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वर्षितप पारणे लाभार्थी बने भंसाली परिवार, बेबी कियारा के जन्मदिन पर मिला पुण्य अवसर, 100 आराधकों की ऐतिहासिक तपस्या का बहुमान

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Published On: 12 June 2026
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वर्षितप पारणे लाभार्थी बनकर भंसाली परिवार ने बेबी कियारा प्रांजल भंसाली के जन्मदिन पर तपस्वियों को पारणे करवाए। थांदला में चल रहे ऐतिहासिक सामूहिक वर्षितप में करीब 100 आराधक 400 दिनों की तपस्या कर रहे हैं।

वर्षितप पारणे लाभार्थी बने भंसाली परिवार, बेबी कियारा के जन्मदिन पर मिला पुण्य अवसर

थांदला। वर्षितप पारणे लाभार्थी बनने का सौभाग्य प्राप्त कर भंसाली परिवार ने बेबी कियारा प्रांजल भंसाली के जन्मदिन को धार्मिक एवं पुण्यमयी स्वरूप प्रदान किया। तपस्वियों को अनुकूल पदार्थों से आहार करवाकर तप अनुमोदना का लाभ लेने में संघ समाज के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना करते हुए कई परिवार अपने परिवारजनों के जन्मदिन, पुण्य स्मृति दिवस एवं अन्य विशेष अवसरों को यादगार बनाने के लिए नगर में चल रहे ऐतिहासिक वर्षितप पारणों के लाभार्थी बन रहे हैं। इसी क्रम में भंसाली परिवार ने परिवार की नन्ही सदस्य कियारा प्रांजल भंसाली के जन्मदिन पर वर्षितप आराधकों के पारणों का लाभ लेकर अपने द्रव्य का सदुपयोग किया।

इस अवसर पर भंसाली परिवार की वीर माता तारादेवी भंसाली, ऊषा भंसाली, अनिल भंसाली, चंदा भंसाली, संध्या भंसाली, अंकित भंसाली, प्रांजल भंसाली, निखिल भंसाली सहित परिवार के अन्य सदस्य एवं इष्टमित्र उपस्थित रहे। सभी ने वर्षितप आराधकों को पारणे करवाकर तपस्या की अनुमोदना की तथा प्रभावना प्रदान कर बहुमान भी किया।

वर्षितप पारणे लाभार्थी बनने की बढ़ रही परंपरा

नगर में चल रही वर्षितप आराधना के दौरान तपस्वियों के पारणों का लाभ लेने के लिए समाजजनों में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत परिवार अपने विशेष अवसरों को तपस्वियों की सेवा और तप अनुमोदना के माध्यम से सार्थक बना रहे हैं।

यह परंपरा न केवल धार्मिक संस्कारों को मजबूत कर रही है बल्कि नई पीढ़ी को भी जैन धर्म की तपस्या, संयम और त्याग की परंपराओं से जोड़ रही है।

100 आराधकों की 400 दिनों की ऐतिहासिक तपस्या

श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया एवं सचिव हितेश शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन शासन गौरव थांदला की भूमि को गौरवान्वित करने वाले महान संत पूज्य गुरुदेव उमेशमुनिजी की पावन स्मृति में अणु शताब्दी वर्ष की अष्ट वर्षीय आराधना के तीसरे चरण में सामूहिक वर्षितप का आयोजन किया जा रहा है।

यह आयोजन बुद्धपुत्र प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी की प्रेरणा तथा यहां विराजित पूज्या महासती निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी एवं दीप्तिश्रीजी के मंगल आशीर्वाद से संपन्न हो रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में करीब 100 आराधक 400 दिनों की उग्र तपस्या रूप वर्षितप कर रहे हैं। इन आराधकों के पारणों का लाभ संघ द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार कोई भी श्रद्धालु प्राप्त कर सकता है।

वर्षितप आराधना का आध्यात्मिक महत्व

तप अनुमोदना का मिलता है विशेष पुण्य

जैन धर्म में तपस्या की अनुमोदना को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। तपस्वियों को अनुकूल आहार प्रदान करना, उनकी साधना का सम्मान करना तथा पारणे का लाभ लेना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

नई पीढ़ी को मिल रहे संस्कार

बेबी कियारा के जन्मदिन पर वर्षितप पारणे का लाभ लेकर भंसाली परिवार ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। इससे नई पीढ़ी में धार्मिक संस्कारों एवं सामाजिक सहभागिता की भावना को बल मिलता है।

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