हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी पर इंदौर में आयोजित विशेष व्याख्यान में जयदीप कर्णिक, भुवनेश सेंगर, मनोज कुमार और अरविंद तिवारी ने एआई युग, पत्रकारिता के भविष्य और रिपोर्टर की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी पर एकाग्र व्याख्यान सम्पन्न
इंदौर। हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी पूर्ण होने के अवसर पर हिन्दी सेवी मातृभाषा उन्नयन संस्थान, मातृभाषा डॉट कॉम एवं साहित्य ग्राम के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को राजेन्द्र माथुर सभागार में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी और एआई युग से कदमताल’ रहा, जिसमें देश के वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया विशेषज्ञों ने भाग लेकर पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मीडिया के भविष्य पर गंभीर चर्चा की।
कार्यक्रम में नोएडा से वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक, दी लपेटा के भुवनेश सेंगर, समागम के मनोज कुमार एवं अरविंद तिवारी बतौर अतिथि एवं वक्ता शामिल हुए।
हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी और बदलता मीडिया परिदृश्य
वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल पत्रकारिता का वर्तमान दौर अभूतपूर्व परिवर्तन लेकर आया है। तकनीक और एल्गोरिदम ने समाचारों की प्रस्तुति को बदल दिया है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी सामने आई हैं। आज समाचारों का मूल्यांकन अक्सर टीआरपी, व्यूज़ और ट्रेंडिंग विषयों के आधार पर किया जा रहा है, जिससे पत्रकारिता की मूल भावना प्रभावित हो रही है।उन्होंने चिंता व्यक्त की कि पाठकों की वास्तविक पसंद और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषय पीछे छूटते जा रहे हैं।
शब्द स्वागत एवं अतिथि सम्मान
कार्यक्रम का शब्द स्वागत मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने किया। अतिथियों का स्वागत प्रदीप जोशी, संजय त्रिपाठी, मणिमाला शर्मा, नितेश गुप्ता, डॉ. अखिलेश राव, विनीता तिवारी, जलज व्यास एवं जय सिंह रघुवंशी द्वारा किया गया।
जयदीप कर्णिक बोले— तकनीक शेर की सवारी जैसी
मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक ने कहा कि पिछले ढाई दशक में पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदला है।उन्होंने कहा—
“तकनीक शेर की सवारी की तरह है। यदि आप उस पर सवार हैं तो वह आपकी गुलाम है, लेकिन यदि वह आप पर सवार हो जाए तो वही तकनीक आपको निगल सकती है।”उन्होंने यह भी कहा कि जो पत्रकार रगड़ाई-घिसाई की पारंपरिक प्रक्रिया से नहीं गुजरा है, वह केवल एआई आधारित पत्रकार बनकर रह जाएगा।कर्णिक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास कौशल और अनुभव है तो सूचना प्रौद्योगिकी उसके लिए उपयोगी साबित हो सकती है, लेकिन केवल एआई पर निर्भरता खतरनाक हो सकती है। उन्होंने एआई को मानवता के लिए भी संभावित चुनौती बताते हुए इसके जिम्मेदार उपयोग पर बल दिया।
भुवनेश सेंगर ने कहा— रिपोर्टर नाम की संस्था को बचाना होगा
प्रख्यात पत्रकार भुवनेश सेंगर ने पत्रकारिता के 200 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले पत्रकारिता समाज सुधार, स्वतंत्रता आंदोलन और जनजागरण का प्रमुख माध्यम थी।उन्होंने कहा—
“एआई से ज्यादा जरूरी अपनी प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को मजबूत करना है। अब रिपोर्टर नाम की संस्था को बचाने की जरूरत है।”उन्होंने चिंता जताई कि पत्रकारिता धीरे-धीरे एक इवेंट में परिवर्तित होती जा रही है और कई बार केवल दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखकर सामग्री प्रस्तुत की जा रही है।
तकनीक को बोझ नहीं, अवसर मानें
वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार ने कहा कि यदि तकनीक को बोझ समझा जाएगा तो वर्तमान दौर में पीछे रह जाना तय है।उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में टिके रहने के लिए स्वयं को लगातार अपडेट करना आवश्यक है। नई तकनीकों को अपनाना समय की मांग है।
एआई पत्रकारिता के लिए अवसर भी है
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी ने एआई के सकारात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीक पत्रकारिता के लिए कई मायनों में लाभदायक साबित हो रही है।उन्होंने कहा कि एआई ने काम को आसान बनाया है और बदलते समय के साथ तकनीक को स्वीकार करना और उसके साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।
ई-साहित्य ग्राम डॉट कॉम का शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान ‘ई-साहित्य ग्राम डॉट कॉम’ वेबसाइट का औपचारिक शुभारंभ किया गया। साथ ही ‘समागम’ का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर अंकित तिवारी एवं देवेंद्र जैन का सम्मान किया गया।
बड़ी संख्या में पहुंचे पत्रकार और विद्यार्थी
कार्यक्रम का सफल संचालन अंशुल व्यास ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कीर्ति मेहता ने किया।आयोजन में इंजीनियर टी वाला एवं हिन्दीग्राम का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, मीडिया कर्मी तथा बड़ी संख्या में युवा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
हिन्दी पत्रकारिता की द्विशताब्दी केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं, बल्कि पत्रकारिता के भविष्य पर गंभीर चिंतन का अवसर भी है। इंदौर में आयोजित इस विशेष व्याख्यान ने यह संदेश दिया कि तकनीक और एआई के बढ़ते प्रभाव के बावजूद पत्रकारिता की आत्मा, मानवीय संवेदनाएं और रिपोर्टिंग की मूल भावना को बचाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।



