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Harda Biomass Plant में भीषण आग: सोडलपुर गांव में 3 मशीनें जलकर खाक, करीब 40 लाख रुपये नुकसान की आशंका

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Published On: 12 June 2026
Harda Biomass Plant में भीषण आग: सोडलपुर गांव में तीन मशीनें जलकर खाक, करीब 40 लाख रुपये नुकसान की आशंका

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Harda Biomass Plant में भीषण आग: सोडलपुर गांव में तीन मशीनें जलकर खाक,

Harda Biomass Plant : मध्य प्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी थाना क्षेत्र अंतर्गत सोडलपुर गांव में गुरुवार को एक बायोमास प्लांट में अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरे प्लांट परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। आग की तीव्रता के चलते प्लांट में लगी तीन महत्वपूर्ण मशीनें पूरी तरह जलकर नष्ट हो गईं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस हादसे में लगभग 40 लाख रुपये तक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक नुकसान का आंकलन अभी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

अचानक कैसे लगी आग?

जानकारी के अनुसार, सोडलपुर गांव स्थित यह बायोमास प्लांट खेतों से निकलने वाले भूसे, मक्का के अवशेष और अन्य कृषि अपशिष्ट से कोयला तैयार करने का कार्य करता है। रोज़ की तरह गुरुवार को भी प्लांट में काम चल रहा था, तभी अचानक परिसर के एक हिस्से में आग की लपटें उठती दिखाई दीं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि कर्मचारियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में आग ने आसपास के पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। स्थिति गंभीर होती देख कर्मचारियों ने तुरंत बाहर निकलकर स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग को सूचना दी।

तीन मशीनें और भारी मात्रा में कच्चा माल नष्ट

आग की लपटों ने देखते ही देखते प्लांट में लगी तीन बड़ी मशीनों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वे पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। इसके अलावा प्लांट में रखा हुआ भारी मात्रा में कच्चा माल—जैसे भूसा, मक्का के अवशेष और अन्य वेस्ट मटेरियल—भी पूरी तरह नष्ट हो गया।

प्लांट संचालक निखिल पटेल ने बताया कि यह कच्चा माल उत्पादन प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी था और इसकी भारी मात्रा में स्टोरेज की गई थी। आग लगते ही यह सामग्री तेजी से जलने लगी, जिससे आग और अधिक फैल गई और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

40 लाख रुपये तक नुकसान का अनुमान

प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इस भीषण आगजनी में लगभग 40 लाख रुपये तक के आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इसमें मशीनरी की क्षति, कच्चे माल का नुकसान और उत्पादन ठप होने से होने वाली हानि शामिल है।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक नुकसान का आकलन तकनीकी जांच और फील्ड सर्वे के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएगा। संभावना यह भी है कि कुल नुकसान का आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है।

दमकल विभाग की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। आग की भयावहता को देखते हुए अतिरिक्त फायर ब्रिगेड वाहनों को भी बुलाया गया।

दमकलकर्मियों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया। हालांकि तब तक प्लांट का बड़ा हिस्सा जलकर नष्ट हो चुका था। आग बुझाने के दौरान सुरक्षा को देखते हुए आसपास के इलाके को खाली भी कराया गया।

वेस्ट मटेरियल ने बढ़ाई आग की तीव्रता

प्लांट परिसर में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील कृषि अवशेष जैसे भूसा और मक्का के छिलके संग्रहित थे। यही कच्चा माल आग फैलने का सबसे बड़ा कारण बना। जैसे ही आग ने इस सामग्री को पकड़ा, यह तेजी से पूरे परिसर में फैल गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बायोमास प्लांट में ज्वलनशील पदार्थों का सुरक्षित भंडारण और फायर सेफ्टी सिस्टम का होना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

उत्पादन पूरी तरह ठप

इस हादसे के बाद बायोमास प्लांट का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। तीन प्रमुख मशीनों के नष्ट हो जाने से उत्पादन कार्य रुक गया है। प्लांट प्रबंधन फिलहाल नुकसान का आकलन और मरम्मत की योजना बनाने में जुटा है।

संचालक निखिल पटेल ने बताया कि मशीनरी के नुकसान और कच्चे माल के जलने के कारण उत्पादन दोबारा शुरू करने में काफी समय लग सकता है।

प्रशासन की जांच जारी

स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी।

अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी टीम और फायर विभाग की संयुक्त जांच जारी है और सभी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस घटना के बाद औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट में भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री रखी गई थी, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उद्योगों में नियमित फायर ऑडिट, अलार्म सिस्टम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए ताकि बड़े हादसों को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों में दहशत

आग लगने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। कुछ ही समय में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और आसमान में उठता घना काला धुआं दूर से ही दिखाई दे रहा था, जिसे देखकर स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। कई लोग अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कुछ ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए गए। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने लगातार पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोका। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर नियंत्रण पा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि तब तक काफी नुकसान हो चुका था और लोग अभी भी घटना को लेकर भयभीत नजर आए।

निष्कर्ष

हरदा जिले के सोडलपुर गांव में बायोमास प्लांट में लगी यह भीषण आग एक गंभीर औद्योगिक हादसा है, जिसमें मशीनरी और कच्चे माल का भारी नुकसान हुआ है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब 40 लाख रुपये तक का नुकसान बताया जा रहा है, जबकि अंतिम आंकड़ा जांच के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है और आग लगने के कारणों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। यह घटना औद्योगिक सुरक्षा और फायर सेफ्टी सिस्टम की आवश्यकता को एक बार फिर स्पष्ट रूप से उजागर करती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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