Iran ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता रोकी, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा; होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नई चेतावनी
तेहरान/वॉशिंगटन/बेरूत। मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। Iran ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है। यह कदम लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई और संघर्ष विराम के कथित उल्लंघन के विरोध में उठाया गया है। Iran के इस फैसले के बाद क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है और तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक गाजा और लेबनान में उसकी प्रमुख मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वह अमेरिका या अन्य मध्यस्थों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या संदेशों के आदान-प्रदान में भाग नहीं लेगा।
इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष से बढ़ा तनाव
मौजूदा स्थिति की जड़ लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते संघर्ष को बताया जा रहा है। इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्लाह ने संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन किया है, जिसके जवाब में उसने लेबनान में सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है।
वहीं हिजबुल्लाह का कहना है कि वह इजरायली हमलों के जवाब में कार्रवाई कर रहा है और अपनी रक्षा में सैन्य कदम उठा रहा है। दोनों पक्षों के बीच लगातार हो रही कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इजरायल “आत्मरक्षा” के नाम पर सैन्य अभियान जारी रखे हुए है, जबकि कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान शांति वार्ता के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यह प्रक्रिया समय लेने वाली है और तत्काल समाधान संभव नहीं है।
Iran का अमेरिका पर सख्त रुख
Iran ने स्पष्ट किया है कि वह गाजा और लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को रोकने की मांग पर अडिग है। तेहरान का कहना है कि जब तक इजरायली सेना पूरी तरह से बेरूत और अन्य प्रभावित क्षेत्रों से पीछे नहीं हटती, तब तक किसी भी तरह की बातचीत आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
Iran के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बयान जारी करते हुए कहा कि यदि किसी भी मोर्चे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन होता है, तो उसे सभी मोर्चों पर समझौते का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी परिणाम की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता
इस बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी अप्रत्यक्ष चेतावनी दी है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान और उसके सहयोगी समूह इस क्षेत्र में दबाव बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा बाब-अल-मंदेब जलमार्ग को लेकर भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जो वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
कूटनीतिक प्रयासों को झटका
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशें भी प्रभावित हुई हैं। पाकिस्तान को इस प्रक्रिया में एक मध्यस्थ की भूमिका में बताया जा रहा है। हाल ही में इस्लामाबाद में एक कूटनीतिक वार्ता का आयोजन किया गया था, जिसमें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल हुए थे, लेकिन यह बातचीत किसी ठोस परिणाम पर नहीं पहुंच सकी।
इसके अलावा पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की ईरान यात्रा को भी इस कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, लगातार बढ़ते तनाव के कारण शांति प्रयास फिलहाल सफल नहीं हो पाए हैं।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा हो सकती है। साथ ही, लेबनान और गाजा में जारी संघर्ष पहले से ही क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर रहा है।
निष्कर्ष
ईरान द्वारा अमेरिका के साथ शांति वार्ता रोकने का निर्णय और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दी गई अप्रत्यक्ष चेतावनी ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयासों की विफलता स्थिति को और जटिल बना रही है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी रहेगी, क्योंकि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा सकता है।
