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विकसित भारत के लक्ष्य के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर करना होगा काम: NITI Aayog की बैठक में पीएम मोदी का बड़ा संदेश

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Published On: 12 June 2026
विकसित भारत के लक्ष्य के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर करना होगा काम: NITI Aayog की बैठक में पीएम मोदी का बड़ा संदेश

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विकसित भारत के लक्ष्य के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर करना होगा काम: 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को NITI Aayog की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्यों को देश के समग्र विकास में सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन इसके साथ ही कई नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर अपराध, नशीली दवाओं का दुरुपयोग, जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने आज दोहरी जिम्मेदारी है। एक ओर देश को आधुनिक तकनीकों और नवाचारों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाना है, वहीं दूसरी ओर इनसे जुड़े संभावित खतरों और सामाजिक चुनौतियों पर भी नियंत्रण बनाए रखना है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे AI और डिजिटल तकनीकों को विकास का साधन बनाएं, लेकिन साथ ही साइबर धोखाधड़ी और तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी रणनीतियां भी तैयार करें।

AI को अवसर के रूप में देखने की जरूरत

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि AI आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनने जा रहा है। ऐसे में भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अभी से तैयारी करनी होगी।

उन्होंने राज्यों से कहा कि वे युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान करें। शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा देकर AI आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत कार्यबल तैयार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि AI को केवल एक तकनीक के रूप में नहीं बल्कि रोजगार, नवाचार और आर्थिक विकास के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

साइबर फ्रॉड और ड्रग्स की समस्या पर चिंता

प्रधानमंत्री मोदी ने साइबर अपराध और नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को गंभीर सामाजिक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन और इंटरनेट के विस्तार के साथ साइबर धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे निपटने के लिए राज्यों को तकनीकी क्षमता बढ़ाने, जागरूकता अभियान चलाने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह समाज और युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसके लिए रोकथाम, जनजागरूकता, शिक्षा और पुनर्वास जैसे बहुआयामी प्रयासों की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में समन्वित रणनीति अपनाएं और समाज के सभी वर्गों को इसमें शामिल करें।

अल-नीनो और जल संकट को लेकर चेतावनी

बैठक में प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो की परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु का प्रभाव कृषि, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर पड़ सकता है। इसलिए राज्यों को समय रहते आवश्यक तैयारियां करनी चाहिए।

उन्होंने जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए कहा कि पानी की हर बूंद का महत्व समझना होगा। राज्यों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल प्रबंधन और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत विकास गाथा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक अनिश्चितताओं और चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इसके बावजूद भारत लगातार विकास की नई मिसालें स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा आज दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति केवल केंद्र सरकार के प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि राज्यों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसलिए आने वाले वर्षों में राज्यों को विकास के नए मॉडल अपनाने और निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार करना होगा।

आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को और तेज करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर उपलब्ध सर्वोत्तम प्रथाओं और सफल मॉडलों को अपनाकर उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि नवाचार, गुणवत्ता, अनुसंधान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना भी है। राज्यों को अपने उद्योगों, कृषि और सेवा क्षेत्रों को मजबूत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

व्यापार समझौतों से नए अवसरों का लाभ उठाने की सलाह

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के वर्षों में भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए व्यापार समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से देश के युवाओं, उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।

उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इन अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए स्थानीय उद्योगों और कारोबारियों को तैयार करें। इसके लिए प्रशिक्षण, निर्यात प्रोत्साहन, कौशल विकास और बाजार तक पहुंच बढ़ाने जैसी पहलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि राज्यों को सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय रणनीति बनानी चाहिए। विदेशी निवेश न केवल आर्थिक विकास को गति देता है, बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

विकसित भारत के लिए सहकारी संघवाद जरूरी

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में सहकारी संघवाद की अवधारणा को दोहराते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि विकास केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि राज्यों, जिलों, ब्लॉकों और गांवों तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि “विकसित भारत” का संकल्प केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक लक्ष्य बनना चाहिए। जब प्रत्येक राज्य और प्रत्येक क्षेत्र विकास की दिशा में समान गति से आगे बढ़ेगा, तभी भारत वास्तव में विकसित राष्ट्र बन सकेगा।

सुशासन और पारदर्शिता से बढ़ेगा निवेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि निवेश आकर्षित करने के लिए केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है। राज्यों को सुशासन, पारदर्शिता और बेहतर बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि निवेशक ऐसे क्षेत्रों में निवेश करना पसंद करते हैं जहां प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल हों और व्यवसाय करने में आसानी हो।

उन्होंने राज्यों को ब्रांडिंग और “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को प्राथमिकता देने की सलाह दी। इसके साथ ही डेटा सेंटर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष प्रयास करने पर भी जोर दिया।

अगली पीढ़ी की मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी विनिर्माण क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने अगली पीढ़ी की मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ रही है और यह देश के लिए बड़ा अवसर है। यदि राज्य आधुनिक औद्योगिक नीतियों और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दें, तो भारत विनिर्माण क्षेत्र में विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है।

सभी राज्यों की भागीदारी बनी विशेष आकर्षण

दिनभर चली इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के सभी 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया। यह पहली बार था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री इस वार्षिक बैठक में शामिल हुए। इसे सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय विकास के प्रति राज्यों की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक सभी राज्य विकसित नहीं होंगे, तब तक भारत भी विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास का आधार राज्यों का संतुलित और समावेशी विकास है।

जिला स्तर पर GDP का आकलन करने का सुझाव

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को स्थानीय स्तर पर विकास की बेहतर निगरानी के लिए जिला स्तर पर GDP का आकलन करने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि यदि जिलों की आर्थिक प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाए तो विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जिला आधारित विकास मॉडल से स्थानीय जरूरतों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

ODOP योजना को बढ़ावा देने पर जोर

प्रधानमंत्री ने “एक जिला, एक उत्पाद” (ODOP) पहल को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे अपने जिलों की विशिष्ट उत्पाद क्षमता की पहचान करें और उसे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए रणनीति तैयार करें।

उन्होंने कहा कि ODOP पहल स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने, रोजगार बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके आधार पर निर्यात-केंद्रित रणनीतियां तैयार कर भारत के निर्यात को नई गति दी जा सकती है।

रक्षा निर्माण क्षेत्र में अवसरों की पहचान

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा निर्माण क्षेत्र को भारत के लिए उभरते हुए महत्वपूर्ण सेक्टर के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है।

उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे रक्षा विनिर्माण से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतियां बनाएं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निवेश आकर्षित होगा और देश की सामरिक क्षमता भी मजबूत होगी।

निष्कर्ष

नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत का भविष्य तकनीक, नवाचार, सुशासन और सहकारी संघवाद के मजबूत आधार पर निर्मित होगा। उन्होंने राज्यों को AI, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रक्षा निर्माण और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अवसरों का लाभ उठाने के साथ-साथ साइबर अपराध, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान खोजने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं था, बल्कि एक ऐसे समावेशी और विकसित भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने वाला था, जिसमें हर राज्य, हर जिला और हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी हो। यही सामूहिक प्रयास भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सबसे मजबूत आधार साबित हो सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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