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Chhattisgarh Paddy Lifting Delay: मानसून से पहले 10.76 लाख क्विंटल धान खुले में, करोड़ों के नुकसान की आशंका

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Published On: 1 June 2026
Chhattisgarh

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चार महीने बाद भी नहीं हुआ धान का पूरा उठाव

Chhattisgarh में धान खरीदी समाप्त हुए लगभग चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। प्रदेश के 31 जिलों में लगभग 10.76 लाख क्विंटल धान अब भी खरीदी केंद्रों में खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। इस धान की अनुमानित कीमत 333 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

धान उठाव में हो रही देरी ने प्रशासन, समितियों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मानसून के नजदीक आने के साथ यह आशंका और गहरी हो गई है कि यदि समय पर उठाव पूरा नहीं हुआ, तो भारी मात्रा में धान बारिश की भेंट चढ़ सकता है।

बस्तर संभाग में सबसे गंभीर स्थिति

प्रदेश में सबसे गंभीर स्थिति बस्तर संभाग की बताई जा रही है, जहां धान उठाव को लेकर स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यहां लगभग 4 लाख 56 हजार क्विंटल धान अब भी विभिन्न खरीदी केंद्रों में खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है, जो करीब 200 खरीदी केंद्रों में संग्रहित है। समर्थन मूल्य के आधार पर इस धान की अनुमानित कीमत लगभग 141 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो राज्य की बड़ी आर्थिक संपत्ति को दर्शाती है।

कई स्थानों पर इस धान को केवल तिरपाल के सहारे ढककर सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। कई केंद्रों पर सुरक्षा के भी उचित इंतजाम नहीं हैं, जिससे धान के खराब होने या नुकसान का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते धान का परिवहन नहीं हुआ और बारिश शुरू हो गई, तो पूरी फसल की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है और बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।

तय समय सीमा के बाद भी पूरा नहीं हुआ उठाव

प्रशासन ने धान उठाव के लिए 165 राइस मिलर्स को जिम्मेदारी सौंपी थी। शुरुआत में 31 मार्च तक धान उठाने की समय सीमा तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मई कर दिया गया। इसके बावजूद अब तक पूरी मात्रा का उठाव नहीं हो सका है।

कई खरीदी केंद्रों में धान लंबे समय से पड़ा हुआ है, जिससे उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कुछ जगहों पर धान सूखने लगा है, तो कुछ स्थानों पर नमी बढ़ने से अनाज की स्थिति खराब हो रही है।

राजनांदगांव सहित कई जिलों में भी देरी

बस्तर के अलावा अन्य जिलों में भी धान उठाव की गति धीमी है। राजनांदगांव जिले में स्थिति अपेक्षाकृत चिंताजनक बनी हुई है। जिले की 96 समितियों में से 79 समितियों में अभी भी लगभग 56 हजार क्विंटल धान पड़ा हुआ है, जिसकी कीमत लगभग 17 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

फरवरी से मई के बीच कई बार मौसम में बदलाव और बेमौसम बारिश के कारण धान को नुकसान पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। किसानों का कहना है कि समय पर उठाव न होने के कारण उनकी मेहनत पर असर पड़ रहा है।

राइस मिलर्स और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर सवाल

छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन का कहना है कि धान उठाव में देरी का एक बड़ा कारण ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की समस्या है। बस्तर क्षेत्र में एक साथ बड़ी संख्या में डिलीवरी ऑर्डर जारी किए जाने से वाहनों की कमी हो गई है।

इसके अलावा नान गोदाम और निजी गोदामों में पर्याप्त जगह न होने से भी धान के भंडारण में समस्या आ रही है। लंबी दूरी वाले इलाकों में धान पहुंचाने के लिए भारी वाहनों की जरूरत होती है, लेकिन समय पर ट्रांसपोर्ट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

एसोसिएशन के अनुसार प्रशासन ने कई बार निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर संसाधनों की कमी के कारण काम की गति प्रभावित हो रही है।

15 जून तक उठाव पूरा करने का दावा

राइस मिलर्स ने दावा किया है कि वे 15 जून तक शेष बचे धान का उठाव हर हाल में पूरा कर लेंगे। हालांकि, मानसून की नजदीकी और मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए प्रशासन की चिंता बनी हुई है।

यदि समय रहते परिवहन और भंडारण पूरा नहीं होता है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

बारिश का खतरा बढ़ा, गुणवत्ता पर संकट

मानसून की दस्तक के साथ ही खुले में रखे धान पर सबसे बड़ा खतरा बारिश का मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि धान लंबे समय तक नमी और बारिश के संपर्क में रहता है, तो उसकी गुणवत्ता तेजी से गिर सकती है।

इसका सीधा असर चावल उत्पादन, सरकारी भंडारण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ सकता है। खराब धान के कारण राज्य को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान होने की आशंका भी जताई जा रही है।

किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून के समय ऐसी स्थिति सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान पर ध्यान नहीं दिया जाता।

प्रशासन और समितियों पर बढ़ता दबाव

धान उठाव में देरी के कारण अब प्रशासन, मार्कफेड और राइस मिलर्स सभी पर दबाव बढ़ गया है। खरीदी केंद्रों में जमा भारी मात्रा में धान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

स्थानीय स्तर पर समितियों का कहना है कि संसाधनों की कमी और समन्वय की कमी के कारण काम प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता और सवाल

ग्रामीण क्षेत्रों में लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि हर साल मानसून की निश्चित अवधि होने के बावजूद धान परिवहन और भंडारण की बेहतर योजना क्यों नहीं बनाई जाती।

किसानों का कहना है कि यदि समय पर व्यवस्था मजबूत होती, तो इतनी बड़ी मात्रा में धान खुले में नहीं रहता और नुकसान की आशंका भी कम होती।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में धान उठाव में हो रही देरी अब गंभीर समस्या का रूप ले चुकी है। 10.76 लाख क्विंटल धान खुले में पड़ा होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाता है, बल्कि आने वाले मानसून में बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका भी पैदा करता है।

अब सभी की नजर 15 जून की समय सीमा और मानसून की चाल पर टिकी हुई है। यदि समय रहते धान का उठाव पूरा नहीं हुआ, तो इसका असर राज्य की कृषि व्यवस्था, भंडारण प्रणाली और किसानों की आय पर पड़ सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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