Gwalior काली कमाई का नया ठिकाना बना सोना, साइबर ठगों और अपराधियों की पहली पसंद बना ‘गोल्ड इन्वेस्टमेंट’
Gwalior सोने की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं और आम लोगों के लिए इसकी खरीदारी दिन-ब-दिन मुश्किल होती जा रही है। लेकिन दूसरी ओर यही सोना अब अपराधियों, साइबर ठगों और संगठित अपराध गिरोहों की पहली पसंद बनता जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आए कई मामलों ने यह संकेत दिया है कि अपराध की दुनिया में अब काली कमाई को छिपाने और सुरक्षित रखने के लिए सोने का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन पर बढ़ती निगरानी के कारण अपराधियों ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब वे ठगी, चोरी और अन्य अवैध गतिविधियों से हासिल रकम को सीधे सोने में निवेश कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी संपत्ति सुरक्षित रहती है बल्कि जांच एजेंसियों के लिए उसे ट्रैक करना भी मुश्किल हो जाता है।
साइबर ठगी का पैसा सीधे पहुंच रहा सराफा बाजार
हाल के वर्षों में साइबर अपराधों में तेजी आई है। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं, ऑनलाइन फ्रॉड और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी सामने आ रही है। पुलिस जांच में पता चला है कि साइबर ठग अब अपने खातों में बड़ी रकम रखने से बच रहे हैं।
ठगी की राशि पहले विभिन्न म्यूल खातों में ट्रांसफर की जाती है और उसके बाद तुरंत सराफा बाजार पहुंचकर सोना खरीद लिया जाता है। इससे रकम का डिजिटल रिकॉर्ड सीमित हो जाता है और जांच एजेंसियों को धन के अंतिम उपयोग तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
Gwalior में सामने आए दो प्रमुख मामलों ने इस प्रवृत्ति को उजागर किया है। देश की चर्चित डिजिटल अरेस्ट ठगी में एक शिक्षिका से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा सोना खरीदने में इस्तेमाल किया गया। इसी तरह एक अन्य मामले में साइबर ठगी से प्राप्त लाखों रुपये से सोने के सिक्के खरीदे गए।
निवेश का सबसे सुरक्षित माध्यम मान रहे अपराधी
अपराध जगत में सोने को अब सबसे सुरक्षित निवेश माना जा रहा है। नकदी रखने पर जब्ती का खतरा रहता है और बैंक खातों को जांच एजेंसियां आसानी से फ्रीज कर सकती हैं। वहीं सोने को छोटी जगह में सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर कहीं भी बेचा या गिरवी रखा जा सकता है।
यही कारण है कि अपराधी बड़ी मात्रा में सोना खरीदकर अपनी अवैध कमाई को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है।
चोरी और लूट के गहनों पर लिया जा रहा गोल्ड लोन
केवल साइबर ठग ही नहीं बल्कि चोरी, लूट और झपटमारी करने वाले गिरोह भी अब नई रणनीति अपना रहे हैं। पहले अपराधी चोरी किए गए गहनों को सुनारों या दलालों के माध्यम से बेच देते थे, लेकिन इसमें कम कीमत मिलने और पुलिस तक सूचना पहुंचने का खतरा बना रहता था।
अब अपराधी चोरी के गहनों को सीधे बैंक या फाइनेंस कंपनियों में गिरवी रखकर गोल्ड लोन ले रहे हैं। इससे उन्हें बाजार मूल्य के करीब रकम मिल जाती है और संदेह भी कम होता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में बदमाशों ने चोरी के गहनों के बदले गोल्ड लोन लेकर नकद राशि हासिल की है। इससे अपराध की जांच और जटिल हो जाती है क्योंकि गहने खुले बाजार में नहीं बेचे जाते बल्कि वित्तीय संस्थानों के पास पहुंच जाते हैं।
जांच एजेंसियों के लिए बढ़ी चुनौती
अपराधियों द्वारा सोने के बढ़ते उपयोग ने पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन सोने की खरीद-बिक्री और उसके हस्तांतरण का पता लगाना अधिक कठिन होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की खरीद के लिए पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज जरूरी होते हैं, लेकिन कई मामलों में बिचौलियों और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।
सराफा कारोबारियों की भी बढ़ी जिम्मेदारी
इस बढ़ती प्रवृत्ति के बीच सराफा कारोबारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस और प्रशासन लगातार ज्वेलर्स को संदिग्ध लेन-देन की सूचना देने के निर्देश दे रहे हैं। बड़ी नकद खरीदारी और संदिग्ध ग्राहकों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की खरीद-बिक्री पर निगरानी मजबूत नहीं की गई तो अपराधी इसे काली कमाई को सफेद बनाने के सबसे प्रभावी माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते रहेंगे।
बदल रहा अपराध का स्वरूप
Gwalior सहित देश के कई शहरों में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल अपराधों से लेकर पारंपरिक चोरी और लूट तक, हर तरह के अपराध में अब सोना एक महत्वपूर्ण कड़ी बनता जा रहा है।
पुलिस का मानना है कि आने वाले समय में साइबर अपराध और आर्थिक अपराधों की जांच में सोने से जुड़े लेन-देन पर विशेष निगरानी रखनी होगी। तभी अपराधियों के इस ‘गोल्डन गेम’ पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
