Rajya Sabha Chunav 2026: MP कांग्रेस में हलचल, सभी विधायक कर्नाटक शिफ्ट होने की तैयारी में, उमंग सिंघार करेंगे नेतृत्व
MP में आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मतदान से पहले कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी क्रम में खबर है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस के सभी विधायक दूसरे राज्य में शिफ्ट किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इन विधायकों को लेकर कर्नाटक जा सकते हैं।
9 जून को हो सकता है विधायकों का शिफ्ट
सूत्रों के अनुसार, 9 जून को कांग्रेस अपने सभी विधायकों को कर्नाटक ले जाने की तैयारी में है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि यह कदम राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए उठाया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि वोटिंग तक विधायकों को एक साथ और सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक टूट-फूट या दबाव की स्थिति से बचा जा सके।
कर्नाटक या तेलंगाना, कहां जाएगी कांग्रेस की टीम?
पहले यह चर्चा थी कि कांग्रेस विधायक तेलंगाना भेजे जा सकते हैं, लेकिन अब सूत्रों के मुताबिक अधिक संभावना कर्नाटक की है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और वहां के नेतृत्व, खासकर मुख्यमंत्री और संगठन, को बाड़ेबंदी (हॉर्स ट्रेडिंग रोकने की रणनीति) में अनुभव माना जाता है।
इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व इस विकल्प को ज्यादा सुरक्षित मान रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय 9 जून को ही सामने आने की उम्मीद है।
उमंग सिंघार का बयान: “सैर-सपाटा भी हो जाएगा”
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा अपने विधायकों को संभालकर रखती है, इसलिए कांग्रेस को भी अपने विधायकों को एकजुट रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह कदम संगठनात्मक मजबूती के लिए उठाया जा रहा है और इसी बहाने सभी विधायकों का “सैर-सपाटा” भी हो जाएगा। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
क्रॉस वोटिंग का डर बना वजह
कांग्रेस को सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का बताया जा रहा है। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।
कांग्रेस को आशंका है कि कुछ विधायक दबाव या प्रलोभन में आकर वोट बदल सकते हैं, जिससे पार्टी को नुकसान हो सकता है। इसी कारण सभी विधायकों को एक साथ रखने की रणनीति बनाई जा रही है।
MP में सीटों का गणित
वर्तमान राजनीतिक समीकरण के अनुसार मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 228 प्रभावी विधायक हैं। दो विधायकों के वोटिंग से बाहर रहने की स्थिति में संख्या थोड़ी कम हो जाती है।
राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की आवश्यकता होती है।
भाजपा का गणित
भारतीय जनता पार्टी के पास लगभग 164 विधायक हैं। वह आसानी से अपने दो उम्मीदवारों को पर्याप्त वोट देकर जीत दिला सकती है। इसके बाद भी उसके पास अतिरिक्त वोट बचते हैं, जिन्हें तीसरी सीट के लिए रणनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है।
कांग्रेस का गणित
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पास लगभग 63 विधायक बताए जा रहे हैं। यदि अन्य सहयोगी दलों का समर्थन मिल जाए तो यह संख्या 64 तक पहुंच सकती है, जिससे एक सीट जीतने की संभावना बनती है।
हालांकि तीसरी सीट को लेकर मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है और क्रॉस वोटिंग निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
भाजपा की रणनीति भी मजबूत
भाजपा तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी अपने मौजूदा वोटों के अलावा अन्य संभावित समर्थन जुटाने की कोशिश में है, ताकि क्रॉस वोटिंग के जरिए जीत सुनिश्चित की जा सके।
18 जून को होगा मतदान
MP में राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान 18 जून को निर्धारित है। इससे पहले दोनों प्रमुख दल—कांग्रेस और भाजपा—अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
कांग्रेस का मुख्य फोकस अपने विधायकों को एकजुट रखना और पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित करना है।
निष्कर्ष
राज्यसभा चुनाव 2026 से पहले MP की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा विधायकों को कर्नाटक शिफ्ट करने की तैयारी इसे और रोचक बना रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह रणनीति कितनी सफल साबित होती है और क्या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रख पाती है या नहीं।
