Indore में जीवदया अभियान: सूरी ऋषभ गुरुदेव की स्मृति में गौसेवा का भव्य आयोजन,
Indore में सेवा, करुणा और जीवदया की भावना को समर्पित एक अत्यंत पावन और भव्य आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें गौसेवा और मानव कल्याण के संदेश को केंद्र में रखते हुए एक विशेष जीवदया अभियान चलाया गया। यह आयोजन परोपकार सम्राट, मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरक प.पू. आचार्यदेव श्रीमद् विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराज की पावन स्मृति में श्री राजेन्द्र ऋषभ फाउंडेशन ट्रस्ट, इंदौर द्वारा आयोजित किया गया।
इस विशेष अवसर पर इंदौर स्थित श्रीराम मंदिर गौशाला और हंसदास मठ गौशाला में गौमाता के लिए हरी, ताजी और पौष्टिक सब्जियों का विशेष भोज समर्पित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल गौसेवा करना ही नहीं था, बल्कि समाज में जीवदया, करुणा और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना भी था।
जीवदया और सेवा की भावना को समर्पित आयोजन
यह पूरा अभियान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक सामाजिक और मानवीय संदेश भी था। आयोजनकर्ताओं के अनुसार, जीवदया का अर्थ केवल पशुओं की सेवा करना नहीं, बल्कि संपूर्ण जीव जगत के प्रति दया, सहानुभूति और सम्मान की भावना विकसित करना है।
गौसेवा को भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान प्राप्त है और इसे सदैव पुण्य कार्य माना गया है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस आयोजन में गौमाता के लिए विशेष पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई, जिसमें मौसमी हरी सब्जियां, पौष्टिक आहार और स्वच्छ भोजन सामग्री शामिल थी।
गुरुदेव श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी की स्मृति में समर्पण
यह आयोजन परोपकार सम्राट और मोहनखेड़ा महातीर्थ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प.पू. आचार्यदेव श्रीमद् विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराज की स्मृति को समर्पित था।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि गुरुदेव सदैव जीवदया को धर्म का सर्वोच्च रूप मानते थे। उनके अनुसार, किसी भी जीव के प्रति करुणा भाव रखना ही सच्ची साधना है। उनकी इन्हीं शिक्षाओं से प्रेरित होकर श्री राजेन्द्र ऋषभ फाउंडेशन ट्रस्ट लगातार सेवा कार्यों को आगे बढ़ा रहा है।

संतों के मार्गदर्शन में सेवा कार्य
इस अवसर पर आयोजन को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए गुरुदेवश्री के सुशिष्य अष्टम वर्षीतप तपस्वी प.पू. मुनिराज पीयूषचन्द्र विजयजी महाराज एवं ओजस्वी वक्ता प.पू. मुनिराज रजतचन्द्र विजयजी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे।
उन्होंने अपने प्रवचनों में कहा कि जीवदया केवल एक भाव नहीं बल्कि जीवन जीने की एक शैली है, जिसे अपनाकर व्यक्ति न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक जीवनशैली में तेजी से बढ़ते भौतिकवाद के बीच ऐसे सेवा कार्य मनुष्य को उसकी मूल संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं।
गौशालाओं में विशेष व्यवस्था और पौष्टिक भोजन
कार्यक्रम के अंतर्गत इंदौर की दो प्रमुख गौशालाओं—श्रीराम मंदिर गौशाला और हंसदास मठ गौशाला—में गौमाता के लिए विशेष भोज की व्यवस्था की गई।
भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए गौवंश के लिए ऐसे आहार की व्यवस्था की गई जो न केवल पौष्टिक हो बल्कि उनके शरीर को ठंडक और ऊर्जा भी प्रदान करे। इसमें ताजी हरी सब्जियां, प्राकृतिक आहार और स्वच्छ जल की विशेष व्यवस्था शामिल थी।
सेवा कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस प्रकार के प्रयास गौवंश के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को भी सुधारते हैं।
नियमित गौसेवा की परंपरा
संस्था द्वारा यह भी बताया गया कि केवल इस विशेष अवसर पर ही नहीं, बल्कि प्रत्येक रविवार को विभिन्न गौशालाओं में इसी प्रकार का सेवा अभियान चलाया जाता है।
इन अभियानों के अंतर्गत गौमाता को विशेष आहार, साफ-सफाई, चिकित्सा सहायता और देखभाल प्रदान की जाती है। यह परंपरा निरंतर जारी है और धीरे-धीरे समाज के अन्य वर्ग भी इससे जुड़ते जा रहे हैं।

धार्मिक और सामाजिक समरसता का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित संतों और समाजसेवियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जीवदया केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा कि जब समाज में करुणा और संवेदनशीलता बढ़ती है, तो सामाजिक असमानताएं और हिंसा स्वतः कम होने लगती हैं। गौसेवा जैसे कार्य इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं।
संतों और श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में कई प्रतिष्ठित संतों की उपस्थिति रही, जिनमें महामंडलेश्वर 1008 श्री राधे राधे बाबा जी, महामंडलेश्वर 1008 श्री रामगोपाल दास जी महाराज एवं महंत श्री पवनदास जी महाराज प्रमुख रहे।
इन संतों की उपस्थिति से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से भर गया। श्रद्धालुओं ने भी इस अवसर पर सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लिया और गौसेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि और पुण्य समर्पण
यह सेवा कार्य शिवगंज (राजस्थान) निवासी स्वर्गीय हिम्मतमलजी बभुतमलजी परमार की आत्मश्रेयार्थे समर्पित किया गया था। उनके परिवार की ओर से यह पुण्य कार्य श्री किशोरजी परमार (पुणे, दौंड) के हस्ते संपन्न हुआ।
संस्था ने उनके प्रति हार्दिक आभार और कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि ऐसे पुण्य कार्यों से समाज में सेवा की भावना और अधिक मजबूत होती है।

पर्यावरण और जीव संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि गौसेवा केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ विषय है।
गौवंश भारतीय कृषि प्रणाली, जैविक खेती और पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए उनकी देखभाल और संरक्षण करना आवश्यक है।
समाज के लिए प्रेरणादायक पहल
संस्था ने अंत में समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे जीवदया, गौसेवा और परोपकार जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी करें।
उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े सामाजिक परिवर्तन ला सकते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर जीवों के प्रति करुणा रखे, तो समाज अधिक संवेदनशील और संतुलित बन सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर में आयोजित यह जीवदया अभियान केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। सूरी ऋषभ गुरुदेव की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जीवदया ही सच्चा धर्म है और सेवा ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य।
गौमाता को समर्पित यह विशेष भोज और संतों का सान्निध्य इस आयोजन को और अधिक पवित्र और प्रेरणादायक बनाता है। ऐसे कार्यक्रम न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवित रखते हैं बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करते हैं।

