Ranakpur जैन तीर्थ को स्वतंत्र महातीर्थ घोषित करने की मांग तेज, प्रधानमंत्री को भेजा गया ज्ञापन
Ranakpur जैन मंदिर को स्वतंत्र महातीर्थ घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। जैन समाज के विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ई-मेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से ज्ञापन भेजकर इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
यह मांग झकनावदा निवासी मनीष-शैतानमल कुमट (जैन) द्वारा अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नव युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश छाजेड़ पारा और प्रांतीय अध्यक्ष मोहित तातेड धार के मार्गदर्शन में भेजे गए पत्र के माध्यम से रखी गई है।
Ranakpur जैन तीर्थ का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
रणकपुर जैन मंदिर राजस्थान के पाली जिले में अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित एक विश्वप्रसिद्ध जैन तीर्थ है। यह मंदिर 15वीं शताब्दी में निर्मित हुआ था और अपनी अद्भुत शिल्पकला, विशाल संरचना और आध्यात्मिक महत्व के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
यह तीर्थ जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। यहां की वास्तुकला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हर वर्ष हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां दर्शन के लिए आते हैं। इसकी शांत और आध्यात्मिक वातावरण लोगों को आत्मिक शांति प्रदान करता है।
ज्ञापन में क्या रखी गई मुख्य मांग?
जैन समाज द्वारा भेजे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि रणकपुर जैन मंदिर वर्तमान में वन विभाग और सरकारी नियंत्रण के अधीन है, जिसके कारण तीर्थ के विकास और संचालन में कई तरह की बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
ज्ञापन में यह मांग की गई है कि इस तीर्थ को वन विभाग के नियंत्रण से मुक्त कर जैन ट्रस्ट के अधीन स्वतंत्र महातीर्थ के रूप में घोषित किया जाए।
संगठनों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण धार्मिक गतिविधियों के संचालन, रखरखाव और विकास कार्यों में कई प्रशासनिक और तकनीकी समस्याएं आती हैं।
जैन समाज की लंबे समय से चल रही मांग
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जैन समाज की विभिन्न संस्थाएं और श्रद्धालु लंबे समय से यह मांग करते आ रहे हैं कि इस पवित्र तीर्थ को पूर्ण रूप से स्वतंत्र धार्मिक ट्रस्ट के अधीन सौंपा जाए।
समाज का मानना है कि यदि यह तीर्थ जैन ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है तो इसका संरक्षण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में भी सुधार होगा।

प्रशासनिक नियंत्रण से आ रही चुनौतियां
वर्तमान में सरकारी और वन विभागीय नियंत्रण के कारण तीर्थ के कई विकास कार्यों में बाधाएं आती हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, मंदिर परिसर का रखरखाव और धार्मिक परंपराओं के पालन में भी कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कई बार अनुमति प्रक्रियाओं के कारण आवश्यक विकास कार्य समय पर नहीं हो पाते, जिससे तीर्थ की व्यवस्था प्रभावित होती है।
मनीष कुमट (जैन) का पक्ष
इस ज्ञापन के प्रमुख प्रेषक मनीष कुमट (जैन) ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि रणकपुर जैन मंदिर को स्वतंत्र महातीर्थ घोषित किया जाए।
उनका कहना है कि यह स्थल केवल एक मंदिर नहीं बल्कि अहिंसा, तप, त्याग और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसका संचालन जैन ट्रस्ट को सौंपा जाता है, तो समाज की भागीदारी से इसका बेहतर संरक्षण और विकास संभव होगा।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
रणकपुर जैन मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय संस्कृति और विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह मंदिर अपनी अद्वितीय नक्काशी और भव्य वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसकी संरचना में हजारों स्तंभ हैं, जिनकी नक्काशी इसे और भी विशेष बनाती है।
यह तीर्थ जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ भारतीय कला और शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण भी है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि इस तीर्थ को स्वतंत्र रूप से जैन ट्रस्ट के अधीन सौंपा जाता है, तो इससे धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
समाज की अपेक्षाएं और भावनाएं
जैन समाज का मानना है कि रणकपुर जैन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी आस्था और संस्कृति का प्रतीक है।
समाज चाहता है कि इस तीर्थ का संचालन पूरी तरह धार्मिक संस्थाओं के हाथ में हो, ताकि इसकी पवित्रता और परंपरा सुरक्षित रह सके।
सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग
ज्ञापन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की गई है कि इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
समाज का कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो यह निर्णय न केवल जैन समाज के लिए बल्कि पूरे देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, रणकपुर जैन मंदिर को स्वतंत्र महातीर्थ घोषित करने की मांग अब एक महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक मुद्दा बन चुकी है।
जैन समाज का मानना है कि यदि इस तीर्थ को जैन ट्रस्ट के अधीन लाया जाता है, तो इसका विकास, संरक्षण और धार्मिक गतिविधियां अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले निर्णय पर टिकी हुई है, जिससे इस ऐतिहासिक तीर्थ के भविष्य की दिशा तय होगी।
