Raipur Gold Scam: मंत्रा गोल्ड से करोड़ों का सोना और नकदी लेकर फरार हुआ कर्मचारी,
रायपुर के सराफा बाजार में मचा हड़कंप
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में करोड़ों रुपये के Gold गबन का मामला सामने आने के बाद सराफा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित मंत्रा गोल्ड नामक संस्था के एक कर्मचारी पर 1600 ग्राम से अधिक सोना और व्यापारियों से वसूली गई रकम लेकर फरार होने का आरोप लगा है। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है और आरोपी की तलाश के लिए कई टीमों को सक्रिय किया गया है।
इस मामले ने रायपुर के सराफा बाजार में भरोसे और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से भरोसे पर आधारित इस कारोबार में अब अतिरिक्त निगरानी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता महसूस होने लगी है।
छह वर्षों से संस्था में कार्यरत था आरोपी
मामले की शिकायत महावीर नगर निवासी प्रदीप बजाज ने कोतवाली थाने में दर्ज कराई है। प्रदीप बजाज सदर बाजार स्थित नाहटा मार्केट में संचालित मंत्रा गोल्ड संस्था के पार्टनर हैं।
एफआईआर के अनुसार आरोपी अरुण यादव वर्ष 2019 से संस्था में कार्यरत था। धीरे-धीरे उसने संस्था के भीतर भरोसेमंद कर्मचारी की छवि बना ली थी। उसे व्यापारियों के बीच सोने की डिलीवरी, रकम की वसूली और लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गए थे।
कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि अरुण यादव को लंबे समय से संवेदनशील जिम्मेदारियां दी जा रही थीं। संस्था के संचालकों को उस पर पूरा भरोसा था और इसी कारण उसे बिना किसी विशेष निगरानी के बड़े स्तर के काम सौंपे जाते थे।
स्टॉक मिलान में खुला करोड़ों का खेल
मामले का खुलासा अप्रैल 2026 में हुए स्टॉक मिलान के दौरान हुआ। संस्था के कर्मचारियों ने जब रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का मिलान किया तो भारी गड़बड़ी सामने आई।
जांच में लगभग 1250 ग्राम सोने के जेवर और करीब 350 ग्राम शुद्ध सोना गायब पाया गया। इसके अलावा व्यापारियों से वसूली गई रकम का हिसाब भी रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था। शुरुआती अनुमान के अनुसार गबन की राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।
स्टॉक में गड़बड़ी सामने आने के बाद संस्था के संचालकों ने आरोपी अरुण यादव से पूछताछ की। इस दौरान उसने दावा किया कि कुछ सोना उसके घर पर रखा हुआ है और वह तुरंत लेकर आता है।
भरोसे का फायदा उठाकर हुआ फरार
संस्था के लोगों ने वर्षों पुराने भरोसे के चलते आरोपी को घर जाने की अनुमति दे दी। लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटा।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक शुरुआत में आरोपी फोन पर बहाने बनाता रहा और कहता रहा कि वह जल्द लौट आएगा। बाद में उसका मोबाइल फोन बंद हो गया और उससे संपर्क पूरी तरह टूट गया।
जब काफी समय तक अरुण यादव वापस नहीं आया तो संस्था के लोग उसके घर पहुंचे। वहां परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
परिवार पर भी लगे गंभीर आरोप
संस्था की ओर से दर्ज शिकायत में आरोपी के पिता राम समुझ यादव और पत्नी निशा यादव पर भी सहयोग करने और जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि परिवार के सदस्यों ने आरोपी की लोकेशन छिपाने की कोशिश की और जांच में सहयोग नहीं किया। हालांकि पुलिस ने अभी तक परिवार की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने शुरू की व्यापक जांच
कोतवाली थाना पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद जांच तेज कर दी है। पुलिस की कई टीमें आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
जांच के दौरान पुलिस आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जानकारी जुटा रही है। साइबर सेल की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने फरार होने से पहले किन लोगों से संपर्क किया था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक अपराध से जुड़े पहलुओं को भी गंभीरता से जांचा जा रहा है। इस मामले में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं आरोपी ने किसी बड़े नेटवर्क के साथ मिलकर यह योजना तो नहीं बनाई थी।
सराफा कारोबार में बढ़ी चिंता
घटना के बाद रायपुर के सराफा कारोबारियों में चिंता का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं व्यापारिक विश्वास को नुकसान पहुंचाती हैं।
कई व्यापारियों ने कहा कि लंबे समय से सराफा कारोबार भरोसे पर चलता आया है, लेकिन अब समय बदल गया है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी हो गया है।
कुछ व्यापारियों का मानना है कि कर्मचारियों की नियमित पृष्ठभूमि जांच, डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम और सीसीटीवी निगरानी को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना और नकदी की जिम्मेदारी एक ही कर्मचारी को कैसे सौंप दी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि सराफा कारोबार में जोखिम हमेशा अधिक रहता है और इसलिए मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग सिस्टम होना जरूरी है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइन तैयार की जानी चाहिए।
कारोबारी संगठनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
रायपुर के कई सराफा व्यापारिक संगठनों ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
कारोबारियों का कहना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे व्यापारिक माहौल प्रभावित हो सकता है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष और तेज जांच की मांग की है।
कुछ व्यापारियों ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से ग्राहकों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ सकता है।
आर्थिक अपराध के एंगल से भी जांच
पुलिस इस मामले को केवल चोरी या गबन के रूप में नहीं देख रही, बल्कि आर्थिक अपराध के तौर पर भी जांच कर रही है।
अधिकारियों का मानना है कि आरोपी ने यदि लंबे समय तक योजनाबद्ध तरीके से सोना और रकम गायब की है तो यह एक संगठित आर्थिक अपराध भी हो सकता है।
इसके लिए बैंकिंग लेनदेन, संपत्ति रिकॉर्ड और संदिग्ध खातों की भी जांच की जा रही है।
डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने फरार होने से पहले किसी बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन को अंजाम तो नहीं दिया।
साइबर विशेषज्ञों की मदद से मोबाइल डेटा, ई-वॉलेट, यूपीआई ट्रांजैक्शन और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की जा रही है।
इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी ने गबन की रकम कहां ट्रांसफर की और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने इसमें उसकी मदद की।
बाजार में अविश्वास का माहौल
घटना के बाद रायपुर के सराफा बाजार में अविश्वास का माहौल बन गया है। कई व्यापारी अब कर्मचारियों को संवेदनशील जिम्मेदारियां देने में सतर्कता बरत रहे हैं।
कुछ व्यापारियों ने अपने यहां आंतरिक ऑडिट शुरू कर दिया है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी समय रहते पकड़ में आ सके।
पुलिस को जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और आरोपी के संभावित ठिकानों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ उसकी संपत्तियों की भी जांच की जा सकती है।
निष्कर्ष
रायपुर में सामने आया यह गोल्ड स्कैम केवल एक गबन का मामला नहीं, बल्कि व्यापारिक सुरक्षा और भरोसे पर बड़ा सवाल है। वर्षों से भरोसे पर चल रहे सराफा कारोबार में अब सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
मंत्रा गोल्ड से जुड़े इस मामले ने पूरे व्यापारिक समुदाय को सतर्क कर दिया है। पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
