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PoK में 12 आरक्षित सीटों को लेकर हिंसा भड़की, जनआंदोलन उग्र, सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में तनाव चरम पर

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Published On: 9 June 2026
PoK

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PoK में 12 आरक्षित सीटों को लेकर हिंसा भड़की, जनआंदोलन ने लिया उग्र रूप

विवाद ने पूरे क्षेत्र में बढ़ाया तनाव

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर चल रहा विवाद अब व्यापक जनआंदोलन और हिंसक झड़पों में बदल चुका है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि कई क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधी टकराव की स्थिति बन गई है।

स्थानीय प्रशासन हालात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगातार बढ़ते विरोध और भीड़ के कारण स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है और बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल है।

JAAC के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन

लंबे समय से उठ रही थी मांग

इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है, जो लंबे समय से इन 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग उठा रही है। संगठन का कहना है कि यह व्यवस्था स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है।

JAAC का आरोप है कि इन सीटों के कारण स्थानीय आबादी का वास्तविक प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है और निर्णय प्रक्रिया में बाहरी समूहों का प्रभाव बढ़ जाता है। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक असंतुलन का मामला बताया है।

12 आरक्षित सीटों का विवाद क्या है?

विधानसभा संरचना से जुड़ा मामला

PoK की विधानसभा कुल 53 सीटों पर आधारित है। इनमें से 45 सीटों पर सीधे जनता द्वारा चुनाव होता है, जबकि शेष सीटें विभिन्न श्रेणियों के लिए आरक्षित हैं।

विवाद का केंद्र वे 12 सीटें हैं जो उन लोगों के लिए आरक्षित मानी जाती हैं, जो जम्मू और कश्मीर से विस्थापित होकर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में बस गए थे। इनमें 1947, 1965 और 1971 के युद्धों और संघर्षों के दौरान विस्थापित हुए परिवार भी शामिल हैं।

स्थानीय संगठनों का तर्क है कि यह व्यवस्था स्थानीय नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करती है।

स्थानीय बनाम विस्थापित समुदाय की राजनीति

प्रतिनिधित्व को लेकर गहराता टकराव

JAAC का कहना है कि स्थानीय आबादी को उनके ही क्षेत्र की राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि इन आरक्षित सीटों के कारण बाहरी प्रभाव बढ़ता है और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता नहीं मिलती।

दूसरी ओर समर्थक पक्ष का कहना है कि विस्थापित समुदायों को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए क्योंकि वे ऐतिहासिक परिस्थितियों में प्रभावित हुए हैं।

हिंसक झड़पों में बिगड़े हालात

प्रदर्शन और सुरक्षा बल आमने-सामने

विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में स्थिति कई बार नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी।

कुछ इलाकों में पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं, जिसके बाद अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। प्रशासन ने हालात को काबू में करने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू किए।

प्रशासन की कार्रवाई और चुनौती

नियंत्रण में मुश्किल हालात

प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।

कई क्षेत्रों में आवाजाही पर भी असर पड़ा है और स्थानीय लोगों को दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार का रुख और बातचीत की कोशिश

सुधारों के दावे लेकिन असंतोष जारी

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कई मांगों पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और प्रशासनिक सुधारों की प्रक्रिया जारी है। सरकार का दावा है कि क्षेत्र में पारदर्शिता और विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

हालांकि प्रदर्शनकारी इन दावों से संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

मुजफ्फराबाद समझौते के बाद भी असंतोष

वादों के लागू न होने का आरोप

अक्टूबर 2025 में सरकार और JAAC के बीच हुए ‘मुजफ्फराबाद समझौते’ के तहत सब्सिडी, मुआवजा और प्रशासनिक सुधारों का वादा किया गया था।

लेकिन JAAC का कहना है कि इन वादों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। विकास कार्यों की धीमी गति और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति ने लोगों में निराशा बढ़ा दी है।

आंदोलन से हिंसा तक का सफर

लगातार अनसुनी मांगों का परिणाम

धीरे-धीरे यह मुद्दा शांत बातचीत से निकलकर बड़े आंदोलन और फिर हिंसक टकराव में बदल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी मांगों को बार-बार नजरअंदाज किया गया, जिसके चलते वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए।

इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है।

सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव

कानून-व्यवस्था बड़ी चुनौती

लगातार हो रही हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर भारी दबाव है। कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और प्रशासन को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा है।

हालात सामान्य करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

निष्कर्ष

PoK में 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। JAAC के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन और सुरक्षा बलों के साथ टकराव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई नया समझौता बनता है या यह विवाद और अधिक गहराकर क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करता

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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