Indore में इलाज में लापरवाही के आरोप के बाद बड़ा मामला, पुलिस ने कब्र से निकाला दो वर्षीय बच्ची का शव
Indore मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां इलाज में लापरवाही के आरोपों के चलते पुलिस और प्रशासन को एक दो वर्षीय बच्ची के शव को कब्र से बाहर निकालना पड़ा। यह कार्रवाई पोस्टमार्टम और मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए की गई है। मामला भंवरकुआं थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां बच्ची की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, दो वर्षीय काशवी यादव को उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद 27 मई को भोलाराम उस्ताद मार्ग स्थित एक निजी हेल्थ केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि बच्ची को सुबह करीब 11:30 बजे अस्पताल ले जाया गया, जहां दिनभर उसका इलाज चलता रहा। हालांकि उसी दिन रात करीब 8 बजे अस्पताल ने उसे डिस्चार्ज कर दिया।
परिवार का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके कारण बच्ची की हालत बिगड़ती चली गई।
हालत बिगड़ने के बाद दूसरे अस्पताल में भर्ती
Indore अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ ही घंटों बाद बच्ची की तबीयत अचानक और अधिक खराब हो गई। परिजन उसे तुरंत शहर के एक अन्य अस्पताल, मेट्रो हॉस्पिटल, लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे तत्काल एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया।
एमवाय अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान 29 मई की रात करीब 2 बजे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
पुलिस को सूचना दिए बिना किया गया अंतिम संस्कार
सबसे अहम बात यह रही कि परिजनों ने बच्ची की मौत के बाद पुलिस को सूचित किए बिना ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। जानकारी के अनुसार, 29 मई को सुबह करीब 11 बजे बच्ची के शव को दफना दिया गया।
इसके बाद उसी रात पीड़ित परिवार ने भंवरकुआं थाने पहुंचकर अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि शुरुआती इलाज में हुई गलती के कारण उनकी मासूम बेटी की जान गई।
पुलिस ने दर्ज किया मामला और शुरू की जांच
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी। परिजनों के आरोपों की पुष्टि और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन से शव को दोबारा निकालने की अनुमति मांगी।
कब्र से निकाला गया बच्ची का शव
अनुमति मिलने के बाद मंगलवार को प्रशासन और पुलिस की टीम ने कब्र से बच्ची का शव बाहर निकाला। यह कार्रवाई जूनी इंदौर के अनुविभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) की निगरानी में की गई।
शव को बाहर निकालने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, ताकि मौत के कारणों की सटीक जांच की जा सके। इस दौरान मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा।
पांच डॉक्टरों का विशेष मेडिकल पैनल गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पोस्टमार्टम के लिए पांच डॉक्टरों का एक विशेष पैनल गठित किया है। यह टीम विस्तृत रूप से शव का परीक्षण करेगी और सभी जरूरी सैंपल एकत्र करेगी।
डॉक्टरों ने बच्ची के विसरा और अन्य जैविक सैंपल सुरक्षित रख लिए हैं, जिन्हें आगे रासायनिक जांच के लिए भेजा जाएगा। इन रिपोर्ट्स के आधार पर यह तय किया जाएगा कि मौत प्राकृतिक थी या इसमें किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही शामिल थी।
फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब पूरी जांच फॉरेंसिक रिपोर्ट पर आधारित होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं।
इसके बाद ही संबंधित अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
घटना का पूरा घटनाक्रम
- 27 मई (सुबह 11:30 बजे): बच्ची को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया
- 27 मई (रात 8:00 बजे): अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया
- 27 मई की रात: तबीयत बिगड़ने पर दूसरे अस्पताल में भर्ती
- 29 मई (रात 2:00 बजे): एमवाय अस्पताल में मौत
- 29 मई (सुबह 11:00 बजे): बिना पुलिस सूचना अंतिम संस्कार
- बाद में: परिजनों की शिकायत पर जांच शुरू, शव कब्र से निकाला गया
प्रशासन सतर्क, जांच जारी
इस घटना ने पूरे क्षेत्र में संवेदनशीलता बढ़ा दी है। प्रशासन और पुलिस दोनों ही मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
