Meenakshi Natarajan नामांकन विवाद: चुनाव आयोग से राहत नहीं, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश में सियासी घमासान
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस की उम्मीदवार Meenakshi Natarajan के नामांकन पत्र को खारिज किए जाने के बाद विवाद और तेज हो गया है। पार्टी को इस मामले में अब तक भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से कोई राहत नहीं मिली है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
चुनाव आयोग से नहीं मिला जवाब, कांग्रेस ने उठाया बड़ा कदम
कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फैसले को पलटने की मांग की थी। हालांकि, इस मुलाकात के बाद भी आयोग की ओर से कोई स्पष्ट आदेश या राहत नहीं दी गई।
सूत्रों के अनुसार, आयोग की ओर से देर रात तक कोई निर्णय नहीं आने के बाद कांग्रेस ने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है और अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
नाम वापसी की अंतिम तारीख आज
राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया के तहत 11 जून को नाम वापसी की अंतिम तारीख निर्धारित की गई है। यदि सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य स्तर से तत्काल कोई हस्तक्षेप नहीं होता है, तो मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन लगभग तय माना जा रहा है।
इस स्थिति ने कांग्रेस की रणनीति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका
Meenakshi Natarajan के नामांकन निरस्त किए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय गलत आधार पर लिया गया है और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
कांग्रेस का तर्क है कि निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का सही पालन नहीं किया गया, जिसके कारण उनका उम्मीदवार अनुचित रूप से बाहर हो गया।
बीजेपी की आपत्ति और नामांकन रद्द होने का कारण
भारतीय जनता पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया कि नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई गई थी।
रिटर्निंग ऑफिसर ने इस आपत्ति की जांच के बाद दस्तावेजों के आधार पर कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद और अधिक गहरा गया है।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के अनुसार उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें दो वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान हो और जिनमें अदालत द्वारा आरोप तय किए जा चुके हों।
कांग्रेस का दावा है कि संबंधित मामला इस श्रेणी में नहीं आता, इसलिए नामांकन रद्द करना कानून के खिलाफ है।
कांग्रेस विधायकों का दिल्ली कूच
इस विवाद के बीच कांग्रेस ने अपने 62 विधायकों को दिल्ली भेजने का निर्णय लिया है। भोपाल में बुधवार को रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस विधायकों ने उपवास और धरना भी दिया।
अब सभी विधायक दिल्ली जाकर चुनाव आयोग और राष्ट्रपति से इस फैसले पर हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक
इस पूरे मामले पर आगे की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस महासचिवों, प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
यह बैठक 11 जून 2026 को सुबह 11:30 बजे नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित की गई है। कांग्रेस अध्यक्ष इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद और आगे की कानूनी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
मध्यप्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम के बाद तीखी हलचल देखने को मिल रही है। जहां कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा बता रही है, वहीं बीजेपी का कहना है कि नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की गई है।
आगे क्या हो सकता है?
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के संभावित हस्तक्षेप और चुनाव आयोग की आगे की स्थिति पर टिकी हुई है। अगर जल्द कोई राहत नहीं मिलती है तो राज्यसभा की तीनों सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
निष्कर्ष
Meenakshi Natarajan के नामांकन को लेकर उठा यह विवाद मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस जहां इसे न्यायिक लड़ाई तक ले गई है, वहीं बीजेपी इसे नियमों के पालन का परिणाम बता रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है।
