Sambhal 2.0 में बड़ा बदलाव: डिजिटल सिस्टम से तय होगी पात्रता, फर्जी लाभ पर संपत्ति कुर्की और FIR की तैयारी
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री Sambhal योजना 2.0 में व्यापक बदलावों की घोषणा करते हुए इसे पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब फर्जी लाभ प्राप्त करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें एफआईआर, संपत्ति कुर्की और लाभ राशि की वसूली जैसे कठोर कदम शामिल हैं। साथ ही योजना की पूरी आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया को ऑटोमेटेड सिस्टम के माध्यम से संचालित किया जाएगा।
यह बदलाव राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि नए सिस्टम से पात्र और अपात्र लाभार्थियों की पहचान तेज और सटीक तरीके से हो सकेगी।
आवेदन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, छह महीने की व्यवस्था समाप्त
नई व्यवस्था के तहत संबल योजना में अब छह महीने तक चलने वाली पारंपरिक आवेदन प्रक्रिया को समाप्त करने की तैयारी की गई है। इसके स्थान पर पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रिकॉर्ड और डेटाबेस आधारित सिस्टम से जोड़ा जा रहा है।
आवेदक को समग्र पोर्टल पर परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु दर्ज करनी होगी। इसके बाद सिस्टम स्वतः ही केस को आगे प्रोसेस करेगा और आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया शुरू करेगा। इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को कम किया जा सके।
सॉफ्टवेयर आधारित पात्रता निर्धारण
संबल 2.0 में सबसे बड़ा बदलाव पात्रता निर्धारण प्रणाली में किया गया है। अब किसी भी लाभार्थी की पात्रता का निर्णय पूरी तरह सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम करेगा।
यह सिस्टम समग्र पोर्टल, आधार डेटाबेस और अन्य सरकारी रिकॉर्ड को आपस में जोड़कर स्वतः विश्लेषण करेगा। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि आवेदक पात्र है या अपात्र। केवल पात्र मामलों को ही आगे आर्थिक सहायता के लिए स्वीकृत किया जाएगा।
इस प्रणाली का उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को तेज, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।
फर्जी लाभ लेने वालों पर सख्त कार्रवाई
श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या झूठे रिकॉर्ड के आधार पर संबल योजना का लाभ लेता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही प्राप्त की गई पूरी राशि की वसूली की जाएगी, जिसे भू-राजस्व बकाया की तरह वसूला जाएगा।
इसके अलावा फर्जी लाभ लेने वालों की संपत्ति कुर्क करने का भी प्रावधान किया गया है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं पर सख्त नियंत्रण रखा जा सके।
15 जून से शुरू होगा राज्यव्यापी वेरिफिकेशन अभियान
प्रदेशभर में 15 जून 2026 से व्यापक स्तर पर वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के दौरान सभी जिलों में संबल योजना के लाभार्थियों की जांच की जाएगी।
इस प्रक्रिया में ई-केवाईसी और आधार सत्यापन को अनिवार्य किया गया है। जिन लाभार्थियों द्वारा यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाएगी, उनका पंजीयन स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा।
यह अभियान राज्य के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और प्रत्येक लाभार्थी के रिकॉर्ड की पुनः जांच की जाएगी।
अपात्र लाभार्थियों को अंतिम मौका
सरकार ने अपात्र लाभार्थियों को 15 जून 2026 तक का समय दिया है, जिसमें वे स्वेच्छा से अपने पंजीयन को वापस ले सकते हैं। यह कदम उन लोगों को अवसर देने के लिए उठाया गया है, जिन्होंने गलती से या गलत जानकारी के आधार पर योजना का लाभ लिया हो।
निर्धारित समय सीमा के बाद यदि कोई व्यक्ति जांच में अपात्र पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पहले से प्राप्त लाभ की वसूली भी की जाएगी।
आधार और ई-केवाईसी अनिवार्य
नई व्यवस्था में आधार सत्यापन और ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना किसी भी लाभार्थी का पंजीयन मान्य नहीं माना जाएगा।
सरकार का मानना है कि डिजिटल सत्यापन प्रणाली से डुप्लीकेट और फर्जी पंजीकरणों पर रोक लगेगी और वास्तविक पात्र व्यक्तियों को ही योजना का लाभ मिलेगा।
भोपाल और इंदौर में 1.10 लाख कार्डों की जांच
शुरुआती चरण में भोपाल और इंदौर में कुल 1.10 लाख संबल कार्डों की जांच की जाएगी। इन दोनों बड़े शहरों में सबसे अधिक पंजीकृत लाभार्थी हैं, इसलिए यहां विशेष निगरानी रखी जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, यह जांच चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में विस्तारित की जाएगी और हर जिले में रिकॉर्ड का डिजिटल मिलान किया जाएगा।
भू-राजस्व मॉडल पर वसूली व्यवस्था
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि फर्जी लाभ के मामलों में वसूली प्रक्रिया भू-राजस्व बकाया की तरह अपनाई जाएगी। इसका मतलब है कि बकाया राशि को सख्ती से वसूला जाएगा और जरूरत पड़ने पर संपत्ति जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
इस व्यवस्था से सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में न हो।
पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस पर जोर
संबल 2.0 को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का उद्देश्य शासन प्रणाली को पारदर्शी बनाना है। इसके तहत सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेंगे और किसी भी स्तर पर मैनुअल हस्तक्षेप सीमित होगा।
सरकार का दावा है कि इससे न केवल भ्रष्टाचार में कमी आएगी, बल्कि लाभार्थियों को भी समय पर सहायता मिल सकेगी।
प्रशासनिक तैयारी तेज
15 जून से शुरू होने वाले वेरिफिकेशन अभियान को लेकर श्रम विभाग ने सभी जिलों को तैयारी के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी पात्र लाभार्थी को अनावश्यक रूप से परेशानी न हो और अपात्रों की पहचान सटीक तरीके से की जाए।
निष्कर्ष
संबल 2.0 में किए जा रहे ये बड़े बदलाव मध्यप्रदेश की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखे जा रहे हैं। डिजिटल सिस्टम, ई-केवाईसी अनिवार्यता और सख्त कार्रवाई के प्रावधानों के साथ सरकार पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
हालांकि, आने वाले दिनों में राज्यव्यापी वेरिफिकेशन अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लाभार्थियों की जांच और संभावित कार्रवाई देखने को मिल सकती है, जिससे यह योजना प्रशासनिक रूप से और अधिक सख्त हो जाएगी।
