MP School Teacher Transfer Rule: स्वैच्छिक तबादले पर शिक्षकों की सीनियरिटी होगी शून्य,
MP School Teacher Transfer Rule: मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के तबादला नियमों को लेकर बड़ा बदलाव और चर्चा सामने आई है। नए नियमों के तहत अब स्वैच्छिक तबादला लेने वाले जिला कैडर के सहायक शिक्षकों की सीनियरिटी नई जगह पर शून्य मानी जाएगी, जिससे उनके भविष्य के प्रमोशन और सेवा लाभ प्रभावित हो सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के बाद संबंधित शिक्षक का नाम नई सीनियरिटी सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।
स्वैच्छिक तबादले पर सीनियरिटी खत्म होने का असर
19 जून से 23 जून तक ऑनलाइन चॉइस फिलिंग
स्कूल शिक्षा विभाग ने तबादला प्रक्रिया का नया शेड्यूल जारी किया है। इसके तहत 19 जून से 23 जून तक ऑनलाइन चॉइस फिलिंग की जाएगी। इस अवधि में शिक्षक अपनी पसंद के स्थानों का चयन कर सकेंगे और उसी आधार पर तबादला प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी तरीके से संचालित की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता से बचा जा सके।
तीन कैडर में विभाजित हैं शिक्षक
प्रदेश में शिक्षकों को तीन अलग-अलग कैडर में बांटा गया है—
- प्राथमिक शिक्षक – जिला स्तर कैडर
- माध्यमिक शिक्षक – संभाग स्तर कैडर
- उच्च माध्यमिक शिक्षक (व्याख्याता) – राज्य स्तर कैडर
नए नियमों के अनुसार यदि प्राथमिक शिक्षक जिले से बाहर तबादला लेते हैं तो उनकी सीनियरिटी शून्य हो जाएगी। इसी तरह माध्यमिक शिक्षक संभाग से बाहर तबादला लेते हैं तो उनकी भी सीनियरिटी समाप्त मानी जाएगी। हालांकि, राज्य स्तर कैडर वाले व्याख्याताओं पर यह नियम लागू नहीं होगा।
शिक्षक संगठनों ने जताई चिंता
शिक्षक संगठनों ने नए तबादला नियमों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था शिक्षकों के करियर और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। संगठनों का तर्क है कि सीनियरिटी खत्म होने से प्रमोशन की प्रक्रिया बाधित होगी और शिक्षक तबादले से बचने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
इसके अलावा संगठन ने ई-अटेंडेंस और जनगणना ड्यूटी से जुड़ी शर्तों को भी चुनौतीपूर्ण बताया है।
ई-अटेंडेंस और ड्यूटी नियम भी बने बाधा
नए नियमों के तहत स्वैच्छिक तबादले के लिए शिक्षकों की 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य की गई है। लेकिन शिक्षक संगठनों का कहना है कि तकनीकी समस्याओं, नेटवर्क की दिक्कतों और बोर्ड परीक्षा ड्यूटी के कारण कई शिक्षक यह शर्त पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 की ई-अटेंडेंस के आधार पर ही पात्रता तय की जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक पात्रता से बाहर हो सकते हैं।
80 से 90 प्रतिशत शिक्षक हो सकते हैं प्रभावित
जानकारी के अनुसार जनगणना ड्यूटी में तैनात शिक्षकों को भी स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे ऐसे शिक्षक वर्ष 2027 तक तबादले के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। इस प्रावधान के चलते बड़ी संख्या में शिक्षक तत्काल तबादला प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। बताया जा रहा है कि प्रदेश में लगभग 60 से 75 प्रतिशत शिक्षक वर्तमान में जनगणना ड्यूटी में कार्यरत हैं, जिसके कारण स्वैच्छिक तबादला चाहने वाले शिक्षकों की उपलब्धता काफी सीमित हो गई है।
स्थिति को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि कुल मिलाकर लगभग 80 से 90 प्रतिशत शिक्षक इस बार स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया में आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं। इससे न केवल शिक्षकों की स्थानांतरण संबंधी उम्मीदों पर असर पड़ेगा, बल्कि पूरे तबादला सिस्टम में भी असंतुलन की स्थिति बन सकती है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस तरह की शर्तों से जमीनी स्तर पर भारी असंतोष पैदा हो रहा है और कई शिक्षक अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति को लेकर शिक्षकों के बीच गंभीर असंतोष और चिंता का माहौल बना हुआ है। जहां सरकार इसे पारदर्शी, व्यवस्थित और डिजिटल प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, वहीं शिक्षक संगठन इसे करियर पर सीधा असर डालने वाला निर्णय मान रहे हैं। उनका कहना है कि स्वैच्छिक तबादले के बाद सीनियरिटी शून्य कर देना और प्रमोशन में पीछे धकेल देना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
इसके साथ ही ई-अटेंडेंस की 90 प्रतिशत अनिवार्यता, तकनीकी समस्याएं, नेटवर्क की दिक्कतें और बोर्ड परीक्षा ड्यूटी जैसे कारणों से बड़ी संख्या में शिक्षक पहले ही पात्रता शर्तें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को भी तबादला प्रक्रिया से बाहर रखने के कारण स्थिति और कठिन हो गई है। कुल मिलाकर, यह नीति जहां प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का दावा करती है, वहीं जमीनी स्तर पर यह शिक्षकों के लिए असमंजस और असंतोष का कारण बन रही है। अब सभी की निगाहें 19 जून से शुरू होने वाली ऑनलाइन चॉइस फिलिंग प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे आगे की स्थिति और स्पष्ट होगी और नीति का वास्तविक प्रभाव सामने आ सकेगा।
