58वां श्री वीतराग-विज्ञान आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर ढाईद्वीप जिनायतन Indore में आयोजित। पण्डित बिपिन शास्त्री, मुंबई ने समयसार के माध्यम से आत्मा, द्रव्य और पर्याय के गूढ़ रहस्यों का सरल विवेचन किया।
58वां श्री वीतराग-विज्ञान आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर में ज्ञानगंगा का प्रवाह
Indore। 58वां श्री वीतराग-विज्ञान आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर इन दिनों ढाईद्वीप जिनायतन, Indore में आध्यात्मिक जागरण का केन्द्र बना हुआ है। सन् 1969 से आध्यात्मिक सत्पुरुष श्री कानजीस्वामी के प्रभावनायोग में पण्डित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर द्वारा संचालित शिविरों की गौरवशाली श्रृंखला का यह 58वां आयोजन है, जो 17 मई से प्रारम्भ होकर 3 जून तक चलेगा।
देशभर से आए सैकड़ों साधर्मीजन, जिज्ञासु एवं 100 से अधिक जैनदर्शन के अधिकारी विद्वान इस शिविर में सहभागिता कर रहे हैं। भीषण गर्मी के बावजूद ढाईद्वीप जिनायतन में धर्म, दर्शन और आत्मचिंतन की शीतल धारा प्रवाहित हो रही है।
ढाईद्वीप Indoreबना आध्यात्मिक साधना का केन्द्र
58वां श्री वीतराग-विज्ञान आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर प्रतिदिन प्रातःकाल से रात्रि तक विविध आध्यात्मिक गतिविधियों से जीवंत बना हुआ है। यहां आध्यात्मिक सत्पुरुष श्री कानजीस्वामी के दिव्य प्रवचनों का श्रवण कराया जा रहा है।
शिविर में चार प्रमुख प्रवचन, सात विषयगत कक्षाएं, पांच प्रशिक्षण सत्र, मोक्षमार्ग विषयक विशेष व्याख्यान, अभ्यास वर्ग, बाल संस्कार कक्षाएं, समूह चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्रों का आयोजन किया जा रहा है।
समयसार के गूढ़ रहस्यों पर हुआ चिंतन
मीडिया प्रभारी प्रवीण जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि आज के मुख्य कार्यक्रम में आध्यात्मिक सत्पुरुष श्री कानजीस्वामी के समयसार विषयक अमृतमय प्रवचन का श्रवण कराया गया।
प्रवचन में आत्मा की स्वतंत्र सत्ता, जीव-अजीव का भेद, द्रव्य और पर्याय के गूढ़ रहस्यों का अत्यंत प्रभावशाली निरूपण किया गया। उपस्थित साधक आत्मचिंतन और तत्त्वज्ञान के गहन अध्ययन में निमग्न दिखाई दिए।
पण्डित बिपिन शास्त्री ने समझाया आत्मा का वास्तविक स्वरूप
मुंबई के विद्वान वक्ता पण्डित बिपिन शास्त्री ने समयसार के सूत्रों का सरल, तार्किक एवं मार्मिक विवेचन प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा—
“द्रव्य का परिचय पर्याय में होता है, किन्तु द्रव्य पर्याय में नहीं होता।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मा अपने ज्ञान-दर्शनादि परिणामों से जानी जाती है, किन्तु उसका वास्तविक स्वरूप उन परिणामों से परे शुद्ध चैतन्य द्रव्य है।
द्रव्य और पर्याय का भेद-विज्ञान
पण्डित बिपिन शास्त्री ने अपने प्रवचन में बताया कि जीव किसी का कार्य नहीं है, किसी से उत्पन्न नहीं हुआ है और न ही वह किसी अन्य पदार्थ का कर्ता है। आत्मा एक स्वतंत्र सत्ता है।उन्होंने कहा कि आत्मा और पर्याय के भेद को समझना सम्यग्दर्शन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यही भेद-विज्ञान मोक्षमार्ग का वास्तविक प्रवेशद्वार है।
“मैं पर्याय नहीं, शुद्ध आत्मा हूँ”
अपने ओजस्वी प्रवचन में पण्डित बिपिन शास्त्री ने कहा कि यदि साधक इस एक तथ्य को यथार्थ रूप में समझ ले कि—“मैं पर्याय नहीं, शुद्ध आत्मा हूँ”तो केवल वर्तमान मनुष्य भव ही नहीं बल्कि अनन्त भवों का कल्याण संभव हो सकता है।उन्होंने साधर्मियों को आत्मचिंतन, स्वानुभूति और वीतराग विज्ञान के अध्ययन की ओर प्रेरित किया।
देशभर से पहुंचे साधक कर रहे हैं सहभागिता
58वां श्री वीतराग-विज्ञान आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर Indore में देशभर से आए साधक धर्म, अध्यात्म और तत्त्वज्ञान की अमूल्य निधि का लाभ ले रहे हैं।भीषण गर्मी के बीच ढाईद्वीप जिनायतन ज्ञान, साधना, संस्कार और आत्मकल्याण का अनुपम केन्द्र बनकर उभरा है, जहां प्रतिदिन ज्ञानगंगा प्रवाहित हो रही है।

