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Indore Crime Branch की बड़ी कार्रवाई: 1.20 करोड़ की फ्रेंचाइज़ी धोखाधड़ी का पर्दाफाश, दिल्ली से दो डायरेक्टर गिरफ्तार

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Published On: 6 June 2026
Indore Crime Branch की बड़ी कार्रवाई: 1.20 करोड़ की फ्रेंचाइज़ी धोखाधड़ी का पर्दाफाश, दिल्ली से दो डायरेक्टर गिरफ्तार

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Indore Crime Branch की बड़ी कार्रवाई: 1.20 करोड़ की फ्रेंचाइज़ी धोखाधड़ी का पर्दाफाश, 

वेलनेस सेंटर के नाम पर बड़ा फ्रॉड उजागर

इंदौर। मध्यप्रदेश की Indore Crime Branch ने एक बड़े फ्रेंचाइज़ी धोखाधड़ी मामले का खुलासा किया है, जिसमें वेलनेस सेंटर खोलने के नाम पर 1 करोड़ 20 लाख रुपये की ठगी की गई थी। इस मामले में पुलिस ने नई दिल्ली से कंपनी के दो डायरेक्टरों को गिरफ्तार किया है। वहीं, इस गिरोह से जुड़े दो डॉक्टर अभी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

शिकायत से शुरू हुई जांच

यह पूरा मामला तब सामने आया जब रितु मेहता नाम की महिला ने इंदौर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि “डॉ. हरोर्स एस्थेटिक प्राइवेट लिमिटेड” नामक कंपनी के संचालकों ने उन्हें वेलनेस सेंटर की फ्रेंचाइज़ी देने का झांसा दिया और बड़ी राशि निवेश करवाने के लिए प्रेरित किया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी के डायरेक्टरों ने आकर्षक मुनाफे और ब्रांड सपोर्ट का वादा कर उनसे करीब 1.20 करोड़ रुपये की राशि ले ली, लेकिन बाद में न तो कोई फ्रेंचाइज़ी उपलब्ध कराई गई और न ही पैसा वापस किया गया।

Indore Crime Branch ने दर्ज किया मामला

शिकायत मिलने के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने तुरंत मामला दर्ज किया और एक विशेष जांच टीम का गठन किया। शुरुआती जांच में सामने आया कि यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें कई लोगों को इसी तरह झांसे में लेकर पैसे वसूले गए थे।

पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय जांच के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की और दिल्ली में दबिश देने की योजना बनाई।

दिल्ली में दबिश देकर दो आरोपी गिरफ्तार

जांच के दौरान क्राइम ब्रांच की टीम नई दिल्ली पहुंची और वहां आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में कंपनी के दो डायरेक्टर देबदुलाल बनर्जी और राहुल सावेल को गिरफ्तार कर लिया गया।

दोनों आरोपियों पर आरोप है कि वे लंबे समय से लोगों को वेलनेस सेंटर फ्रेंचाइज़ी देने के नाम पर झांसा देकर ठगी कर रहे थे। पुलिस ने उनके कब्जे से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

ठगी का तरीका और नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि यह गिरोह एक संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों द्वारा लोगों को आकर्षक बिजनेस मॉडल, ब्रांड सपोर्ट और हाई रिटर्न का लालच देकर निवेश कराया जाता था।

निवेश लेने के बाद या तो काम शुरू नहीं किया जाता था या फिर पीड़ितों को लंबे समय तक टालमटोल किया जाता था। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क से और भी कई लोग जुड़े हो सकते हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं।

फरार डॉक्टरों की तलाश जारी

इस मामले में दो डॉक्टरों की भूमिका भी सामने आई है, जो अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि ये दोनों आरोपी इस पूरे फ्रेंचाइज़ी मॉडल और निवेश प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे थे।

क्राइम ब्रांच की टीमें उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पूछताछ में हो सकते हैं बड़े खुलासे

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। माना जा रहा है कि इस पूछताछ के दौरान ठगी के पूरे नेटवर्क, निवेशकों की संख्या और अन्य सहयोगियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि यह मामला केवल एक शहर तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसका दायरा कई राज्यों तक फैला हुआ हो सकता है।

पुलिस की सख्त चेतावनी

क्राइम ब्रांच ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी निवेश या फ्रेंचाइज़ी योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी तरह से जांच-पड़ताल अवश्य करें। पुलिस ने कहा है कि किसी भी कंपनी के झूठे वादों, आकर्षक ऑफर्स और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के लालच में बिल्कुल भी न आएं, क्योंकि ऐसे प्रलोभन अक्सर धोखाधड़ी का हिस्सा होते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, हाल के समय में फ्रेंचाइज़ी और निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। कई लोग जल्दी लाभ कमाने की उम्मीद में बिना सत्यापन किए बड़ी रकम निवेश कर देते हैं, जिसका परिणाम बाद में भारी आर्थिक नुकसान के रूप में सामने आता है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी निवेश से पहले कंपनी की पृष्ठभूमि, कानूनी दस्तावेज, रजिस्ट्रेशन और पिछले रिकॉर्ड की जांच करना बेहद जरूरी है। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों या वित्तीय सलाहकारों से राय लेने की सलाह दी गई है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि जागरूकता ही ऐसे साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

निष्कर्ष

इंदौर में सामने आया यह फ्रेंचाइज़ी धोखाधड़ी मामला एक बड़े संगठित वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है। क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई से दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन जांच अभी जारी है।

पुलिस को उम्मीद है कि इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं और पूरे नेटवर्क का खुलासा जल्द किया जाएगा।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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