहीं सकते। सभी निर्णय केवल सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक आदेश के आधार पर ही मान्य होंगे।
इस कदम को राज्य में संपत्ति पंजीयन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, कानूनी रूप से मजबूत और संतुलित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
