MP राज्यसभा चुनाव 2026: तीसरी सीट पर सस्पेंस बरकरार, भाजपा के अगले कदम पर टिकीं निगाहें, कांग्रेस ने शुरू की विधायकों की किलेबंदी
MP में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा की ओर से तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन पर दांव लगाया है। हालांकि चुनावी चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र भाजपा की संभावित तीसरी सीट को लेकर बनी रणनीति है, जिस पर अभी भी सस्पेंस कायम है।
राजनीतिक गलियारों में लगातार इस बात की चर्चा हो रही है कि भाजपा अंतिम समय में तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतार सकती है। हालांकि पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अभी तक इस संबंध में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन संगठन के भीतर चल रही गतिविधियां इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं करतीं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव अब केवल औपचारिक प्रक्रिया न रहकर राजनीतिक रणनीति और शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच बनता दिखाई दे रहा है।
भाजपा और कांग्रेस ने की विधायक दल की बैठक
MP राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के तहत शनिवार को भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने विधायक दल की बैठक आयोजित की। बैठकों में विधायकों को मतदान प्रक्रिया, वोट की वैधता, बैलेट पेपर पर सही तरीके से मतदान करने और चुनाव संबंधी तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई।
भाजपा ने अपने सभी विधायकों को एकजुट रहने और पार्टी लाइन के अनुसार मतदान करने के निर्देश दिए। वहीं कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को चुनाव तक सतर्क रहने और किसी भी राजनीतिक प्रलोभन या दबाव से बचने की सलाह दी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों दलों की बैठकों का मुख्य उद्देश्य विधायकों को मतदान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी गलती से बचाना था, क्योंकि राज्यसभा चुनाव में एक वोट भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीसरी सीट पर भाजपा ने बढ़ाया रहस्य
MP में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा की संभावित तीसरी सीट को लेकर हो रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पार्टी फिलहाल केवल दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है और तीसरे उम्मीदवार को उतारने की कोई योजना नहीं है।
इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषक और पार्टी सूत्र मानते हैं कि भाजपा अभी भी विकल्पों पर विचार कर रही है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अंतिम समय तक परिस्थितियों का आकलन कर सकता है और जरूरत पड़ने पर कोई बड़ा फैसला ले सकता है।
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक होने के कारण अटकलों का बाजार गर्म है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि यदि पार्टी को जीत की संभावनाएं नजर आती हैं तो वह तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतार सकती है।
केंद्रीय नेतृत्व के संकेत का इंतजार
भाजपा के भीतर तीसरी सीट को लेकर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होना माना जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में हर कदम सोच-समझकर उठाया जाता है और संगठन पूरी राजनीतिक गणना के बाद ही कोई निर्णय लेगा।
भाजपा के कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी के पास पर्याप्त संगठनात्मक क्षमता और रणनीतिक अनुभव है, जिससे वह चुनाव को रोचक बना सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी अतिरिक्त उम्मीदवार के नाम की पुष्टि नहीं हुई है।
कैलाश विजयवर्गीय के बयान से बढ़ी चर्चा
राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब वरिष्ठ भाजपा नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि यदि पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो उसे जिताने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे भाजपा की संभावित रणनीति का संकेत माना। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से किसी तीसरे उम्मीदवार की संभावना पर कोई टिप्पणी नहीं की।
कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की चिंता
दूसरी ओर कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखना है। पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है। इसी कारण कांग्रेस लगातार अपने विधायकों के संपर्क में है और उन्हें चुनाव तक संगठित बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
विधायक दल की बैठक में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन भी मौजूद रहीं। उन्होंने विधायकों से संवाद किया और पार्टी की एकजुटता बनाए रखने का संदेश दिया।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि मतदान के दौरान कोई अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हो। इसी वजह से विधायकों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
2016 की रणनीति की याद
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि भाजपा तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारती है तो यह वर्ष 2016 की रणनीति की याद दिला सकता है। उस समय भी भाजपा ने तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारकर राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने का प्रयास किया था।
हालांकि तब पार्टी को सफलता नहीं मिली थी, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। विधानसभा में दलों की संख्या, सहयोगी समर्थन और बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा इस बार नए विकल्पों पर विचार कर सकती है।
चुनावी मुकाबला हो सकता है दिलचस्प
राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने स्तर पर पूरी तैयारी में जुटी हैं। जहां भाजपा तीसरी सीट को लेकर सस्पेंस बनाए हुए है, वहीं कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
अब सभी की नजरें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं। यदि अंतिम समय में तीसरे उम्मीदवार की घोषणा होती है तो राज्यसभा चुनाव का मुकाबला और अधिक रोमांचक हो सकता है। आने वाले कुछ दिन मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं और राजनीतिक घटनाक्रम किसी भी समय नया मोड़ ले सकता है।
