MP महिला आयोग 6 साल बाद सक्रिय, भोपाल में जनसुनवाई शुरू:
भोपाल। MP राज्य महिला आयोग में करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर जनसुनवाई की शुरुआत हुई है। इस पुनः सक्रियता से राज्यभर की पीड़ित महिलाओं में न्याय मिलने की उम्मीद एक बार फिर मजबूत हुई है। भोपाल में आयोजित पहले सत्र में आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक की संयुक्त बेंच ने घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मामलों की सुनवाई की। पहले ही दिन बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी शिकायतें लेकर आयोग कार्यालय पहुंचीं, जहां उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना गया और दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर जवाब भी लिए गए।
छह साल बाद शुरू हुई जनसुनवाई, महिलाओं में राहत की उम्मीद
महिला आयोग में लंबे समय से जनसुनवाई बंद थी, जिसके कारण कई शिकायतें और मामले लंबित पड़े हुए थे। पीड़ित महिलाएं वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रही थीं।
ऐसे में आयोग का यह नया कदम महिलाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पहले ही दिन जिस तरह से बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी समस्याएं लेकर पहुंचीं, उससे यह स्पष्ट है कि लोगों में इस प्रक्रिया को लेकर भरोसा और उम्मीद दोनों बढ़े हैं।
पहले दिन 40 मामलों की विस्तृत सुनवाई
भोपाल जिले से जुड़े लगभग 40 प्रकरण पहले दिन सुनवाई के लिए रखे गए।
अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक ने प्रत्येक मामले को गंभीरता से सुना और आवेदकों तथा प्रतिपक्ष दोनों के बयान दर्ज किए।
सुनवाई के दौरान कई मामलों में दोनों पक्षों को समझाने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के प्रयास भी किए गए। आयोग ने यह स्पष्ट किया कि हर मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता प्राथमिकता होगी।
संवेदनशील मामला बना चर्चा का केंद्र
जनसुनवाई के दौरान एक मामला विशेष रूप से चर्चा का विषय बन गया, जिसमें एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए।
महिला ने बताया कि शादी के बाद उसे अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा है और उस पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।
मामले में यह भी सामने आया कि ससुराल पक्ष पर झूठे केस दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने और विवाद को पैसे के लेन-देन से जोड़ने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इसके अलावा एक और गंभीर पहलू यह सामने आया कि कथित रूप से बहू पर घरेलू हिंसा की झूठी शिकायत दर्ज कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा था और इसके बदले एक करोड़ रुपये की मांग से जुड़े आरोप भी सामने आए।
आयोग ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए प्रशासन को आवश्यक जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
भरण-पोषण और संपत्ति विवाद का मामला भी सामने आया
एक अन्य मामले में घरेलू हिंसा के साथ आर्थिक विवाद भी जुड़ा हुआ पाया गया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पहले ही समझौते के तहत महिला को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और बच्ची के नाम पर एक प्लॉट भी रजिस्टर्ड किया गया है।
इसके बावजूद महिला द्वारा अतिरिक्त भरण-पोषण की मांग की जा रही थी।
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि मामले का निपटारा कानून और नियमों के अनुसार ही किया जाएगा।
आयोग का स्पष्ट और सख्त संदेश
महिला आयोग ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आयोग ने यह भी कहा कि घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और उत्पीड़न से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की देरी नहीं होने दी जाएगी और हर शिकायत का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि गंभीर मामलों में आवश्यकतानुसार प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी।
लंबे समय बाद सक्रिय हुई व्यवस्था से बढ़ी उम्मीदें
छह साल बाद शुरू हुई यह जनसुनवाई व्यवस्था न केवल प्रशासनिक सक्रियता का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब महिलाओं की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा।
राज्यभर से आने वाले मामलों को सुनने और उनका समाधान करने की प्रक्रिया को गति देने की तैयारी की जा रही है।
मंगलवार को फिर होगी सुनवाई
पहले दिन की सुनवाई के बाद अब मंगलवार को भी जनसुनवाई जारी रहेगी।
इसके लिए लगभग 42 नए मामलों को सूचीबद्ध किया गया है, जिन पर आयोग विस्तार से सुनवाई करेगा।
आने वाले दिनों में अधिक से अधिक महिलाओं को अपनी शिकायतें रखने और न्याय पाने का अवसर मिलने की संभावना है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश महिला आयोग का छह साल बाद सक्रिय होना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। भोपाल में शुरू हुई जनसुनवाई से यह संकेत मिला है कि अब घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद और उत्पीड़न जैसे मामलों पर अधिक गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी।
पहले ही दिन की सुनवाई में जिस तरह मामलों को सुना गया और सख्त निर्देश दिए गए, उससे पीड़ित महिलाओं में न्याय की उम्मीद और मजबूत हुई है।
