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श्री आदिनाथ जिनालय स्थापना दिवस 2026: अंतिम महा मस्तकाभिषेक का दिव्य अवसर, हजारों श्रद्धालुओं को मिलेगा पुण्य लाभ

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Published On: 1 June 2026
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श्री आदिनाथ जिनालय स्थापना दिवस 2026 के अवसर पर इंदौर के छत्रपति नगर स्थित तीर्थ स्वरूप श्री आदिनाथ दिगंबर जैन जिनालय में 3 जून को स्वर्ण-रजत कलशों से अंतिम महा मस्तकाभिषेक, भक्तामर पाठ एवं महाआरती का भव्य आयोजन होगा।

तीर्थ स्वरूप श्री आदिनाथ जिनालय स्थापना दिवस 2026: अंतिम महा मस्तकाभिषेक का दुर्लभ पुण्य अवसर

राजेश जैन दद्दू

इंदौर।
श्री आदिनाथ जिनालय स्थापना दिवस 2026 के पावन अवसर पर छत्रपति नगर स्थित तीर्थ स्वरूप श्री आदिनाथ दिगंबर जैन जिनालय में आगामी 3 जून, बुधवार को भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न होगा। जैन समाज के लिए यह अवसर विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन जिनालय के मूलनायक भगवान श्री 1008 आदिनाथ भगवान का इस वर्ष का अंतिम महा मस्तकाभिषेक स्वर्ण एवं रजत कलशों से संपन्न किया जाएगा।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि स्थापना दिवस समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है।

श्री आदिनाथ जिनालय स्थापना दिवस 2026 का धार्मिक महत्व

छत्रपति नगर स्थित तीर्थ स्वरूप श्री आदिनाथ दिगंबर जैन जिनालय इंदौर के प्रमुख जैन धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां विराजमान मूलनायक भगवान श्री 1008 आदिनाथ भगवान के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला महा मस्तकाभिषेक श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा एवं पुण्य संचय का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

कार्यक्रम की समय-सारिणी

ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने बताया कि कार्यक्रम निम्नानुसार आयोजित होंगे—

प्रातःकालीन कार्यक्रम

  • प्रातः 6:45 बजे – मंगलाष्टक प्रारंभ
  • प्रातः 7:15 बजे – मूलनायक श्री 1008 आदिनाथ भगवान का महा मस्तकाभिषेक
  • प्रातः 8:00 बजे – नित्य नियम पूजन

सांध्यकालीन कार्यक्रम

  • सायं 7:30 बजे – 48 दीपों के समर्पण के साथ श्री भक्तामर स्तोत्र पाठ
  • महाआरती

श्री आदिनाथ जिनालय स्थापना दिवस 2026 में होगा वर्ष का अंतिम महा मस्तकाभिषेक

ट्रस्ट पदाधिकारियों के अनुसार मूलनायक भगवान श्री 1008 आदिनाथ भगवान का महा मस्तकाभिषेक वर्ष में केवल तीन बार आयोजित किया जाता है।विपुल बाझलं ने बताया कि 3 जून को संपन्न होने वाला यह महा मस्तकाभिषेक वर्ष 2026 का अंतिम महा मस्तकाभिषेक होगा। इस कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।जैन धर्म में मस्तकाभिषेक को अत्यंत पुण्यकारी एवं आत्मशुद्धि का साधन माना गया है। स्वर्ण एवं रजत कलशों से होने वाला यह अभिषेक श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर प्रदान करेगा।

ट्रस्ट पदाधिकारियों ने की समाजजनों से सहभागिता की अपील

श्री आदिनाथ दिगंबर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट के कार्याध्यक्ष डॉ. जैनेन्द्र जैन ने अग्रसेन नगर, गौरव नगर, महावीर बाग एवं छत्रपति नगर सहित समस्त जैन समाज से कार्यक्रम में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया है।उन्होंने कहा कि भगवान आदिनाथ के अभिषेक, पूजन एवं आराधना से श्रद्धालुओं के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति का संचार होता है।

भक्तामर स्तोत्र पाठ और 48 दीपों की महाआरती बनेगी आकर्षण का केंद्र

स्थापना दिवस समारोह में आयोजित होने वाला भक्तामर स्तोत्र पाठ एवं 48 दीपों की महाआरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।भक्तामर स्तोत्र जैन धर्म की अत्यंत लोकप्रिय एवं चमत्कारिक स्तुतियों में से एक माना जाता है। इसके सामूहिक पाठ से वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाता है।

पंडित योगेंद्र काला जी के निर्देशन में होंगे सभी धार्मिक कार्यक्रम

आयोजकों के अनुसार स्थापना दिवस के समस्त धार्मिक कार्यक्रम पंडित योगेंद्र काला जी के निर्देशन में संपन्न होंगे। उनके मार्गदर्शन में अभिषेक, पूजन, भक्तामर पाठ एवं महाआरती को विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराया जाएगा।

समस्त दिगंबर जैन समाज को सपरिवार आमंत्रण

श्री आदिनाथ दिगंबर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट, छत्रपति नगर, इंदौर ने समस्त दिगंबर जैन समाज से सपरिवार पधारकर भगवान आदिनाथ के अभिषेक, पूजन, भक्तामर स्तोत्र पाठ एवं महाआरती में सहभागिता करने की विनम्र अपील की है।ट्रस्ट का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में एकता, संस्कार एवं आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं।

निष्कर्ष

श्री आदिनाथ जिनालय स्थापना दिवस 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का महापर्व है। वर्ष के अंतिम महा मस्तकाभिषेक, भक्तामर स्तोत्र पाठ एवं महाआरती के माध्यम से श्रद्धालुओं को दुर्लभ पुण्य अर्जित करने का अवसर प्राप्त होगा। छत्रपति नगर का यह भव्य आयोजन निश्चित रूप से जैन समाज के लिए एक यादगार आध्यात्मिक उत्सव सिद्ध होगा।

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