अहो जिनशासनम् कार्यक्रम में मुंबई के घाटकोपर में शांतिलालजी गुलेच्छा ने जैन इतिहास की अनसुनी और प्रेरणादायी कहानियों के माध्यम से समाज में गौरव, श्रद्धा और जिनशासन के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
अहो जिनशासनम् कार्यक्रम: जैन इतिहास की अनसुनी स्वर्णिम गाथाओं से गूंजा घाटकोपर
मुंबई। अहो जिनशासनम् कार्यक्रम के माध्यम से जैन इतिहास की गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) मुंबई जोन एवं घाटकोपर चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रेरणादायी कार्यक्रम “अहो जिनशासनम् – जैन इतिहास की स्वर्णिम एवं अनसुनी कहानियां” का भव्य आयोजन घाटकोपर स्थित जवेरीबेन पोपटलाल सभागृह में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में जैन धर्मावलंबियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर जैन संस्कृति, इतिहास और जिनशासन की गौरवगाथाओं का श्रवण किया। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण धर्म, इतिहास और प्रेरणा से ओतप्रोत रहा।
अहो जिनशासनम् कार्यक्रम में जैन इतिहास की जीवंत प्रस्तुति
अशोक टिमरेचा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रख्यात मोटिवेशनल वक्ता एवं जैन समाज के अनमोल रत्न श्री शांतिलालजी गुलेच्छा (मोकलसर) ने अपने ओजस्वी एवं प्रभावशाली वक्तव्य के माध्यम से जैन इतिहास की अनेक प्रेरणादायी, अद्भुत एवं ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।उन्होंने अपनी प्रभावशाली शैली में ऐसी अनेक कहानियां सुनाईं, जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं। वक्ता ने जैन समाज के त्याग, तप, सेवा, संस्कृति और आध्यात्मिक योगदान को अत्यंत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।
श्रोताओं ने प्रत्येक कथा को गहरी रुचि के साथ सुना और समय-समय पर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।
नई पीढ़ी को जैन गौरव से जोड़ने का संदेश
अहो जिनशासनम् कार्यक्रम के दौरान श्री शांतिलालजी गुलेच्छा ने कहा कि जैन समाज की नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जैन राजाओं, आचार्यों, संतों तथा समाज के महापुरुषों द्वारा किए गए योगदान को यदि युवा वर्ग जानेगा, तो उनमें समाज और धर्म के प्रति स्वाभाविक गौरव का भाव विकसित होगा।उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे जैन मूल्यों, संस्कारों और सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा जिनशासन, समाज और राष्ट्र के उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाएं।
बार-बार तालियों से गूंजता रहा सभागृह
कार्यक्रम के दौरान कई अवसर ऐसे आए जब उपस्थित जनसमुदाय वक्ता के विचारों से भावविभोर हो उठा। जवेरीबेन पोपटलाल सभागृह बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
श्रोताओं ने कार्यक्रम को केवल एक व्याख्यान नहीं बल्कि जैन इतिहास के गौरव को पुनः जागृत करने वाला एक प्रेरक अभियान बताया।
कई लोगों ने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक और प्रेरणादायी जानकारियां समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और विरासत को पहचान सके।
प्रमुख पदाधिकारियों और अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
अहो जिनशासनम् कार्यक्रम में जैन समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।इस अवसर पर JITO Apex के चेयरमैन श्री पृथ्वीराजजी कोठारी, सेक्रेटरी जनरल श्री ललितजी डांगी, कोषाध्यक्ष श्री संपतराजजी चापलोत, जीतो घाटकोपर चैप्टर के अध्यक्ष महेन्द्र चोरड़िया, सचिव सुनील दोषी, जीतो मुंबई जोन के अध्यक्ष डॉ. विजय जैन, सचिव CA विजय जैन सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।सभी अतिथियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे जैन इतिहास और जिनशासन की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
जिनशासन के प्रति श्रद्धा और समर्पण का संचार
अहो जिनशासनम् कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल इतिहास का वर्णन करना नहीं था, बल्कि समाज में जिनशासन के प्रति श्रद्धा, समर्पण और गौरव की भावना को मजबूत करना भी था।कार्यक्रम ने उपस्थित सभी लोगों के मन में जैन धर्म की महान परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव जागृत किया। साथ ही यह संदेश भी दिया कि समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जैन इतिहास की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की पहल
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने इस प्रकार के आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया। उनका मानना था कि जैन समाज की गौरवशाली विरासत और इतिहास को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने धर्म और संस्कृति पर गर्व कर सकें।अहो जिनशासनम् कार्यक्रम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और सफल पहल के रूप में सामने आया, जिसने जैन इतिहास की स्वर्णिम विरासत को नई ऊर्जा और नए उत्साह के साथ समाज के सामने प्रस्तुत किया।
प्रेषक
अशोक टिमरेचा
गढ़ सिवाना – मुंबई


