Indore से महू-देवास तक सौर ऊर्जा का विस्तार, रेलवे को ₹1.84 करोड़ की बचत; रतलाम मंडल ने हासिल की बड़ी उपलब्धि
Indore डिपो से लेकर महू और देवास तक अब सौर ऊर्जा की चमक दिखाई देने लगी है। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसके तहत रेलवे भवनों की छतों पर लगाए गए सोलर पैनलों से बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन किया जा रहा है। इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि रेलवे को करोड़ों रुपये की आर्थिक बचत भी हुई है।
यह प्रयास रेलवे की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता को और कम करने में मदद करेगा।
सौर ऊर्जा उत्पादन में बड़ी उपलब्धि
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान रतलाम मंडल द्वारा लगभग 35.53 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया गया। इस उत्पादन के आधार पर रेलवे को करीब ₹1.84 करोड़ की बचत हुई है।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि योजनाबद्ध तरीके से नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया जाए, तो न केवल खर्च में कमी लाई जा सकती है बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।
रेलवे भवनों की छतों पर लगाए गए सोलर पैनल
रतलाम मंडल के विभिन्न रेलवे परिसरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं। इनमें इंदौर कोचिंग डिपो, मुख्य स्टेशन भवन, आरक्षण कार्यालय, रेलवे हॉस्टल, डॉ. आंबेडकर नगर (महू) का नवीन स्टेशन भवन और प्लेटफार्म कवर शेड, देवास स्टेशन भवन, लीमखेड़ा और मंगलमहुड़ी स्टेशन शामिल हैं।
इन स्थानों पर स्थापित सोलर सिस्टम लगातार बिजली उत्पादन कर रहे हैं, जिससे रेलवे की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा पूरा किया जा रहा है।
कुल 3299 किलोवाट क्षमता का सोलर नेटवर्क
वर्तमान में रतलाम मंडल के विभिन्न स्थानों पर लगभग 3299 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। इन पैनलों से वर्ष 2025-26 में 35.53 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन संभव हुआ है।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में इस क्षमता को और बढ़ाने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक स्थानों पर सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा सके।
आठ नए स्थानों पर सोलर सिस्टम शुरू
वर्ष 2025-26 में ही मंडल के आठ अलग-अलग स्थानों पर कुल 388 किलोवाट क्षमता के नए सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। इन परियोजनाओं के तहत कई महत्वपूर्ण रेलवे परिसरों को शामिल किया गया है।
इन स्थानों में इंदौर कोचिंग डिपो, मुख्य स्टेशन भवन, आरक्षण कार्यालय, रेलवे हॉस्टल, डॉ. आंबेडकर नगर (महू) का नया स्टेशन भवन और प्लेटफार्म शेड, देवास स्टेशन, लीमखेड़ा और मंगलमहुड़ी स्टेशन शामिल हैं।
इन नए सोलर संयंत्रों से बिजली उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह पहल केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण भी है। सौर ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव घटता है।
इससे रेलवे प्रणाली अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बन रही है।
योजनाबद्ध प्रयासों से मिली सफलता
मंडल रेल प्रबंधक अश्विनी कुमार और वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (पावर) लेफ्टिनेंट डीके प्रजापति के निर्देशन में यह पूरा प्रोजेक्ट संचालित किया जा रहा है। बिजली विभाग द्वारा पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे भी जारी रहेगी।
अन्य संस्थानों में भी सौर ऊर्जा का उपयोग
रतलाम मंडल के केवल रेलवे स्टेशन ही नहीं, बल्कि मरम्मत इकाइयों, रेलवे अस्पतालों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों में भी सोलर सिस्टम पहले से ही कार्यरत हैं। इन स्थानों पर भी नियमित रूप से बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
इससे रेलवे के कुल ऊर्जा खर्च में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर रेलवे
पश्चिम रेलवे का रतलाम मंडल अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा के उपयोग से न केवल बिजली बिलों में भारी बचत हो रही है, बल्कि यह रेलवे की कार्यप्रणाली को अधिक आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बना रहा है।
भविष्य की योजना
रेलवे प्रशासन की योजना है कि आने वाले वर्षों में और अधिक रेलवे परिसरों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। इसके तहत नए स्टेशन, डिपो और कार्यालयों में भी रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाएंगे।
इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रेलवे पूरी तरह हरित ऊर्जा की दिशा में अग्रसर हो सकेगा।
निष्कर्ष
Indore से लेकर महू और देवास तक फैली यह सौर ऊर्जा परियोजना रेलवे के लिए एक बड़ी सफलता है। ₹1.84 करोड़ की बचत और लाखों यूनिट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन इस बात का प्रमाण है कि नवीकरणीय ऊर्जा भविष्य की जरूरत ही नहीं बल्कि वर्तमान की मजबूरी भी है।
रतलाम मंडल की यह पहल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जिससे देशभर में सौर ऊर्जा के उपयोग को और बढ़ावा मिलेगा।
