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बैरोनेस शमा जैन शाह ने रचा इतिहास: ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में पहली जैन सांसद नियुक्त, समणसुत्तं पर ली शपथ

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Published On: 31 May 2026
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बैरोनेस शमा जैन शाह ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में नियुक्त होने वाली पहली जैन सांसद बनीं। समणसुत्तं पर शपथ लेकर उन्होंने जैन धर्म, अहिंसा और अनेकांत का संदेश विश्व मंच तक पहुंचाया।

बैरोनेस शमा जैन शाह ने रचा इतिहास: ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में पहली जैन सांसद नियुक्त

बैरोनेस शमा जैन शाह: ब्रिटेन की संसद में जैन समाज का ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व

बैरोनेस शमा जैन शाह के ब्रिटेन के प्रतिष्ठित हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सदस्य नियुक्त होने के साथ ही विश्व जैन समाज के लिए एक नया इतिहास रच गया है। भारतीय मूल की जैन बैरिस्टर शमा जैन शाह ब्रिटिश संसद के लगभग 700 वर्षों के इतिहास में जैन समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली सदस्य बन गई हैं।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह उपलब्धि केवल ब्रिटेन में रह रहे जैन समाज के लिए ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतवर्षीय जैन समाज के लिए गौरव का विषय है।

समणसुत्तं पर शपथ लेकर रचा इतिहास

शपथ ग्रहण समारोह का सबसे भावुक और ऐतिहासिक क्षण वह रहा जब बैरोनेस शमा जैन शाह ने जैन धर्म के पवित्र ग्रंथ “समणसुत्तं” को हाथ में लेकर शपथ ग्रहण की।हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सामान्यतः बाइबिल, कुरान और भगवद्गीता पर शपथ ली जाती है, लेकिन पहली बार जैन धर्म के ग्रंथ समणसुत्तं पर शपथ लेकर उन्होंने एक नई परंपरा की शुरुआत की।शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने कहा—“भगवान महावीर के अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह के सिद्धांत मेरी राजनीति की नींव होंगे।”

यह वक्तव्य जैन दर्शन को वैश्विक लोकतांत्रिक मंच तक पहुंचाने वाला माना जा रहा है।

कौन हैं बैरोनेस शमा जैन शाह

बैरोनेस शमा जैन शाह मूल रूप से गुजरात के एक प्रतिष्ठित जैन परिवार से संबंध रखती हैं।वे लंदन की प्रमुख मानवाधिकार बैरिस्टर हैं और पिछले दो दशकों से:

  • महिला अधिकारों
  • धार्मिक स्वतंत्रता
  • अल्पसंख्यक अधिकारों
  • सामाजिक न्याय

के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय द्वारा उन्हें “Baroness Shama Jain Shah of Leicester” की उपाधि प्रदान की गई।

जैन सिद्धांतों को मिला वैश्विक मंच

Institute of Jainology UK के निदेशक ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि—“यह क्षण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिटेन ने स्वीकार किया है कि जैन धर्म की 2600 वर्ष पुरानी विरासत आधुनिक लोकतंत्र को दिशा देने में सक्षम है।”उन्होंने इसे “विकास भी, विरासत भी” की अवधारणा का वास्तविक उदाहरण बताया।

भारत सरकार ने दी बधाई

भारत सरकार ने भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की।प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि—“यह भारत की श्रमण संस्कृति, जैन परंपरा और बेटियों की शक्ति का सम्मान है।”विदेश मंत्रालय ने भी इसे सांस्कृतिक कूटनीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

जैन समाज में उत्सव का माहौल

अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा सहित विभिन्न देशों के जैन सेंटरों में इस अवसर पर खुशी का माहौल देखने को मिला।अनेक स्थानों पर“अहिंसा परमो धर्मः”के उद्घोष के साथ समारोह आयोजित किए गए।दिगम्बर, श्वेताम्बर और तेरापंथ सहित सभी जैन संप्रदायों ने इसे सम्पूर्ण जैन समाज का गौरव बताया।

इंदौर जैन समाज ने जताया गौरव

इंदौर सहित देशभर के जैन समाज के गणमान्य नागरिकों ने बैरोनेस शमा जैन शाह को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।बधाई देने वालों में प्रमुख रूप से:

  • डॉ. जैनेन्द्र जैन
  • अमित कासलीवाल
  • आनंद नवीन गोधा
  • मंयक जैन
  • राजेश जैन दद्दू
  • सुशील पांड्या
  • हंसमुख गांधी
  • टीके वेद
  • मनोहर झांझरी
  • डीके जैन
  • डीएसपी
  • श्रीमती पुष्पा कासलीवाल
  • श्रीमती मुक्ता जैन
  • श्रीमती साधना दगडे
  • श्रीमती रेखा जैन
  • श्रीफल
  • हर्ष जैन

ने कहा कि यह सम्पूर्ण भारतवर्षीय जैन समाज, जैन संस्कृति और श्रमण परंपरा के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

निष्कर्ष

बैरोनेस शमा जैन शाह का ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में पहुंचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है बल्कि जैन दर्शन, अहिंसा, अनेकांत और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी और विश्व मंच पर जैन समाज की पहचान को और मजबूत बनाएगी।

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