मोहनखेड़ा तीर्थ में 6–7 जून को होगा ‘पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना’ बहुमान कार्यक्रम
नागदा (ब्रजेश बोहरा)। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल श्री मोहनखेड़ा तीर्थ एक बार फिर एक बड़े आध्यात्मिक और शैक्षिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन महिला परिषद् की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के तत्वावधान में दो दिवसीय “पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना बहुमान कार्यक्रम” का आयोजन 6 एवं 7 जून 2026 (शनिवार–रविवार) को किया जाएगा। यह आयोजन जयंतसेन म्यूजियम, मोहनखेड़ा तीर्थ में संपन्न होगा।
इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. एवं विराजित मुनि भगवंत-साध्वीजी भगवंतों की पावन निश्रा में किया जाएगा। आयोजन को लेकर जैन समाज में उत्साह का वातावरण है और देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, विद्यार्थियों एवं गुरुजनों के पहुंचने की संभावना है।
धार्मिक शिक्षा और संस्कारों को मजबूत करने का उद्देश्य
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जैन धर्म की धार्मिक शिक्षा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन एवं आध्यात्मिकता का विकास करना है।
मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना पिछले दो वर्षों से लगातार विभिन्न पाठशालाओं में संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को पंच प्रतिक्रमण, दो प्रतिक्रमण, नवस्मरण, वंदितु सहित अनेक धार्मिक सूत्रों का कंठस्थ अध्ययन कराया जा रहा है।
इस अध्ययन के आधार पर विद्यार्थियों को विभिन्न स्तरों पर सम्मानित किया जाता है, जिससे उनमें अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ती है और धार्मिक ज्ञान को व्यवहारिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
देशभर से होगा व्यापक सहभाग
यह आयोजन केवल एक क्षेत्रीय कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का धार्मिक सम्मेलन बनने जा रहा है। इसमें देशभर से नवयुवक परिषद, महिला परिषद, तरुण परिषद, बहु परिषद, बालिका परिषद सहित विभिन्न संगठनों के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी भाग लेंगे।
इसके अलावा विभिन्न पाठशालाओं के शिक्षक-शिक्षिकाएं भी अपने चयनित विद्यार्थियों के साथ इस आयोजन में शामिल होंगे। इससे यह कार्यक्रम एक बड़े शैक्षिक और धार्मिक नेटवर्क के रूप में विकसित होता दिखाई दे रहा है।
आयोजन समिति का मानना है कि इस तरह के आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर धार्मिक शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाते हैं।
विद्यार्थियों और गुरुजनों का विशेष बहुमान
कार्यक्रम में उन विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने धार्मिक सूत्रों को कंठस्थ कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यह सम्मान केवल पुरस्कार नहीं बल्कि उनके प्रयासों की सराहना और प्रेरणा का प्रतीक होगा।
इसके साथ ही पाठशालाओं के गुरुजनों को भी उनके योगदान के लिए विशेष रूप से बहुमानित किया जाएगा। गुरुजनों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए आयोजन समिति ने उन्हें कार्यक्रम का मुख्य हिस्सा बनाया है।
आयोजकों का कहना है कि गुरु ही बच्चों के चरित्र और संस्कार निर्माण की नींव रखते हैं, इसलिए उनका सम्मान समाज के लिए आवश्यक है।
यात्रा, आवास और भोजन की विशेष व्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। गुरुजनों एवं विद्यार्थियों के आने-जाने का यात्रा व्यय लाभार्थी परिवार द्वारा वहन किया जाएगा।
इसके अलावा दोनों दिनों के लिए आवास, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी प्रतिभागी को असुविधा का सामना न करना पड़े।
आयोजन समिति ने बताया कि यह व्यवस्था सेवा भावना और समाज के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
लाभार्थी परिवार का योगदान
इस पूरे कार्यक्रम के लाभार्थी श्रीमती प्रेमाबेन मांगीलालजी गांधीमुथा परिवार (सायला, वर्तमान निवास बेंगलुरु) हैं। उनके सहयोग से यह भव्य आयोजन संभव हो पा रहा है।
समिति ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और शैक्षिक कार्यों में सहयोग समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भक्ति सरगम योजना के अंतर्गत विशेष सम्मान
इस अवसर पर पूर्व घोषित “भक्ति सरगम योजना” के अंतर्गत उन अभ्यर्थियों का भी विशेष बहुमान किया जाएगा जिन्होंने पुण्यसम्राट द्वारा रचित 12-12 स्तवन, स्तुति, सज्झाय एवं चैत्यवंदन को कंठस्थ किया है।
यह पहल न केवल धार्मिक साहित्य के अध्ययन को बढ़ावा देती है, बल्कि भक्ति संगीत और जैन परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी कार्य करती है।
मोहनखेड़ा तीर्थ का धार्मिक महत्व
मोहनखेड़ा तीर्थ जैन समाज के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र स्थल माना जाता है। यह तीर्थ वर्षों से धार्मिक शिक्षा, तपस्या और आध्यात्मिक साधना का केंद्र रहा है।
ऐसे पवित्र स्थल पर इस प्रकार का आयोजन धार्मिक वातावरण को और अधिक सशक्त बनाता है और श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है।
समाज में शिक्षा और संस्कार की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में बच्चों में संस्कार और नैतिक शिक्षा का विकास अत्यंत आवश्यक है। इस तरह के कार्यक्रम उन्हें अपनी संस्कृति और धर्म से जोड़ने का कार्य करते हैं।
धार्मिक शिक्षा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवन जीने की सही दिशा भी प्रदान करती है।
आयोजन को लेकर उत्साह
कार्यक्रम को लेकर जैन समाज में भारी उत्साह देखा जा रहा है। देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विद्यार्थी इस आयोजन में भाग लेने के लिए तैयार हैं।
आयोजन समिति का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल एक समारोह नहीं बल्कि एक आंदोलन के रूप में धार्मिक शिक्षा को आगे बढ़ाने का कार्य करेगा।
राष्ट्रीय अपील
राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमाबेन गांधीमुथा एवं राष्ट्रीय महामंत्री संगीता पोरवाल ने सभी परिषद पदाधिकारियों, पाठशाला संचालकों, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं धर्मप्रेमी समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि बच्चों का उत्साहवर्धन करना और उनके ज्ञान को प्रोत्साहित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष
मोहनखेड़ा तीर्थ में आयोजित यह दो दिवसीय “पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना बहुमान कार्यक्रम” केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि शिक्षा, संस्कार और आध्यात्मिक विकास का संगम है।
यह आयोजन नई पीढ़ी को धार्मिक ज्ञान से जोड़ने, गुरुजनों का सम्मान करने और समाज में सेवा एवं भक्ति की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
