Indore में पेयजल को लेकर बड़ा विवाद: 90% पानी पीने लायक नहीं, कांग्रेस ने रिपोर्ट जारी कर लगाए गंभीर आरोप
Indore , जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, अब पेयजल की गुणवत्ता को लेकर बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक लैब रिपोर्ट जारी करते हुए दावा किया है कि शहर का करीब 90 प्रतिशत से अधिक पानी पीने योग्य नहीं है। उनके अनुसार, कई इलाकों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई और कोलीफोर्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो आमतौर पर मल में मौजूद होते हैं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
इस मुद्दे ने शहर की स्वच्छता और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
259 पेज की लैब रिपोर्ट जारी
शुक्रवार को Indore में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान जीतू पटवारी ने कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर 259 पेज की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की। इस रिपोर्ट में इंदौर के विभिन्न इलाकों से लिए गए पेयजल नमूनों की जांच के परिणाम शामिल हैं।
कांग्रेस के अनुसार, यह जांच देश की एक स्वतंत्र और आधुनिक लैब में करवाई गई थी। रिपोर्ट तैयार करने के लिए फरवरी महीने में 26 दिनों तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं और लैब कर्मचारियों ने मिलकर शहर के अलग-अलग हिस्सों से पानी के नमूने एकत्र किए थे।
हर नमूने के साथ जियो-टैगिंग और वीडियोग्राफी भी की गई ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सात विधानसभा क्षेत्रों से 240 नमूने
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंदौर नगर निगम सीमा के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा क्षेत्रों के अलग-अलग वार्डों से कुल 240 पानी के नमूने लिए गए थे।
इनमें पॉश कॉलोनियों जैसे रेसकोर्स रोड, संजना पार्क और पत्रकार कॉलोनी के साथ-साथ सुदामा नगर, स्कीम 71, गुमाश्ता नगर, स्कीम 51 जैसे मध्यम वर्गीय इलाके भी शामिल हैं। इसके अलावा पुराने शहर के क्षेत्र जैसे हुकुमचंद मार्ग, नलियाबाखल और बियाबानी तथा कंडीलपुरा और नया बसेरा जैसी बस्तियों से भी नमूने लिए गए।
कांग्रेस का दावा है कि इन क्षेत्रों से लिए गए अधिकांश नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे और पेयजल की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई।
खतरनाक बैक्टीरिया और स्वास्थ्य जोखिम का दावा
कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि पानी में ई-कोलाई और कोलीफोर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने दावा किया कि ये बैक्टीरिया आमतौर पर मल में पाए जाते हैं और इनके कारण गंभीर जलजनित बीमारियां फैल सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पानी में धातु, घुलनशील खनिज और अन्य अशुद्ध तत्व भी मानक से अधिक मात्रा में पाए गए हैं। इससे अस्थमा, किडनी से जुड़ी बीमारियां और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह स्थिति शहर के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
सरकार और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप
पत्रकार वार्ता में जीतू पटवारी ने राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “ट्रिपल इंजन सरकार” अब “ट्रिपल अराजक सरकार” में बदल गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शहर के महापौर और नगर निगम आयुक्त नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं। पटवारी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को शहर की समस्याओं की कोई परवाह नहीं है और वे इस गंभीर मुद्दे पर मौन हैं।
उन्होंने यह तक कहा कि यदि स्थिति इतनी खराब है, तो ऐसे जनप्रतिनिधियों को स्वयं इस दूषित पानी की वास्तविकता का सामना करना चाहिए।
मुख्यमंत्री पर सीधा हमला
कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पर भी सीधा निशाना साधा और कहा कि उन्हें इंदौर के पेयजल का स्वतंत्र ऑडिट कराना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे शहर के उन इलाकों में जाकर वहां का पानी स्वयं पीकर दिखाएं, जहां पानी को दूषित बताया जा रहा है।
पटवारी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं, इसलिए शहर की स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी उनकी अधिक बनती है, लेकिन इसके बजाय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
विकास और प्रशासन पर भी उठे सवाल
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि शहर में विकास कार्यों के नाम पर अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने छावनी और जिंसी क्षेत्र में तोड़फोड़ की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि कहीं मुआवजा दिया जा रहा है, तो कहीं बिना मुआवजे के लोगों के घर और दुकानें तोड़ी जा रही हैं।
इससे प्रशासन की कार्यशैली और नीतियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है, तो शहर के दूषित पेयजल मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
Indore के पेयजल को लेकर जारी यह रिपोर्ट शहर की स्वच्छता की छवि के विपरीत गंभीर सवाल खड़े करती है। जहां एक तरफ इंदौर को स्वच्छता में देश का नंबर-1 शहर माना जाता है, वहीं दूसरी ओर पेयजल की गुणवत्ता पर उठे ये आरोप चिंता का विषय बन गए हैं।
अब सभी की नजरें प्रशासन और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद की सच्चाई और समाधान की दिशा तय करेगी।
