तपस्वी मोहन मुनि जी पुण्य स्मृति दिवस पर जावरा की जीवदया सोसायटी गौशाला में गुरु भक्तों ने गौसेवा, हरिघास वात्सल्य और नवकारसी के साथ भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में समाज के अनेक वरिष्ठजन एवं गुरुभक्त उपस्थित रहे।
तपस्वी मोहन मुनि जी पुण्य स्मृति दिवस श्रद्धा, सेवा और गौसेवा के साथ मनाया गया
तपस्वी मोहन मुनि जी का स्मरण
तपस्वी मोहन मुनि जी पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर जावरा में श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अनूठा संगम देखने को मिला। जैन दिवाकर स्मारक एवं जैन दिवाकर चिकित्सालय रतलाम के प्रेरणा पुंज, घोर तपस्वी, तेलातप के प्रणेता और सेवाभावी संत तपस्वी श्री मोहन मुनि जी निर्भय की 19वीं पुण्यतिथि पर जीवदया सोसायटी गौशाला में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।यह आयोजन जैन दिवाकर मित्र मण्डल द्वारा आयोजित किया गया, जहां गौमाता को हरिघास का वात्सल्य कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गुरु भक्त, समाजसेवी और जैन समाज के वरिष्ठजन उपस्थित रहे।
गौशाला में हुआ सेवा समर्पण कार्यक्रम
तपस्वी मोहन मुनि जी पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्राणी मात्र के प्रति दया और करुणा का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई दिया। गुरु भक्तों ने गौमाता को हरिघास अर्पित कर जीवदया का संदेश दिया।गुरुभक्त समाजसेवी सुभाष टुकड़िया एवं जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय मंत्री संदीप रांका ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि तपस्वी मोहन मुनि जी म सा का संपूर्ण जीवन सेवा, त्याग और साधना को समर्पित रहा।उन्होंने बताया कि तपस्वी श्री मोहन मुनि जी निर्भय ने समाज और श्रमण संघ की एकता के लिए हमेशा संघर्ष किया। उनके जीवन की प्रेरणादायक घटनाएं आज भी समाज को दिशा प्रदान करती हैं।
श्रमण संघ के लिए अविस्मरणीय योगदान
कार्यक्रम में उपस्थित गुरु भक्तों ने कहा कि तपस्वी मोहन मुनि जी म सा अपने गुरु जगतवल्लभ जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज के आदर्शों पर चलने वाले महान संत थे।जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज ने श्रमण संघीय एकता के लिए आचार्य पद का त्याग किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए तपस्वी मोहन मुनि जी म सा ने श्रमण संघ पर आए संकट को दूर करने के लिए आचार्य डॉ. शिवमुनि जी म सा से मिलने हेतु रतलाम से दिल्ली तक उग्र विहार प्रारंभ किया।बताया गया कि दिल्ली के पास दुदु क्षेत्र में उग्र विहार के दौरान हुई दुर्घटना में उनका देव लोक गमन हो गया। लेकिन उनके इस महान बलिदान से श्रमण संघ पुनः एकजुट और मजबूत हुआ।
तपस्वी मोहन मुनि जी ने कराई सामूहिक तेले तप आराधना
तपस्वी मोहन मुनि जी पुण्य स्मृति दिवस पर वक्ताओं ने कहा कि गुरुदेव ने हजारों श्रद्धालुओं को सामूहिक तेले तप की आराधना कराई और लोगों को आत्मशुद्धि तथा कर्म निर्जरा का मार्ग बताया।उन्होंने असहाय, जरूरतमंद और पीड़ित लोगों की सहायता को भी अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया। जैन दिवाकर संगठन समिति को मजबूती प्रदान करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे गुरु भक्त और समाजजन
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गुरु भक्त उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से —
- श्री वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ के पूर्व अध्यक्ष पुखराजमल कोचट्टा
- पारसमल बरड़िया
- सुशील चपड़ोद
- बसंतीलाल चपड़ोद
- जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय महामंत्री राकेश मेहता
- पूज्य मन्नालाल ट्रस्ट अध्यक्ष श्री पाल कोचट्टा
- आल इंडिया जैन कांफ्रेंस दिल्ली एवं जैन दिवाकर संगठन समिति के वरिष्ठ मार्गदर्शक सुजानमल कोचट्टा
- श्री कस्तुरमुनि पावनधाम ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पारसमल गादिया
- उपाध्यक्ष अजीत रांका
- निर्माण चेयरमेन विनोद लुणिया
- राकेश पी. कोचट्टा
- गुरु भक्त सुजानमल ओरा
- जै सोशल ग्रुप मेन अध्यक्ष अशोक चोपड़ा
- सीनियर सिटीजन अध्यक्ष नवनीत सिंहल
- पत्रकार पारसमल छाजेड़
- महावीर डांगी
- जवाहरलाल श्रीमाल
- विमल सिसोदिया
- अशोक ओरा
- विनोद चपड़ोद
- सुधीर कोचट्टा
- प्रथम कोचट्टा
सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।सभी ने तपस्वीराज गुरुदेव श्री मोहन मुनि जी म सा “काले डंडे वाले” के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि एवं भावांजलि अर्पित की।
गोग्रास और नवकारसी का लाभ
गौमाता को गोग्रास एवं गुरुभक्तों की नवकारसी का लाभ गुरुभक्त सुश्रावक सुजानमल, सुधीर कुमार एवं सचिन कुमार कोचट्टा परिवार द्वारा लिया गया।कार्यक्रम के अंत में सुभाष टुकड़िया एवं संदीप रांका ने सभी उपस्थित गुरु भक्तों एवं समाजजनों का आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि गुरुदेव की प्रेरणाओं को जीवन में आत्मसात कर कर्मों की निर्जरा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
तपस्वी मोहन मुनि जी का जीवन समाज के लिए प्रेरणा
तपस्वी मोहन मुनि जी पुण्य स्मृति दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं बल्कि सेवा, त्याग, तप और संघ एकता का प्रेरणापर्व है। गुरुदेव का संपूर्ण जीवन समाज, धर्म और मानवता के लिए समर्पित रहा।आज भी उनके द्वारा दिए गए संस्कार और प्रेरणाएं हजारों श्रद्धालुओं को धर्ममार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही हैं।
