LPG Price Hike: उज्ज्वला योजना पर बड़ा बदलाव, अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगा सब्सिडी लाभ
घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिर बढ़ोतरी, महंगाई का असर जारी
देश में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने हाल ही में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की वृद्धि की है। यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बढ़ोतरी है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।
इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई है। इससे पहले भी 7 मार्च को 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका
सरकारी एलपीजी योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए सरकार ने सब्सिडी और रियायती सिलेंडरों की संख्या में बड़ा बदलाव किया है।
अब तक इस योजना के तहत लाभार्थियों को सालाना 9 रियायती सिलेंडर मिलते थे, जिसे घटाकर अब सिर्फ 4 सिलेंडर कर दिया गया है। इस फैसले को सरकार ने वित्तीय प्रबंधन और वास्तविक घरेलू खपत के अनुरूप बताया है।
इस बदलाव के बाद उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली राहत में उल्लेखनीय कमी आई है, जिसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगा DBT लाभ
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब केवल पहले 4 रिफिल पर ही 300 रुपये प्रति सिलेंडर का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा।
पहले यह लाभ सालाना 9 सिलेंडरों तक दिया जाता था, जिसे अब संशोधित कर दिया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एक सामान्य उज्ज्वला परिवार साल में औसतन लगभग 4 सिलेंडर ही उपयोग करता है, इसी आधार पर यह बदलाव किया गया है।
योजना की शुरुआत से अब तक कई बदलाव
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी, जिसका उद्देश्य गरीब और वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने के लिए एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना था।
शुरुआत में इस योजना के तहत लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडर दिए जाते थे। बाद में इसे घटाकर 9 कर दिया गया और अब इसे और घटाकर 4 कर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव वास्तविक खपत और आर्थिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया गया है।
LPG सब्सिडी और सरकार का खर्च
उज्ज्वला योजना के तहत सरकार लाभार्थियों को सब्सिडी भी देती है। मई 2022 में 200 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी शुरू की गई थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया।
यह राशि हर रिफिल के बाद सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी पर लगभग 52,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
कंपनियों को अभी भी भारी घाटा
सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) मौजूदा खुदरा कीमतों के बावजूद 14.2 किलोग्राम वाले प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और कंपनियों के वित्तीय बोझ को लगातार बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस घाटे के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू रिटेल दरों के बीच बना अंतर है। वैश्विक स्तर पर गैस की लागत कई बार अधिक रहती है, जबकि सरकार आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े इसके लिए घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखती है।
इस वजह से तेल कंपनियों को अंतर की भरपाई खुद करनी पड़ती है, जिससे हर सिलेंडर पर घाटा दर्ज किया जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में स्थिरता नहीं आती या सब्सिडी ढांचे में बदलाव नहीं होता, तो यह वित्तीय दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
उज्ज्वला लाभार्थियों पर आर्थिक असर
नई व्यवस्था के बाद उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को पहले चार सिलेंडरों पर 300 रुपये की सब्सिडी के बाद प्रति सिलेंडर लगभग 642 रुपये का भुगतान करना होगा।
हालांकि सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था औसत घरेलू खपत के अनुरूप है, लेकिन उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
LPG सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और उज्ज्वला योजना में किए गए बदलावों ने उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। जहां सरकार इसे वित्तीय संतुलन और औसत खपत के आधार पर सही कदम बता रही है, वहीं आम परिवारों पर इसका आर्थिक प्रभाव चर्चा का विषय बना हुआ है।
आने वाले समय में LPG मूल्य निर्धारण और सब्सिडी नीति पर सरकार के अगले फैसलों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
