Abhijit Deepke का बड़ा बयान: 6 जून को दिल्ली एयरपोर्ट पर भीड़ न लगाने की अपील,
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे “कॉकरोच जनता पार्टी” के संस्थापक Abhijit Deepke ने 6 जून को दिल्ली एयरपोर्ट पर अपने समर्थकों से भीड़ न लगाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन को जनता का समर्थन उम्मीद से कहीं अधिक मिल रहा है, लेकिन एयरपोर्ट पर भारी भीड़ से आम लोगों और सुरक्षा व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
अभिजीत ने स्पष्ट किया कि वे एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद सीधे संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे, जहां से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए आधिकारिक अनुमति ली जाएगी।
एयरपोर्ट पर भीड़ न लगाने की अपील
Abhijit Deepke ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि सभी समर्थकों से अनुरोध है कि 6 जून को दिल्ली एयरपोर्ट पर भीड़ इकट्ठा न करें। उन्होंने कहा कि आंदोलन को जो जनसमर्थन मिल रहा है, वह उनकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक है, लेकिन जिम्मेदार नागरिक होने के नाते कानून व्यवस्था का पालन करना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्थिति में ऐसी भीड़ नहीं होनी चाहिए जिससे आम यात्रियों या सुरक्षा बलों को परेशानी हो।
पहले की अपील वापस ली
जानकारी के अनुसार, अभिजीत ने इससे पहले एक वीडियो संदेश में अपने समर्थकों को एयरपोर्ट पर आने की अपील की थी। लेकिन बाद में संभावित भीड़ और अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए उन्होंने अपनी यह अपील वापस ले ली।
अब उन्होंने समर्थकों से शांत और अनुशासित तरीके से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी
अभिजीत दीपके ने कहा कि एयरपोर्ट से निकलने के बाद वे सीधे संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे, जहां से जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अनुमति ली जाएगी।
उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा।
“जिम्मेदार नागरिकों की तरह व्यवहार जरूरी”
अपने वीडियो संदेश में अभिजीत ने कहा कि यदि हम खुद को जिम्मेदार नागरिक मानते हैं, तो हमें उसी जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अशांति, अव्यवस्था या कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली स्थिति पैदा न करें।
पार्टी के तीन प्रवक्ताओं की घोषणा
इसी बीच “कॉकरोच जनता पार्टी” की ओर से संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करते हुए तीन आधिकारिक प्रवक्ताओं की घोषणा की गई है।
पार्टी ने सौरभ दास, विजेता दहिया और आशुतोष रांका को आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त किया है। इन तीनों प्रवक्ताओं ने दिल्ली में पार्टी की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपनी मांगें तथा विचार जनता के सामने रखे।
प्रवक्ताओं ने मीडिया के माध्यम से देशभर के छात्रों और समर्थकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
पार्टी ने अपने आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराया है। पार्टी प्रवक्ता सौरभ दास ने CBSE प्रशासन पर भी सवाल उठाए और कहा कि केवल अधिकारियों के तबादले से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि छात्रों के हितों की रक्षा हो सके।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं सोनम वांगचुक
सूत्रों के अनुसार, 6 जून को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कैसे बनी कॉकरोच जनता पार्टी?
“कॉकरोच जनता पार्टी” एक सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक आंदोलन के रूप में उभरी है। यह विचार तब सामने आया जब भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत द्वारा कॉकरोच से जुड़ी एक टिप्पणी पर चर्चा हुई और इसके बाद यह डिजिटल आंदोलन तेजी से वायरल हो गया।
इस संगठन के इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स होने का दावा किया जाता है, जिससे इसकी ऑनलाइन लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
संस्थापक Abhijit Deepke कौन हैं?
अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर के रहने वाले हैं। वे 30 वर्ष के हैं और उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।
वे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं और 2020 से 2022 तक AAP के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस दौरान वे डिजिटल कैंपेन और मीम आधारित कंटेंट निर्माण में सक्रिय रहे।
बाद में वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए और वर्तमान में बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन में मास्टर्स कर रहे हैं।
आंदोलन का डिजिटल प्रभाव
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है और सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से फैल रहा है। इसके समर्थक देशभर में सक्रिय हैं और विभिन्न मुद्दों पर ऑनलाइन अभियान चला रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल आंदोलन नई तरह की राजनीतिक अभिव्यक्ति का उदाहरण है, जहां सोशल मीडिया एक मजबूत संगठनात्मक माध्यम बन रहा है।
निष्कर्ष
अभिजीत दीपके की अपील से यह साफ है कि वे अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं। 6 जून को दिल्ली में होने वाला प्रदर्शन और उससे जुड़ी गतिविधियां अब सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। जहां एक ओर उनके समर्थकों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने जिम्मेदारी और कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह डिजिटल आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
