Middle East Tension: ईरान पर 48 घंटे में दूसरी बार अमेरिकी हमला, बंदर अब्बास में गूंजे धमाके,
Middle East में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। जहां एक तरफ युद्ध रोकने और हालात सामान्य करने के लिए शांति वार्ता जारी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है। पिछले 48 घंटों के भीतर अमेरिकी सेना ने दूसरी बार ईरान पर हमला किया है। इस बार अमेरिकी हमलों का निशाना ईरान के सैन्य ठिकाने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौकाएं बनीं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम (CENTCOM) ने दक्षिणी ईरान में कई ऑपरेशन चलाए, जिनमें ड्रोन हमले और समुद्री कार्रवाई शामिल रही। इन हमलों के बाद दक्षिणी ईरान के रणनीतिक शहर बंदर अब्बास में देर रात लगातार तीन धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धमाकों के बाद ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम तुरंत सक्रिय हो गया और आसमान में कई राउंड फायरिंग की गई।
48 घंटे में दूसरी बड़ी कार्रवाई
जानकारी के अनुसार अमेरिकी सेना ने पिछले दो दिनों में ईरान के खिलाफ लगातार दूसरी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए की गई है।
सेंटकॉम के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बयान जारी कर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में तैनात अमेरिकी सैनिकों और वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह ऑपरेशन चलाया गया। उनका दावा है कि IRGC की ओर से समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश की जा रही थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय जहाजों और अमेरिकी हितों को खतरा पैदा हो सकता था।
अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरानी नौसेना की कुछ नावें समुद्र में माइंस बिछाने की तैयारी कर रही थीं। इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने मिसाइल लॉन्च साइटों और IRGC की कई नावों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया।
बंदर अब्बास में गूंजे धमाके
ईरानी मीडिया ने अमेरिकी हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि दक्षिणी ईरान का बंदर अब्बास शहर एक बेहद महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र है। यह इलाका होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब स्थित है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है।
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक रात करीब 1:30 बजे शहर के पूर्वी हिस्से में लगातार तीन जोरदार धमाके सुनाई दिए। धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। इसके तुरंत बाद ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गया और आसमान में जवाबी फायरिंग शुरू कर दी गई।
हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके में हाई अलर्ट पर हैं।
अमेरिका ने बताया आत्मरक्षा का कदम
अमेरिका ने इस कार्रवाई को पूरी तरह आत्मरक्षा का कदम बताया है। सेंटकॉम के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की अस्थिरता पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकती है। यही वजह है कि अमेरिकी सेना ने संभावित खतरे को खत्म करने के लिए कार्रवाई की।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि ईरान की ओर से समुद्री मार्गों में बाधा डालने की कोशिश की जाती है, तो उसका जवाब और सख्ती से दिया जाएगा। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह क्षेत्र में अपने सैन्य और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
ईरान ने कहा- सीजफायर का उल्लंघन
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरानी सरकार का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई सीजफायर समझौतों का खुला उल्लंघन है और इससे शांति वार्ता को बड़ा नुकसान पहुंचेगा।
ईरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने इसी तरह हमले जारी रखे, तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका दोहरा रवैया अपना रहा है। एक तरफ वह बातचीत और शांति की बात करता है, जबकि दूसरी तरफ लगातार सैन्य हमले कर रहा है।
ईरान ने यह भी कहा कि अगर अमेरिकी आक्रामकता जारी रही तो किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं होगा। तेहरान का कहना है कि अमेरिका की कार्रवाई पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ा सकती है और इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक राजनीति और सुरक्षा का केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक रास्तों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां सैन्य संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी, समुद्री व्यापार में बाधा और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
चीन और रूस को भी दिया गया संदेश
अमेरिका की इस कार्रवाई को सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इसके जरिए अमेरिका ने चीन और रूस को भी अप्रत्यक्ष संदेश देने की कोशिश की है। मिडिल ईस्ट में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि वह क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और ताकत बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को लेकर रूस और चीन पहले ही अमेरिका की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। ऐसे में यह टकराव आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को और जटिल बना सकता है।
ट्रंप के बयान से बढ़ा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने भी विवाद बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने ओमान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के साथ किसी तरह का समझौता किया गया, तो अमेरिका कड़ा कदम उठाएगा।
ट्रंप के बयान को लेकर मिडिल ईस्ट में नई बहस शुरू हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकती है।
क्या बढ़ सकता है बड़ा सैन्य संघर्ष?
मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात को देखते हुए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह तनाव किसी बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है। लगातार हो रहे हमले, जवाबी चेतावनियां और कूटनीतिक बयानबाजी इस खतरे को बढ़ा रहे हैं।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी भी दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहा है, लेकिन हालात जिस तेजी से बदल रहे हैं, उसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
निष्कर्ष
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। 48 घंटे में दूसरी बार अमेरिकी हमले और बंदर अब्बास में हुए धमाकों ने यह साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। जहां अमेरिका अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा बता रहा है, वहीं ईरान इसे सीजफायर का उल्लंघन मान रहा है।
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या फिर यह टकराव किसी बड़े संघर्ष का रूप ले लेता है।

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