MP Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश के 58 हजार शिक्षकों के तबादले फिलहाल रोके गए, फरवरी 2027 तक नहीं होंगे ट्रांसफर
प्रदेश के शिक्षकों को लेकर बड़ा फैसला
MP सरकार ने सरकारी शिक्षकों के तबादलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के करीब 58 हजार शिक्षकों के ट्रांसफर फिलहाल होल्ड पर रख दिए गए हैं। लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इन शिक्षकों का तबादला फरवरी 2027 तक नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद हजारों शिक्षकों की उम्मीदों को झटका लगा है, जो लंबे समय से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे थे।
सरकार का कहना है कि फिलहाल इन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है, इसलिए प्रशासनिक कारणों से इनके तबादले रोक दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य के दौरान शिक्षकों का स्थानांतरण करने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर अपलोड होगी शिक्षकों की जानकारी
लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 1 जून 2026 तक प्रदेश के सभी शिक्षकों का पूरा विवरण एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर अपलोड किया जाना है। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग को हर स्कूल में कार्यरत शिक्षकों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने स्कूलवार और विषयवार शिक्षकों की एंट्री सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही ऐसे शिक्षकों के नाम सूची से हटाने के निर्देश दिए गए हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो रिटायर हो चुके हैं।
सरकार का उद्देश्य शिक्षकों के डेटा को पूरी तरह अपडेट करना है, ताकि भविष्य में ट्रांसफर प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से की जा सके।
जनगणना ड्यूटी के कारण रोके गए तबादले
आयुक्त कार्यालय के पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है, उनके ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे। विभाग का मानना है कि जनगणना राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण कार्य है और इसमें लगे कर्मचारियों का स्थिर रहना जरूरी है।
इसी कारण से फिलहाल 58 हजार शिक्षकों के स्थानांतरण पर रोक लगाई गई है। संभावना जताई जा रही है कि फरवरी 2027 के बाद विभाग नई नीति बनाकर ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
30 मई को होगी जिलेवार समीक्षा
स्कूल शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू करने से पहले प्रदेशभर के शिक्षकों की पोस्टिंग का पूरा ब्योरा मांगा है। लोक शिक्षण आयुक्त 30 मई को जिलेवार समीक्षा करेंगे। इस समीक्षा में यह देखा जाएगा कि किन स्कूलों में कितने शिक्षक कार्यरत हैं और कहां स्टाफ की कमी या अधिकता है।
विभाग का कहना है कि यह प्रक्रिया ट्रांसफर में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए शुरू की गई है। कई बार गलत आंकड़ों या अधूरी जानकारी के कारण ट्रांसफर प्रक्रिया विवादों में आ जाती है। ऐसे में इस बार पहले डेटा अपडेट करने पर जोर दिया जा रहा है।
1 जून से शुरू होगा ट्रांसफर सीजन
MP सरकार ने 22 मई को ट्रांसफर पॉलिसी 2026 जारी की थी। इसके तहत 1 जून से 15 जून तक सरकारी विभागों में तबादलों की प्रक्रिया चलेगी। सभी विभागों को अपने अधिकारियों और कर्मचारियों का विवरण तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
कुछ विभागों ने ट्रांसफर की तारीखों की घोषणा भी कर दी है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं और विभागीय अधिकारियों से रिक्त पदों और आवश्यकताओं का ब्यौरा मांगा जा रहा है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने भी जारी किए निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने जानकारी दी है कि कॉन्स्टेबल से लेकर सब इंस्पेक्टर स्तर तक के तबादले 5 जून तक किए जाएंगे। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने संविदा कर्मचारियों के ट्रांसफर के लिए 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रस्ताव ऑनलाइन माध्यम से भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो सके।
किन अधिकारियों पर लागू नहीं होगी ट्रांसफर पॉलिसी
MP सरकार द्वारा जारी ट्रांसफर नीति IAS, IPS और IFS अधिकारियों पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, वन सेवा और मंत्रालय सेवा के अधिकारियों को भी इस नीति से बाहर रखा गया है।
यह नीति मुख्य रूप से राज्य और जिला स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों के लिए लागू की गई है।
बड़े विभाग बना सकेंगे अलग नीति
सरकार ने बड़े विभागों को जरूरत के अनुसार अलग ट्रांसफर नीति बनाने की अनुमति दी है। हालांकि इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की मंजूरी आवश्यक होगी।
विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद ही विशेष परिस्थितियों में तबादले किए जा सकेंगे।
विशेष मामलों में जरूरी होगी मुख्यमंत्री की मंजूरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ट्रांसफर नीति से बाहर होने वाले मामलों में मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी। सामान्य ट्रांसफर अवधि खत्म होने के बाद केवल विशेष परिस्थितियों में ही स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
सीएम कार्यालय के हाई प्रायोरिटी मामलों में विशेष ट्रांसफर की अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा लंबित A+ श्रेणी के मामलों का भी तय समय में निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला स्तर पर कलेक्टर करेंगे निर्णय
डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदार जैसे अधिकारियों की पोस्टिंग का निर्णय कलेक्टर स्तर पर लिया जाएगा। जिला संवर्ग और तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के भीतर ट्रांसफर का अधिकार भी कलेक्टर को दिया गया है।
हालांकि इसके लिए संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी जरूरी होगी। आदेश जिला अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे।
शिक्षकों में बढ़ी चिंता और इंतजार
58 हजार शिक्षकों के ट्रांसफर रुकने के बाद कई शिक्षकों में निराशा देखी जा रही है। लंबे समय से स्थानांतरण की उम्मीद लगाए बैठे शिक्षकों को अब फरवरी 2027 तक इंतजार करना पड़ सकता है।
हालांकि विभाग का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक जरूरतों और जनगणना कार्य को देखते हुए लिया गया है। भविष्य में नई नीति के तहत ट्रांसफर प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी।
