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Indore नगर निगम को राज्य सरकार का बड़ा झटका: 50 करोड़ की मांग ठुकराई, चुंगी क्षतिपूर्ति से 30 करोड़ की कटौती

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Published On: 5 June 2026
Indore

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Indore नगर निगम को राज्य सरकार का बड़ा झटका: 50 करोड़ की मांग ठुकराई, 

Indore , 5 जून 2026 – इंदौर नगर निगम को राज्य सरकार की ओर से एक बार फिर बड़ा वित्तीय झटका लगा है। शहर में गंभीर पानी संकट से निपटने के लिए नगर निगम द्वारा मांगे गए 50 करोड़ रुपए जारी नहीं किए गए, बल्कि चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में से 30 करोड़ रुपए की कटौती कर दी गई है।

इस फैसले के बाद नगर निगम की वित्तीय स्थिति और अधिक दबाव में आ गई है, जिससे शहर के जल संकट और विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

पानी संकट से निपटने के लिए मांगी गई थी सहायता

इंदौर में बढ़ते जल संकट को देखते हुए नगर निगम ने राज्य सरकार से 50 करोड़ रुपए की एकमुश्त सहायता राशि की मांग की थी। निगम का कहना था कि इस राशि से पानी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और टैंकर, बोरिंग तथा अन्य संसाधनों की मरम्मत व संचालन किया जाएगा।

नगर निगम को उम्मीद थी कि राज्य सरकार आपात स्थिति को देखते हुए यह सहायता उपलब्ध कराएगी, लेकिन अब तक कोई राशि जारी नहीं की गई है।

चुंगी क्षतिपूर्ति में 30 करोड़ की कटौती

नगर निगम को हर महीने राज्य सरकार से चुंगी क्षतिपूर्ति के तहत लगभग 45 करोड़ रुपए प्राप्त होते हैं। लेकिन इस बार नर्मदा परियोजना के बिजली बिल सहित अन्य समायोजन के बाद निगम को केवल 15 करोड़ रुपए ही जारी किए गए।

इस तरह कुल मिलाकर 30 करोड़ रुपए की कटौती कर दी गई, जिससे नगर निगम की वित्तीय स्थिति और कमजोर हो गई है।

समीक्षा बैठकें और आश्वासन, लेकिन फंड जारी नहीं

पानी संकट को लेकर हाल ही में राज्य सरकार के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने इंदौर में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर की जल समस्या से निपटने के लिए 50 करोड़ रुपए की मांग रखी थी।

इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इंदौर की स्थिति की समीक्षा की थी। इस दौरान सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई है।

Indore नगर निगम की वित्तीय स्थिति पर दबाव

नगर निगम पहले से ही वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। टैंकर किराए, बोरिंग मशीनों और मोटरों की मरम्मत जैसे कार्यों के लिए ठेकेदारों का करोड़ों रुपए बकाया है।

निगम को उम्मीद थी कि राज्य सरकार से मिलने वाली 50 करोड़ रुपए की सहायता से कुछ भुगतान किया जाएगा, लेकिन अब फंड न मिलने से भुगतान प्रक्रिया अटक गई है। इससे कई आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

ठेकेदारों का बकाया और बढ़ी मुश्किलें

नगर निगम की मौजूदा आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह अपने संसाधनों से ठेकेदारों का भुगतान कर सके। ऐसे में कामकाज प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।

पानी आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े कई ठेकेदारों का भुगतान लंबे समय से लंबित है, जिससे कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है और सुधार कार्यों में देरी हो सकती है। यह स्थिति शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव डाल रही है।

जल संकट के बीच बढ़ी चुनौती

इंदौर पहले से ही गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। ऐसे में वित्तीय संसाधनों की कमी नगर निगम के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं कराया गया तो शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है। गर्मी के मौसम में यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है।

प्रशासनिक समन्वय पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य सरकार और नगर निगम के बीच वित्तीय समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर सरकार ने उच्च स्तरीय बैठकों में आश्वासन दिया था, वहीं दूसरी ओर फंड जारी न होने से जमीनी स्तर पर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि बिना वित्तीय सहायता के जल संकट से निपटना बेहद कठिन होता जा रहा है।

जनता पर संभावित असर

यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसका सीधा और गंभीर असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ सकता है। पानी की नियमित आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ जाएगी, जिससे घरों में पेयजल की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। टैंकर सेवाओं में देरी या कमी के कारण कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, वहीं बोरिंग और पाइपलाइन मरम्मत जैसे जरूरी कार्य भी ठप पड़ सकते हैं।

विशेष रूप से गर्मी के मौसम में जल संकट और अधिक विकराल रूप ले सकता है। तापमान बढ़ने के साथ पानी की मांग भी तेजी से बढ़ती है, ऐसे में आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा लोगों की दैनिक दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। स्कूल, कार्यालय और घरेलू कामकाज सभी पर इसका असर दिखाई देगा। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो शहर में पानी को लेकर असंतोष और समस्याएं और बढ़ सकती हैं, जिससे प्रशासन पर भी अतिरिक्त दबाव बनेगा।

निष्कर्ष

राज्य सरकार द्वारा 50 करोड़ की सहायता राशि न दिए जाने और चुंगी क्षतिपूर्ति से 30 करोड़ की कटौती के बाद इंदौर नगर निगम की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। जल संकट के बीच यह स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है और शहर की जल व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए क्या ठोस समाधान सामने आता है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि आने वाले दिनों में वित्तीय विवाद का हल कैसे निकाला जाता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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