Twisha Sharma मौत मामला: बेल्ट छिपाने वाला ASI छुट्टी पर, जेल में किताब पढ़ती मिलीं आरोपी गिरिबाला सिंह
भोपाल के चर्चित Twisha Sharma मौत मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में शुरुआत से ही संदेह के घेरे में रहे एएसआई दिनेश शर्मा अचानक छुट्टी पर चले गए हैं। उन पर घटना से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य, विशेष रूप से फंदे में इस्तेमाल की गई बेल्ट को छिपाने के आरोप लगते रहे हैं। एएसआई ने अवकाश का कारण बीमारी बताया है, लेकिन उनके छुट्टी पर जाने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
इधर, मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हाथों में है, जो मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। वहीं मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की टीम ने भोपाल केंद्रीय जेल पहुंचकर आरोपी और सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह से मुलाकात की।
जेल में किताब पढ़ती मिलीं गिरिबाला सिंह
महिला आयोग की टीम बुधवार को भोपाल सेंट्रल जेल पहुंची, जहां उसने महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, लाइब्रेरी, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसी दौरान टीम ने जेल में बंद गिरिबाला सिंह से भी मुलाकात की।
जानकारी के अनुसार, गिरिबाला सिंह उस समय लेखक देवदत्त पटनायक की पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ रही थीं। आयोग की टीम को देखते ही उन्होंने पुस्तक एक ओर रख दी और कहा कि उन्हें जेल में किसी प्रकार की परेशानी नहीं है। आयोग की टीम यह जांचने पहुंची थी कि उन्हें किसी प्रकार की विशेष सुविधा तो उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
बेल्ट छिपाने के आरोपों के बीच छुट्टी पर गए ASI
मामले में शुरुआत से ही बेल्ट को लेकर विवाद बना हुआ है। आरोप है कि घटना में उपयोग की गई बेल्ट को छिपाने का प्रयास किया गया था। इस पूरे मामले में संदिग्ध माने जा रहे एएसआई दिनेश शर्मा अब अवकाश पर चले गए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन जांच एजेंसियां उनके रोल को लेकर पहले से ही जानकारी जुटा रही हैं।
CBI ने मनोरोग चिकित्सकों से की पूछताछ
जांच को आगे बढ़ाते हुए सीबीआई ने ट्विशा शर्मा का इलाज करने वाले मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टरों से पूछताछ की है। एजेंसी ने चिकित्सकों के बयान दर्ज किए और इलाज से जुड़े दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक डॉक्टरों द्वारा उपलब्ध कराए गए मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार संबंधी पर्चियां जांच में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर सीबीआई ट्विशा की मानसिक और शारीरिक स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों पर फोकस
सीबीआई को ट्विशा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी प्राप्त हो चुकी है। अब एजेंसी मेडिकल रिपोर्ट, डिजिटल डेटा और फोरेंसिक साक्ष्यों का आपस में मिलान कर रही है।
जांच में प्रेग्नेंसी, कथित गर्भपात, शरीर पर मिले चोटों के निशान, फांसी के तरीके और अन्य परिस्थितियों को विशेष रूप से जांचा जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, फोटो, वीडियो और डिलीट किए गए डेटा की भी गहन जांच की जा रही है।
गिरिबाला सिंह की ओर से पेश हुए वकील
मामले में आरोपी गिरिबाला सिंह की ओर से जिला अदालत में लीगल एड डिफेंस काउंसिल की अधिवक्ता रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने वकालतनामा पेश किया है। दोनों अधिवक्ता विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े हैं। इस कारण अदालत ने प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति मांगी है।
अब तक क्या-क्या हुआ?
12 मई को ट्विशा शर्मा का शव उनके घर में फांसी पर लटका मिला था। इसके बाद परिवार ने मौत को संदिग्ध बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। 14 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। बाद में मामले ने तूल पकड़ा और जांच की मांग हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई।
22 मई को हाईकोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम के आदेश दिए, जबकि मध्यप्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा की। 26 मई को सीबीआई ने आधिकारिक रूप से जांच अपने हाथ में ले ली। इसके बाद से एजेंसी लगातार साक्ष्य जुटाने, गवाहों से पूछताछ करने और घटनास्थल का पुनर्निर्माण करने में लगी हुई है।
जांच पर टिकी सबकी नजर
ट्विशा शर्मा मौत मामला अब मध्यप्रदेश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल हो चुका है। घटना के बाद से ही परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है और मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर कई स्तरों पर आवाज उठाई जा रही है। इसी बीच केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई भी केस से जुड़े हर पहलू की गहनता से पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स, चैट हिस्ट्री और संबंधित गवाहों के बयानों का मिलान कर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट करने में जुटी है।
मामले में सामने आए नए तथ्यों और विभिन्न पक्षों के दावों के कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच और अधिक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल साक्ष्य, डिजिटल डेटा और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने वाले दिनों में कई अहम सवालों के जवाब दे सकती हैं।
वहीं, प्रदेशभर के लोग इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। परिवार, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की अपेक्षा है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो तथा जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर न्याय सुनिश्चित किया जाए। आने वाले दिनों में इस मामले में महत्वपूर्ण खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
