E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल विरोध को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने केंद्र सरकार से देशभर के पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराने और उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का अधिकार देने की मांग की है।
E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल विरोध: शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराने एवं उपभोक्ताओं को विकल्प का अधिकार देने की मांग
E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल विरोध: देशभर में शुरू हुआ जनजागरण अभियान
नागदा/उज्जैन।
E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल विरोध को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने देशभर के वाहन उपभोक्ताओं, विशेषकर गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंताओं को सामने लाते हुए केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण मांगें की हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव के नेतृत्व में इस विषय पर जनजागरण अभियान शुरू किया गया है तथा संबंधित मंत्रालयों को ज्ञापन भेजने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।ट्रस्ट का कहना है कि वर्तमान में लागू की जा रही E20 एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति का प्रभाव लाखों वाहन मालिकों पर पड़ रहा है, खासकर उन लोगों पर जिनके पास पुराने वाहन हैं।
ट्रस्ट ने क्यों उठाई आवाज?
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के अनुसार कई वाहन उपभोक्ताओं द्वारा इंजन प्रदर्शन में कमी, माइलेज घटने, ईंधन प्रणाली में तकनीकी समस्याएं और रखरखाव खर्च बढ़ने जैसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।संगठन का मानना है कि इन समस्याओं का सीधा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराना चाहिए।
वाहन उपभोक्ताओं की प्रमुख समस्याएं
इंजन प्रदर्शन पर असर
कई वाहन मालिकों का दावा है कि E20 ईंधन के उपयोग से वाहन की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
माइलेज में कमी
उपभोक्ताओं के अनुसार वाहन का औसत (Mileage) कम हो रहा है, जिससे ईंधन खर्च बढ़ रहा है।
रखरखाव लागत में वृद्धि
ईंधन प्रणाली में तकनीकी बदलाव और अतिरिक्त देखभाल के कारण वाहन मालिकों का खर्च बढ़ रहा है।
पुराने वाहनों पर प्रभाव
पुराने वाहन E20 ईंधन के लिए पूर्ण रूप से अनुकूल नहीं हैं, जिससे तकनीकी परेशानियां सामने आने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
ट्रस्ट की प्रमुख मांगें
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए
देश के सभी पेट्रोल पंपों पर 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल (Pure Petrol) उपलब्ध कराया जाए।
E20 ईंधन अनिवार्य न किया जाए
E20 एथेनॉल मिश्रित ईंधन को उपभोक्ताओं पर अनिवार्य रूप से न थोपा जाए।
उपभोक्ताओं को विकल्प मिले
नागरिकों को उनकी आवश्यकता और वाहन की तकनीकी क्षमता के अनुसार ईंधन चुनने का अधिकार दिया जाए।
स्वतंत्र तकनीकी अध्ययन सार्वजनिक हो
पुराने वाहनों पर E20 ईंधन के प्रभाव का स्वतंत्र तकनीकी अध्ययन सार्वजनिक किया जाए।
स्पष्ट नीति जारी हो
सरकार वाहन मालिकों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर स्पष्ट नीति जारी करे।
केंद्रीय मंत्रियों को भेजा गया ज्ञापन
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari तथा केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री के नाम ज्ञापन भेजा गया है।ज्ञापन में आम जनता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए शुद्ध पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उपभोक्ताओं को ईंधन चयन का अधिकार देने की मांग की गई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव का बयान
ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव ने कहा—
“देश का मध्यम वर्ग पहले से ही बढ़ती महंगाई, वाहन ऋण की किस्तों और रखरखाव खर्चों से जूझ रहा है। यदि किसी नई नीति का सीधा प्रभाव आम नागरिक की जेब पर पड़ रहा है, तो सरकार का दायित्व है कि वह उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराए।”
उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी तकनीकी विकास या वैकल्पिक ईंधन के विरोध में नहीं है, लेकिन किसी भी नीति को जनता पर अनिवार्य रूप से लागू करना उचित नहीं माना जा सकता।
पदाधिकारियों का संयुक्त संदेश
ट्रस्ट के पदाधिकारियों शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, रामवेश सिंह राजावत, युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता एवं जीवनलाल जैन (चाय वाले) ने संयुक्त संदेश जारी करते हुए कहा कि संगठन हमेशा आम नागरिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए कार्य करता रहेगा।उन्होंने वाहन उपभोक्ताओं से अपील की कि वे अपने अनुभव और सुझाव संगठन तक पहुंचाएं ताकि इस विषय पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा सके।
आगे की रणनीति
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान किसी व्यक्ति या संस्था विशेष के विरोध में नहीं बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों और हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।संगठन आने वाले समय में देशभर से वाहन उपभोक्ताओं की राय एकत्र कर सरकार तक उनकी आवाज पहुंचाने का कार्य करेगा।
